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अस्पताल का दृश्य देखकर दंग रह गए एएसपी
पीलीभीत।
Updated Wed, 08 Apr 2015 11:20 PM IST
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पुलिस की लापरवाही की सूचना पर बुधवार को जिला अस्पताल में औचक छापेमारी
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की गई। एसपी के निर्देश पर एएसपी सुधीर कुमार सिंह निरीक्षण करने जिला
अस्पताल पहुंचे तो वहां का दृश्य देख दंग रह गए।
रिकार्ड के मुताबिक जेल से यहां दो हत्यारोपी सजायाफ्ता कैदी, एक हत्यारोपी विचाराधीन बंदी व एक धोखाधड़ी के आरोपी में से हत्यारोपी दो कैदी बिस्तर से गायब मिले। चारों की सुरक्षा में तैनात आठ पुलिस वालों में से छह पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद नहीं मिले। जबकि दो हवालाती बंदी व दो सिपाही मौजूद मिले। एएसपी ने वहां रखीं चारों रायफलें व मैग्जीन कब्जे में ले लीं।
एएसपी अभी पूछताछ कर रही थे कि इसी बीच गायब तीन सिपाही व एक बंदी भी बेड पर पहुंच गया। एएसपी ने तीनों सिपाहियों को जमकर लताड़ लगाई और गायब अन्य तीन सिपाहियों की आसपास खोज कराई, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। एएसपी के जाते ही दूसरा गायब कैदी भी बेड पर पहुंच गया।
एएसपी की रिपोर्ट के बाद एसपी ने गायब सिपाही किसनवीर, ओमवीर व प्रेम वीर को सस्पेंड कर दिया, जबकि मौके पर कुछ देर बाद पहुंचे सिपाही पंकज यादव, पराग गौड़ व हबीबुल रहमान को अर्दली रूम (सुक्ष्म दंड) से दंडित किया। बाद में निलंबित तीनों सिपाही भी देर सायं अस्पताल पहुंच गए। हालांकि देर सायं तक एसपी जेके शाही तीनों निलंबित सिपाहियों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी से इंकार किया है।
मामले को छिपाते दिखे अफसर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एएसपी जब मौके पर पहुंचे तो दो कैदी व छह सिपाही वार्ड में नहीं थे। चार सिपाहियों की रायफलें भी बेड पर पड़ी थीं। इन चार रायफलों को एएसपी ने कब्जे में लेकर उसे पुलिस लाइन में जमा भी कराया, लेकिन इसमे से मात्र तीन पुलिस कर्मियों को ही निलंबित किया।
एक के संबंध में एसपी का तर्क था कि वह शौच के लिए गया था। एएसपी के निरीक्षण के दौरान ही वह आ गया, इस लिए उसे निलंबित नहीं किया गया है। यही नहीं बिस्तर से गायब मिले दो कैदी भी बारी-बारी बिस्तर पर पहुंच गए लिहाजा एसपी कैदियों के गायब होने की बात से भी इनकार कर रहे हैं।
जेल से बाहर आने का आसान बहाना है गंभीर बीमारी
पीलीभीत। ऊंची पहुंच रखने वाले बंदी हो या कैदी। वह गंभीर बीमारी का बहाना बना जेल से आसानी से बाहर आकर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। उनके इस कृत्य में डाक्टर से लेकर पुलिसकर्मी तक सहयोगी बन रहे हैं। एएसपी के निरीक्षण में बुधवार को जो देखने को मिला वह कुछ इस तरफ इशारा करता है।
खास बात यह है कि हत्या जैसे जघन्य अपराध के न सिर्फ विचाराधीन बंदियों के साथ यह दरियादिली बरती जा रही है बल्कि हत्यारोपी सजायाफ्ता कैदियों के साथ भी यही किया जा रहा है। खास बात यह है कि जिन बंदियों को जेल से जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है प्रथम दृष्ट्या उन्हें देख ऐसा नहीं लगता की वह गंभीर रूप से बीमार होंगे।
आरोपी कैदियों के अपराध पर एक नज़र
