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बांध और गांवों को बचाने के लिए बनेंगे 11 स्पर
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Sat, 03 Jan 2015 12:25 AM IST
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शारदा डैम से सबसे नजदीकी क्षेत्र नगरिया खुर्दकलां है। जहां डैम की नदी से दूरी मात्र 600 मीटर रह जाती है। नदी ने बरसात के दिनों में यहां भारी तबाही मचाई थी, इसके बावजूद यहां स्पर नहीं बनाए गए थे। बरसात से पूर्व ठोकरें न बनाने का नतीजा यह निकला कि नदी ने मार्जिनल बांध को क्षति पहुंचानी शुरू कर दी थी। हालांकि बाढ़ खंड के अभियंताओं ने आनन-फानन में बाढ़ नियंत्रण कार्य कराकर किसी तरह बचाया था।
तबाही के बाद लिया सबक
शारदा सागर डैम बनाते समय अभियंताओं ने शारदा नदी के किनारे मार्जिनल बांध व पत्थर की ठोकरें बनाई थीं, लेकिन वर्ष 1989 में स्पर 9सी कट जाने से कई गांव की आबादी का क्षेत्र और भूमि नदी में समा गई थी। चार माह पूर्व डैम के खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने 3.70 करोड़ की लागत से पत्थर की ठोकरें बनाने का प्रोजेक्ट भेजा था। इसके बाद टीएसी ने पत्थर की ठोकरों का प्रोजेक्ट नामंजूर कर जीओ बैग से 11 स्पर बनाने की मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट दो करोड़ का होगा।
शारदा डैम और सटे गांवों को सुरक्षित रखने को नगरिया खुर्द में स्पर नाइन बी से लेकर छह तक 11 स्पर बनाए जाएंगे। सभी के बीच में मजबूत प्लेटफार्म बनेगा, जिससे डैम सुरक्षित होगा। साथ ही नगरिया खुर्दकलां, ढकिया ताल्लुुके महाराजपुर, रमनगरा व मठइया लालपुर सहित नौ गांवों की आबादी और कृषि भूमि भी सुरक्षित हो जाएगी। धन आवंटन होते ही बाढ़ से पूर्व ही कार्य खत्म करने का लक्ष्य है।
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मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड।
डैम और नहरों का किया गया निरीक्षण
माधोटांडा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता काजिम अली ने वाइफरकेशन की नहरों के साथ शारदा डैम का निरीक्षण किया। उन्होंने एसएसबी की मोटरबोट से डैम की सीमाओं को भी परखा।
अधीक्षण अभियंता ने यहां पहुंचकर सिंचाई विभाग की वाइफरकेशन परियोजना के हेड को देखा। हेड वर्क्स खंड के अभियंताओं से नहरों के रखरखाव की जानकारी करने के साथ पानी के रोस्टर के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वह शारदा सागर के अधिशासी अभियंता जीवनराम के साथ शारदा डैम पहुंचे। यहां उन्होंने डैम का निरीक्षण करने के साथ एसएसबी की मोटरबोट से डैम की सीमाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद वह वनबसा रवाना हो गए। इस मौके पर सहायक अभियंता वीके शर्मा, आरए शर्मा, अवर अभियंता दीवान सिंह खोलिया समेत अन्य अभियंता मौजूद रहे।
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तबाही के बाद लिया सबक
शारदा सागर डैम बनाते समय अभियंताओं ने शारदा नदी के किनारे मार्जिनल बांध व पत्थर की ठोकरें बनाई थीं, लेकिन वर्ष 1989 में स्पर 9सी कट जाने से कई गांव की आबादी का क्षेत्र और भूमि नदी में समा गई थी। चार माह पूर्व डैम के खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने 3.70 करोड़ की लागत से पत्थर की ठोकरें बनाने का प्रोजेक्ट भेजा था। इसके बाद टीएसी ने पत्थर की ठोकरों का प्रोजेक्ट नामंजूर कर जीओ बैग से 11 स्पर बनाने की मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट दो करोड़ का होगा।
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शारदा डैम और सटे गांवों को सुरक्षित रखने को नगरिया खुर्द में स्पर नाइन बी से लेकर छह तक 11 स्पर बनाए जाएंगे। सभी के बीच में मजबूत प्लेटफार्म बनेगा, जिससे डैम सुरक्षित होगा। साथ ही नगरिया खुर्दकलां, ढकिया ताल्लुुके महाराजपुर, रमनगरा व मठइया लालपुर सहित नौ गांवों की आबादी और कृषि भूमि भी सुरक्षित हो जाएगी। धन आवंटन होते ही बाढ़ से पूर्व ही कार्य खत्म करने का लक्ष्य है।
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मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड।
डैम और नहरों का किया गया निरीक्षण
माधोटांडा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता काजिम अली ने वाइफरकेशन की नहरों के साथ शारदा डैम का निरीक्षण किया। उन्होंने एसएसबी की मोटरबोट से डैम की सीमाओं को भी परखा।
अधीक्षण अभियंता ने यहां पहुंचकर सिंचाई विभाग की वाइफरकेशन परियोजना के हेड को देखा। हेड वर्क्स खंड के अभियंताओं से नहरों के रखरखाव की जानकारी करने के साथ पानी के रोस्टर के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वह शारदा सागर के अधिशासी अभियंता जीवनराम के साथ शारदा डैम पहुंचे। यहां उन्होंने डैम का निरीक्षण करने के साथ एसएसबी की मोटरबोट से डैम की सीमाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद वह वनबसा रवाना हो गए। इस मौके पर सहायक अभियंता वीके शर्मा, आरए शर्मा, अवर अभियंता दीवान सिंह खोलिया समेत अन्य अभियंता मौजूद रहे।