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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Debt-ridden farmer committed suicide by consuming poison

कर्ज में डूबे किसान ने जहर खाकर की आत्महत्या

Sat, 08 Aug 2015 10:38 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Sat, 08 Aug 2015 10:38 PM IST
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जहॉनाबाद के गांव नवदिया दहला निवासी 40 वर्षीय किसान चरनदास ने कर्ज के दबाव में शुक्रवार की रात घर पर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। परिवार वालों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई। मौत से परिवार में कोहराम मच गया।

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चरनदास के पुत्र लक्ष्मण के मुताबिक उसके पिता के नाम तीन बीघे जमीन है। उन्होंने बहन की शादी के लिए साल भर पहले सेंट्रल बैंक से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिया था। इसके अलावा आढ़तियों और परिचितों से भी रुपये उधार लिए थे। चार माह पूर्व दैवीय आपदा में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी, जिससे चलते कर्ज अदा नहीं हो पा रहा था। लोग बार-बार तगादा कर रहे थे। बैंक ने भी नोटिस जारी कर दी थी। इन सब के चलते वे काफी परेशान रहते थे। तीन महीने पहले भी उन्होंने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। शुक्रवार की रात उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। जब परिवार वालों को इस बात की जानकारी हुई तो वह उन्हें जिला अस्पताल ले गए, लेकिन बच नहीं पाए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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दैवीय आपदा में हुई क्षति का नहीं मिला धेला
चार माह पहले दैवीय आपदा से गांव नवदिया दहला में किसानों की बर्बाद हुई फसल का जिला प्रशासन ने सर्वे नहीं कराया। जिससे प्रभावित किसानों को एक धेला भी नहीं मिला। आर्थिक तंगी से परेशान और कर्ज के बोझ को चुकाने के लिए चरनदास ने अपनी जमीन गिरवी रख दी थी। उसकी मौत के बाद से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। गांव नवदिया दहला निवासी चरनलाल के दो पुत्र 20 वर्षीय लक्ष्मण व 18 वर्षीय नवल किशोर हैं। चार पुत्रियों में से उन्होंने तीन पुत्रियों के हाथ पीले कर दिए थे। चौथी पुत्री अभी 15 साल की है। अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने और कर्ज अधिक हो जाने के कारण परिवार वालों को चिंता सताने लगी। कर्ज अदा करने के लिए उनका पुत्र नवल हरियाणा मजदूरी करने चला गया। बड़ा पुत्र लक्ष्मण पिता के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने में मदद कर रहा था। मृतक के पुत्र लक्ष्मण व ग्रामीणों के मुताबिक अतिवृष्टि से दर्जनों किसान ऐसे थे, जिनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं थी, लेकिन जिला प्रशासन ने नुकसान का सर्वे नहीं कराया, जिससे प्रभावित किसानों का मुआवजा नहीं मिल सका। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने डीएम सहित कई उच्चाधिकारियों से शिकायत कर सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
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कर्ज को लेकर आत्महत्या करने की उन्हें कोई सूचना नहीं है। अगर ऐसा है तो वह लेखपाल को मौके पर भेजकर जांच कराएंगे। जांच के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अजयकांत सैनी, एडीएम

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