थाना न्यूरिया के मोहल्ला ठाकुरद्वारा निवासी अंसार अहमद को 25 आर्म्स एक्ट व 302 के तहत 16 दिसंबर 12 को गिरफ्तार कर सुनगढ़ी पुलिस ने चालान भेजा था। जिसका मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। शहर कोतवाली पुलिस ने शहर कोतवाली के मोहल्ला भूरे खां निवासी रहीस को हत्या के मामले में 30 जनवरी 15 को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। थाना जहॉनाबाद के गांव परेवावैश्य निवासी नसीमुलशान खां 10 फरवरी 10 से बंद था। उसे भी आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
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धोखाधड़ी के मामले में विचाराधीन बंदी मोहल्ला गोदावरी स्टेट कॉलोनी निवासी अशोक कुमार शर्मा 29 अक्तूबर 14 से जेल में था। जेल विजिट पर आए जिला अस्पताल के डॉक्टर सीबी चौरसिया ने अंसार के सीने में दर्द व दौरे, रहीस ने गर्दन व सीने में दर्द की शिकायत की थी। डॉक्टर के रेफर करने पर दोनों को क्रमश: 20 मार्च, 16 मार्च 15 को जिला अस्पताल भेजा गया था।
26 फरवरी 15 को सर्जन डॉ. पीके अग्रवाल ने नशीमुलशान खां को पीठ व कमर दर्द व अशोक को स्वांस की बीमारी होने पर हालत गंभीर बताई थी। सर्जन के रेफर करने पर दोनों को 30 मार्च को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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चार उपचाराधीन बंदी थे। जिनकी जांच पूरी करने के बाद उपचार किया जा रहा है। दवाइयां भी उन्हें बिस्तर पर ही दी जाती है। अगर कोई बेड से कहीं जाता है तो इसकी जिम्मेंदारी अभिरक्षा में लगे सिपाहियों की है।
डॉ सीबी चौरसिया, सर्जन
दवा लेने गया था तभी साहब आ गए...
सिपाही पराग गौड़ ने बताया कि जिस समय एएसपी साहब ने निरीक्षण किया उस समय बंदी नसीम के साथ दवा लेने नीचे अस्पताल गया था।
बंदी मरीज अशोक शर्मा के पास ड्यूटी कर रहे सिपाही पंकज यादव ने कहा कि निरीक्षण के समय मरीज के एक्सरे लेने गया था। वहीं सिपाही हबीबुल रहमन ने बताया कि सामने वाले वार्ड में खाना खा रहे थे।
सिपाही किशनवीर यादव व प्रेमवीर सिंह ने बताया कि 24 घंटे के ड्यूटी के दौरान दोपहर 11.30 बजे पुलिस लाइस स्थित बैरक में नहाने और खाना खाने गए थे। उसी समय एएसपी साहब का निरीक्षण हो गया।
रिकार्ड के मुताबिक जेल से यहां दो हत्यारोपी सजायाफ्ता कैदी, एक हत्यारोपी विचाराधीन बंदी व एक धोखाधड़ी के आरोपी में से हत्यारोपी दो कैदी बिस्तर से गायब मिले। चारों की सुरक्षा में तैनात आठ पुलिस वालों में से छह पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद नहीं मिले। जबकि दो हवालाती बंदी व दो सिपाही मौजूद मिले। एएसपी ने वहां रखीं चारों रायफलें व मैग्जीन कब्जे में ले लीं।
एएसपी अभी पूछताछ कर रही थे कि इसी बीच गायब तीन सिपाही व एक बंदी भी बेड पर पहुंच गया। एएसपी ने तीनों सिपाहियों को जमकर लताड़ लगाई और गायब अन्य तीन सिपाहियों की आसपास खोज कराई, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। एएसपी के जाते ही दूसरा गायब कैदी भी बेड पर पहुंच गया।
एएसपी की रिपोर्ट के बाद एसपी ने गायब सिपाही किसनवीर, ओमवीर व प्रेम वीर को सस्पेंड कर दिया, जबकि मौके पर कुछ देर बाद पहुंचे सिपाही पंकज यादव, पराग गौड़ व हबीबुल रहमान को अर्दली रूम (सुक्ष्म दंड) से दंडित किया। बाद में निलंबित तीनों सिपाही भी देर सायं अस्पताल पहुंच गए। हालांकि देर सायं तक एसपी जेके शाही तीनों निलंबित सिपाहियों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी से इंकार किया है।
मामले को छिपाते दिखे अफसर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एएसपी जब मौके पर पहुंचे तो दो कैदी व छह सिपाही वार्ड में नहीं थे। चार सिपाहियों की रायफलें भी बेड पर पड़ी थीं। इन चार रायफलों को एएसपी ने कब्जे में लेकर उसे पुलिस लाइन में जमा भी कराया, लेकिन इसमे से मात्र तीन पुलिस कर्मियों को ही निलंबित किया।
