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Bulandshahar News: टेंपो-बाइक की आमने-सामने भिड़ंत में दंपती की मौत
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मृतक संध्या व योगेंद्र का फाइल फोटो
स्याना। कोतवाली क्षेत्र के गांव निखोब में शुक्रवार की दोपहर बाइक और टेंपो की आमने-सामने हुई भिड़ंत में बाइक सवार दंपती की मौत हो गई। इस हादसे में उनका डेढ़ साल के बच्चा प्रिंस बाल-बाल बच गया।
दुर्घटना के बाद आरोपी टेंपो चालक मौके से भाग गया। सूचना पर अस्पताल पहुंचे दंपती के परिजन शवों को देखते ही बिलख पड़े। अस्पताल में चीख-पुकार मच गई।
तहसील क्षेत्र के गांव कमालपुर निवासी 25 वर्षीय योगेंद्र उनकी 23 वर्षीय पत्नी संध्या अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ शुक्रवार को सुबह साढ़े सात बजे गुरुग्राम से बाइक से गांव के लिए निकले थे।
दोपहर करीब एक बजे गांव निखोब के पास सामने से आ रहे टेंपो से उनकी बाइक टकरा गई। इससे बाइक सवार दंपती सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
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लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल दंपती को उपचार के लिए सीएचसी भिजवाया। चिकित्सकों ने वहां योगेंद्र को मृत घोषित कर दिया। संध्या की गंभीर हालत को देखते हुए मेरठ रेफर कर दिया। परिजन जब संध्या को मेरठ ले जा रहे थे तो रास्ते में उनकी भी मौत हो गई।
दंपती की सड़क हादसे में अचानक मौत की सूचना से उनके परिवार में मातम छा गया। सीओ रामकरन सिंह ने बताया कि दंपती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। आरोपी टेंपो चालक की शिनाख्त का प्रयास किया जा रहा है।
त्योहार मनाने गांव परिवार के साथ गांव आ रहे थे योगेंद्र
ग्रामीणों ने बताया कि योगेंद्र गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वह छुट्टी लेकर पत्नी और बच्चे के साथ बाइक से गांव आ रहे थे। कुछ दिन गांव में रहकर वापस चले जाते लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस घटना के बारे में जिसको भी जानकारी हो रही है, गांव में उसी की आंखें नम हैं।
बच्चे की कुशलता पर लोग बोले जाको राखे साइयां...
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद ग्रामीण व अन्य लोग एक ही चर्चा कर रहे थे कि भगवान जिसको जीवन देना चाहते हैं उसके साथ कुछ नहीं हो सकता। जो लोग बड़े थे, चोट को सहन कर सकते थे, उनकी तो मौत हो गई। डेढ़ साल का बच्चा था प्रिंस, उसके खरोंच तक नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि समय बड़ा बलवान है। इसलिए कहावत है कि जाको राखे साइयां। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे की परवरिश भी चिंता सताने लगी है। दादा-दादी और चाचा सुमित ही उसका सहारा हैं।
गांव में शव पहुंचते ही मची चीत्कार
गांव कमालपुर में रात करीब 9 बजे जैसे ही गांव में शव पहुंचा तो लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। सभी लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। मोहल्ले में हर तरफ चीत्कार सुनाई दे रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की पहले कभी कोई घटना नहीं हुई।
योगेंद्र और संध्या की मौत से गांव में मातम छाया हुआ है। मोहल्ले के अधिकतर घरों में चूल्हे भी नहीं चले।
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दुर्घटना के बाद आरोपी टेंपो चालक मौके से भाग गया। सूचना पर अस्पताल पहुंचे दंपती के परिजन शवों को देखते ही बिलख पड़े। अस्पताल में चीख-पुकार मच गई।
तहसील क्षेत्र के गांव कमालपुर निवासी 25 वर्षीय योगेंद्र उनकी 23 वर्षीय पत्नी संध्या अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ शुक्रवार को सुबह साढ़े सात बजे गुरुग्राम से बाइक से गांव के लिए निकले थे।
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दोपहर करीब एक बजे गांव निखोब के पास सामने से आ रहे टेंपो से उनकी बाइक टकरा गई। इससे बाइक सवार दंपती सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
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लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल दंपती को उपचार के लिए सीएचसी भिजवाया। चिकित्सकों ने वहां योगेंद्र को मृत घोषित कर दिया। संध्या की गंभीर हालत को देखते हुए मेरठ रेफर कर दिया। परिजन जब संध्या को मेरठ ले जा रहे थे तो रास्ते में उनकी भी मौत हो गई।
दंपती की सड़क हादसे में अचानक मौत की सूचना से उनके परिवार में मातम छा गया। सीओ रामकरन सिंह ने बताया कि दंपती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। आरोपी टेंपो चालक की शिनाख्त का प्रयास किया जा रहा है।
त्योहार मनाने गांव परिवार के साथ गांव आ रहे थे योगेंद्र
ग्रामीणों ने बताया कि योगेंद्र गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वह छुट्टी लेकर पत्नी और बच्चे के साथ बाइक से गांव आ रहे थे। कुछ दिन गांव में रहकर वापस चले जाते लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस घटना के बारे में जिसको भी जानकारी हो रही है, गांव में उसी की आंखें नम हैं।
बच्चे की कुशलता पर लोग बोले जाको राखे साइयां...
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद ग्रामीण व अन्य लोग एक ही चर्चा कर रहे थे कि भगवान जिसको जीवन देना चाहते हैं उसके साथ कुछ नहीं हो सकता। जो लोग बड़े थे, चोट को सहन कर सकते थे, उनकी तो मौत हो गई। डेढ़ साल का बच्चा था प्रिंस, उसके खरोंच तक नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि समय बड़ा बलवान है। इसलिए कहावत है कि जाको राखे साइयां। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे की परवरिश भी चिंता सताने लगी है। दादा-दादी और चाचा सुमित ही उसका सहारा हैं।
गांव में शव पहुंचते ही मची चीत्कार
गांव कमालपुर में रात करीब 9 बजे जैसे ही गांव में शव पहुंचा तो लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। सभी लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। मोहल्ले में हर तरफ चीत्कार सुनाई दे रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की पहले कभी कोई घटना नहीं हुई।
योगेंद्र और संध्या की मौत से गांव में मातम छाया हुआ है। मोहल्ले के अधिकतर घरों में चूल्हे भी नहीं चले।