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बलात्कार के आरोप से सुनील दोषमुक्त
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sat, 28 May 2016 11:18 PM IST
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हाईकोर्ट इलाहाबाद ने बलात्कार के आरोपी शहर कोतवाली के गांव नावकूड निवासी सुनील कुमार को आठ महीने पहले जिला अदालत द्वारा सुनाई गई दस साल की सजा और जुर्माने से दोषमुक्त कर दिया है। सजा के बाद से सुनील जेल में था। आठ माह में ही अपील की सुनवाई होने से त्वरित न्याय की अवधारणा साकार हुई है, जिससे सुनील को जेल के सीखचों से राहत मिली है।
ग्राम नावकूंड निवासी सुनील, लालाराम और हीराकली पर आरोप लगा था कि 28 मार्च 2011 को एक बालिका को बहला फुसलाकर अपहरण कर लिया। कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 16 अप्रैल 2011 को पुलिस ने आसाम रोड से बालिका को बरामद कर तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में 15 सितंबर 2015 को त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया। सक्ष्य के अभाव में लालाराम व हीराकली को दोषमुक्त कर दिया गया जबकि सुनील को दस वर्ष की कैद और 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा होने पर सुनील को जेल भेज दिया था। इस आदेश के विरूद्ध हाईकोर्ट में अधिवक्ता जितेंद्र पाल सिंह की ओर से अपील दाखिल की गई। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति रंजना पांडया ने अपील की सुनवाई की। मेडिकल रिपोर्ट में अपराध की पुष्टि नहीं हो सकी। इस पर हाईकोर्ट ने सुनील को दोषमुक्त करते हुए निचली अदालत से हुई सजा को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति जनपद न्यायालय पहुंच गई है। इससे दोषमुक्त हुए सुनील जल्द जेल से बाहर हो सकेगा।
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ग्राम नावकूंड निवासी सुनील, लालाराम और हीराकली पर आरोप लगा था कि 28 मार्च 2011 को एक बालिका को बहला फुसलाकर अपहरण कर लिया। कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 16 अप्रैल 2011 को पुलिस ने आसाम रोड से बालिका को बरामद कर तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में 15 सितंबर 2015 को त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया। सक्ष्य के अभाव में लालाराम व हीराकली को दोषमुक्त कर दिया गया जबकि सुनील को दस वर्ष की कैद और 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा होने पर सुनील को जेल भेज दिया था। इस आदेश के विरूद्ध हाईकोर्ट में अधिवक्ता जितेंद्र पाल सिंह की ओर से अपील दाखिल की गई। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति रंजना पांडया ने अपील की सुनवाई की। मेडिकल रिपोर्ट में अपराध की पुष्टि नहीं हो सकी। इस पर हाईकोर्ट ने सुनील को दोषमुक्त करते हुए निचली अदालत से हुई सजा को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति जनपद न्यायालय पहुंच गई है। इससे दोषमुक्त हुए सुनील जल्द जेल से बाहर हो सकेगा।
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