एक के संबंध में एसपी का तर्क था कि वह शौच के लिए गया था। एएसपी के निरीक्षण के दौरान ही वह आ गया, इस लिए उसे निलंबित नहीं किया गया है। यही नहीं बिस्तर से गायब मिले दो कैदी भी बारी-बारी बिस्तर पर पहुंच गए लिहाजा एसपी कैदियों के गायब होने की बात से भी इनकार कर रहे हैं।
जेल से बाहर आने का आसान बहाना है गंभीर बीमारी
पीलीभीत। ऊंची पहुंच रखने वाले बंदी हो या कैदी। वह गंभीर बीमारी का बहाना बना जेल से आसानी से बाहर आकर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। उनके इस कृत्य में डाक्टर से लेकर पुलिसकर्मी तक सहयोगी बन रहे हैं। एएसपी के निरीक्षण में बुधवार को जो देखने को मिला वह कुछ इस तरफ इशारा करता है।
खास बात यह है कि हत्या जैसे जघन्य अपराध के न सिर्फ विचाराधीन बंदियों के साथ यह दरियादिली बरती जा रही है बल्कि हत्यारोपी सजायाफ्ता कैदियों के साथ भी यही किया जा रहा है। खास बात यह है कि जिन बंदियों को जेल से जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है प्रथम दृष्ट्या उन्हें देख ऐसा नहीं लगता की वह गंभीर रूप से बीमार होंगे।
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आरोपी कैदियों के अपराध पर एक नज़र
थाना न्यूरिया के मोहल्ला ठाकुरद्वारा निवासी अंसार अहमद को 25 आर्म्स एक्ट व 302 के तहत 16 दिसंबर 12 को गिरफ्तार कर सुनगढ़ी पुलिस ने चालान भेजा था। जिसका मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। शहर कोतवाली पुलिस ने शहर कोतवाली के मोहल्ला भूरे खां निवासी रहीस को हत्या के मामले में 30 जनवरी 15 को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। थाना जहॉनाबाद के गांव परेवावैश्य निवासी नसीमुलशान खां 10 फरवरी 10 से बंद था। उसे भी आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
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धोखाधड़ी के मामले में विचाराधीन बंदी मोहल्ला गोदावरी स्टेट कॉलोनी निवासी अशोक कुमार शर्मा 29 अक्तूबर 14 से जेल में था। जेल विजिट पर आए जिला अस्पताल के डॉक्टर सीबी चौरसिया ने अंसार के सीने में दर्द व दौरे, रहीस ने गर्दन व सीने में दर्द की शिकायत की थी। डॉक्टर के रेफर करने पर दोनों को क्रमश: 20 मार्च, 16 मार्च 15 को जिला अस्पताल भेजा गया था।
26 फरवरी 15 को सर्जन डॉ. पीके अग्रवाल ने नशीमुलशान खां को पीठ व कमर दर्द व अशोक को स्वांस की बीमारी होने पर हालत गंभीर बताई थी। सर्जन के रेफर करने पर दोनों को 30 मार्च को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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चार उपचाराधीन बंदी थे। जिनकी जांच पूरी करने के बाद उपचार किया जा रहा है। दवाइयां भी उन्हें बिस्तर पर ही दी जाती है। अगर कोई बेड से कहीं जाता है तो इसकी जिम्मेंदारी अभिरक्षा में लगे सिपाहियों की है।
डॉ सीबी चौरसिया, सर्जन
दवा लेने गया था तभी साहब आ गए...
सिपाही पराग गौड़ ने बताया कि जिस समय एएसपी साहब ने निरीक्षण किया उस समय बंदी नसीम के साथ दवा लेने नीचे अस्पताल गया था।
बंदी मरीज अशोक शर्मा के पास ड्यूटी कर रहे सिपाही पंकज यादव ने कहा कि निरीक्षण के समय मरीज के एक्सरे लेने गया था। वहीं सिपाही हबीबुल रहमन ने बताया कि सामने वाले वार्ड में खाना खा रहे थे।
सिपाही किशनवीर यादव व प्रेमवीर सिंह ने बताया कि 24 घंटे के ड्यूटी के दौरान दोपहर 11.30 बजे पुलिस लाइस स्थित बैरक में नहाने और खाना खाने गए थे। उसी समय एएसपी साहब का निरीक्षण हो गया।