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50 लोगों की टीम, फिर भी नहीं मिल रहा बाघ

Tue, 12 Sep 2017 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  पीलीभीत।
अमर उजाला ब्यूरो  पीलीभीत। Updated Tue, 12 Sep 2017 11:27 PM IST
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Team of 50 people, still not getting tiger
टाइगर रिजर्व की सुरक्षा
-सवाल: जब पदचिह्न मिल रहे, फोटो आ रहे फिर क्यों नहीं हो रहा ट्रेस 
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खूनी बाघ को तलाशने के लिए वन संरक्षक के निर्देश पर 50 लोगों की टीम लगाई गई है। लगभग एक माह से चल रहे अभियान में पदचिह्न मिलने के साथ कई बार बाघ की फोटो भी कैद हुई। ऐसे में, सवाल यह उठता है इतना सब होने के बाद भी टीम को बाघ क्यों नहीं मिल रहा। सोमवार की रात भी बाघ के गन्ने के खेत तक पहुंचने के पदचिह्न मिले हैं। 
देवहा नदी किनारे बेहरी गांव खेतों में घूम रहे खूनी बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग एक माह से कोशिश कर रहा है लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। सोमवार की रात भी लेजर ड्रोन कैमरे से बाघ की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। मंगलवार सुबह टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। इसमें नदी से कुछ दूरी पर स्थित गन्ने के खेत इर्दगिर्द बाघ के पदचिह्न मिले हैं। इससे ऐसा माना जा रहा है कि बाघ गन्ने के खेत में आया है। पदचिह्न मिलने के बाद गन्ने के खेत के ऊपर ड्रोन कैमरे से तलाशी ली गई लेकिन बाघ की लोकेशन नहीं मिली। इसके बाद हाथियों की मदद से भी गन्ने के खेत के बाहर चक्कर लगाकर प्रयास किया गया। इस पर भी बाघ नहीं दिखा। 
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कथित एक्सपर्ट को लेकर हो रही फजीहत 
बाघ पकड़ने के अभियान में विभाग की टीम के साथ एक कथित एक्सपर्ट को भी जनप्रतिनिधि के मौखिक निर्देश पर शामिल गया गया है। बताते हैं कि अपनी बातों से राई का पहाड़ बनाने में माहिर विशेषज्ञ को लेकर वनकर्मी भी असहज हैं। मुंबई से आई ड्रोन कैमरा टीम को भी विशेषज्ञ ने एक दिन अपने निर्देशन में लगाए रखा लेकिन हकीकत जानने पर टीम ने उनका साथ छोड़ दिया। अब बाघ पकड़ने को मंगाई गई बाघिन की यूरिन का प्रयोग भी वह अपने हिसाब से कराने का दबाव टीम पर बना रहे हैं। इसको लेकर टीम के अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक सभी व्यथित हैं लेकिन अपनी कुछ कहने से बच रहे हैं। 
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बाघ पकडने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। बाघ की फोटो रात के समय कैमरों में कैद हुई है, दिन में कहीं भी वह नहीं दिख रहा है, यही परेशानी का सबसे बड़ा कारण है। सही लोकेशन मिलते ही पकड़ा ला सकेगा। इसके लिए टीम पूरी तैयारी के साथ अभियान चला रही है। 
-वीके सिंह, वनसंरक्षक
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