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कॉलोनाइजर नफीस की जमानत खारिज, जेल
पीलीभीत
Updated Wed, 03 Feb 2016 12:48 AM IST
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शहर के नकटादाना चौराहा के समीप केजीएन कॉलोनी में कथित नजूल की भूमि पर कब्जा करने के आरोपी कॉलोनाइजर नफीस अहमद अंसारी ने मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जहां सीजेएम ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
प्रशासन ने बीते माह सरकारी जमीनों की नापजोख कराई थी। बताते हैं कि नकटादाना चौराहा के समीप केजीएन कॉलोनी में कथित तौर पर सरकारी नजूल की जमीन पर अवैध कब्जा पाया गया था। इस पर प्रशासन ने धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में नफीस के खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नफीस अंसारी पहले सत्तादल के एक नेता के खासे करीबी थे। उन्हें सत्ता दल का शहर अध्यक्ष भी बनाया गया था। बाद में उनका सत्तादल से मोहभंग हो गया। वह दूसरे दल से शहर विधानसभा से चुनाव लडने का तानाबाना बुन रहे थे। इस बीच उनकी केजीएन कॉलोनी की जांच हो गई और वह सरकारी नजूल की जमीन पर अवैध कब्जे में फंस गए। नफीस अंसारी ने मंगलवार को सीजेएम सुनील कुमार सिंह की अदालत में सरेंडर कर दिया। अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने मामला गंभीर बताकर जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया। जेल जाने से पहले नफीस ने भी प्रशासन पर सत्तापक्ष के नेता के दबाव में यह कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह इस उत्पीड़न की कार्रवाई से घबराएंगे नहीं बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए डट कर मुकाबला करेंगे।
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प्रशासन ने बीते माह सरकारी जमीनों की नापजोख कराई थी। बताते हैं कि नकटादाना चौराहा के समीप केजीएन कॉलोनी में कथित तौर पर सरकारी नजूल की जमीन पर अवैध कब्जा पाया गया था। इस पर प्रशासन ने धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में नफीस के खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नफीस अंसारी पहले सत्तादल के एक नेता के खासे करीबी थे। उन्हें सत्ता दल का शहर अध्यक्ष भी बनाया गया था। बाद में उनका सत्तादल से मोहभंग हो गया। वह दूसरे दल से शहर विधानसभा से चुनाव लडने का तानाबाना बुन रहे थे। इस बीच उनकी केजीएन कॉलोनी की जांच हो गई और वह सरकारी नजूल की जमीन पर अवैध कब्जे में फंस गए। नफीस अंसारी ने मंगलवार को सीजेएम सुनील कुमार सिंह की अदालत में सरेंडर कर दिया। अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने मामला गंभीर बताकर जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया। जेल जाने से पहले नफीस ने भी प्रशासन पर सत्तापक्ष के नेता के दबाव में यह कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह इस उत्पीड़न की कार्रवाई से घबराएंगे नहीं बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए डट कर मुकाबला करेंगे।
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