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Pilibhit News: अदालतों में तारीख पर तारीख, वर्षों से फैसले का इंतजार

Wed, 26 Aug 2026 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 12:24 AM IST
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Date after date in courts; years spent waiting for a verdict.
लेखराज - फोटो : 1
पीलीभीत। जमीन और राजस्व से जुड़े विवादों का निस्तारण कराने के लिए न्यायालयों की चौखट पर पहुंचने वाले फरियादियों को न्याय से पहले लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। किसी का भाई से जमीन का विवाद वर्षों से चल रहा है तो कोई दाखिल-खारिज में लगी आपत्ति के कारण अपनी जमीन के अधिकार के लिए अदालत के चक्कर काट रहा है। कई फरियादी ऐसे हैं जो महीनों नहीं, बल्कि वर्षों से हर तारीख पर तहसील पहुंच रहे हैं, लेकिन मुकदमे का अंतिम फैसला उनकी पहुंच से दूर है। हर तारीख के साथ उनके समय और पैसे दोनों का खर्च बढ़ रहा है।
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मंगलवार को सदर तहसील के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की पड़ताल की गई तो यह तस्वीर सामने आई। सदर तहसील के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में कुल 789 मामले लंबित हैं।
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इनमें 96 मामले ऐसे हैं जो एक साल से अधिक समय से अदालतों में विचाराधीन हैं। 18 वाद तीन से पांच वर्ष पुराने हैं, जबकि दो मामले पांच वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। वहीं, एक पक्षकार ने अपने मामले के करीब सात साल से लंबित होने की बात बताई। इससे साफ है कि राजस्व विवादों के निस्तारण में लंबा समय लगने से फरियादियों की परेशानी बढ़ रही है।
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पहले निस्तारित हो चुके मामले भी रिकॉल में अटके : राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की पड़ताल के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए, जो पहले एसडीएम न्यायालय से निस्तारित हो चुके थे, लेकिन बाद में रिकॉल की प्रक्रिया में दोबारा सुनवाई के लिए आ गए। इसके बाद पक्षकारों को फिर तारीखों पर उपस्थित होना पड़ रहा है। ऐसे मामलों में पुराने विवाद दोबारा न्यायालय की प्रक्रिया में आने से फरियादियों का इंतजार और बढ़ जाता है।
धारा 24 व 116 एसडीएम व धारा 35 में तहसीलदार न्यायालय में होते हैं वाद दर्ज : उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के तहत धारा 24 में भूमि की सीमा और सीमा-चिह्न से जुड़े विवादों की सुनवाई उपजिलाधिकारी (एसडीएम) करते हैं। वहीं धारा 116 के तहत सहखातेदारों के बीच जोत/खाते के बंटवारे का वाद भी एसडीएम की मूल अदालत में आता है। दूसरी ओर धारा 35 उत्तराधिकार या हस्तांतरण के आधार पर नामांतरण (दाखिल-खारिज) से संबंधित है और इसकी कार्रवाई तहसीलदार करते हैं।

धारा 35 के तहत विवादित नामांतरण का निर्णय भी तहसीलदार करते हैं, जिसके आदेश के विरुद्ध एसडीएम के समक्ष अपील का प्रावधान है। संवाद

लेखराज

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