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जल्द पकड़े जाएंगे अमरिया क्षेत्र के बाघ
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:51 PM IST
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वनसंरक्षक ने शासन को भेजी कार्ययोजना
अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघों को जल्द पकड़ा जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी गई है। स्वीकृति मिलने पर इन बाघों को पकड़कर प्रदेश के ही अन्य जंगलों में छोड़ा जाएगा।
अमरिया क्षेत्र में पिछले पांच सालों से बाघों का परिवार रह रहा है। विभागीय आंकड़ों की अनुसार इनकी संख्या छह हो गई है। इन बाघ को पकड़ने के लिए चले अभियान के दौरान विभाग के कैमरे में कई बार बाघों के फोटो आए और पगचिह्न भी मिले। इस दौरान सितंबर माह में ही एक बार एक ही कैमरे में 12-12 सेकेंड के अंतर पर पांच बाघों के फोटो कैद किए गए। माना जा रहा है बाघिन अपने परिवार के साथ घूम रही होगी। बाघों को पकड़कर किसी दूसरे जंगल में छोड़ने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मंगलवार को टाइगर रिजर्व मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता के दौरान वन संरक्षक ने बताया कि अमरिया क्षेत्र में टॉवर बनाकर बाघों की निगरानी की जाएगी और कार्ययोजना एवं इसके लिए प्रस्तावित बजट की स्वीकृति मिलने पर बाघों को पकड़कर बलरामपुर, गोरखपुर के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
उत्तराखंड पहुंचा खूनी बाघ
करीब चार माह पूर्व वनकटी से निकलकर कचहरी होते हुए देवहा नदी किनारे हिमकनपुर और बेहरी में तीन किसानों को मौत के घाट उतारने वाला खूनी बाघ उत्तराखंड पहुंच गया है। वन संरक्षक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया बेहरी क्षेत्र में उसकी अंतिम बार लोकेशन दो सितंबर को मिली थी। इसके बाद पांच सितंबर को उत्तराखंड के सुरई जंगल में उसके पगचिह्न मिले हैं, जिसका मिलान कराया गया है।
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अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघों को जल्द पकड़ा जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी गई है। स्वीकृति मिलने पर इन बाघों को पकड़कर प्रदेश के ही अन्य जंगलों में छोड़ा जाएगा।
अमरिया क्षेत्र में पिछले पांच सालों से बाघों का परिवार रह रहा है। विभागीय आंकड़ों की अनुसार इनकी संख्या छह हो गई है। इन बाघ को पकड़ने के लिए चले अभियान के दौरान विभाग के कैमरे में कई बार बाघों के फोटो आए और पगचिह्न भी मिले। इस दौरान सितंबर माह में ही एक बार एक ही कैमरे में 12-12 सेकेंड के अंतर पर पांच बाघों के फोटो कैद किए गए। माना जा रहा है बाघिन अपने परिवार के साथ घूम रही होगी। बाघों को पकड़कर किसी दूसरे जंगल में छोड़ने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मंगलवार को टाइगर रिजर्व मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता के दौरान वन संरक्षक ने बताया कि अमरिया क्षेत्र में टॉवर बनाकर बाघों की निगरानी की जाएगी और कार्ययोजना एवं इसके लिए प्रस्तावित बजट की स्वीकृति मिलने पर बाघों को पकड़कर बलरामपुर, गोरखपुर के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
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उत्तराखंड पहुंचा खूनी बाघ
करीब चार माह पूर्व वनकटी से निकलकर कचहरी होते हुए देवहा नदी किनारे हिमकनपुर और बेहरी में तीन किसानों को मौत के घाट उतारने वाला खूनी बाघ उत्तराखंड पहुंच गया है। वन संरक्षक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया बेहरी क्षेत्र में उसकी अंतिम बार लोकेशन दो सितंबर को मिली थी। इसके बाद पांच सितंबर को उत्तराखंड के सुरई जंगल में उसके पगचिह्न मिले हैं, जिसका मिलान कराया गया है।
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