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गैर इरादतन हत्या के पांच आरोपियों को कैद, जुर्माना
Updated Fri, 08 Dec 2017 07:30 PM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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- सजा पाने वालों में तीन महिलाएं भी शामिल
पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश अहसन हुसैन ने घर में घुसकर गैर इरादतन हत्या करने के मामले में तीन महिलाओं सहित पांच आरोपियों को दोषी पाया है। न्यायालय ने महिलाओं को 6-6 माह और पुरुषों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई है।
थाना न्यूरिया क्षेत्र के गांव बसंतापुर निवासी जयशंकर ने 23 जून 2005 को थाना न्यूरिया में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि वह अनारदेवी का दत्तक पुत्र है। इंदिरा आवास योजना के तहत अनार देवी का आवास बना था। आरोप है सूरज प्रसाद, लालता प्रसाद उर्फ नन्हे, चंद्रसेन और रामकुमार उसकी मां के मकान पर कब्जा करना चाहते थे। इसको लेकर सूरज प्रसाद और अन्य से मुकदमा चल रहा है। सात मई 2005 को सुबह 10 बजे सूरज प्रसाद ने अपने साथियों की मदद से मां अनारदेवी के आवास पर कब्जा करने की नीयत से धावा बोला दिया। विरोध करने पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, जिससे मां गंभीर रूप से झुलस गई। इलाज के दौरान 20 जून 2005 को उनकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना में मामला झूठा पाते हुए न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत की। वादी जयशंकर ने फाइनल रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए न्यायालय में आपत्ति दाखिल की। न्यायालय ने सुनवाई के बाद पुलिस द्वारा दाखिल फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर बसंतापुर निवासी लालता प्रसाद, रामकुमार, जमुना देवी, तारादेवी और जसोदा देवी को तलब किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पांचों आरोपियों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए महिलाओं को छह-छह माह कैद और एक-एक हजार जुर्माना पुरुषों को 10-10 वर्ष कैद और 25-25 सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी एडीजीसी मुजीबुल हक ने की।
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पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश अहसन हुसैन ने घर में घुसकर गैर इरादतन हत्या करने के मामले में तीन महिलाओं सहित पांच आरोपियों को दोषी पाया है। न्यायालय ने महिलाओं को 6-6 माह और पुरुषों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई है।
थाना न्यूरिया क्षेत्र के गांव बसंतापुर निवासी जयशंकर ने 23 जून 2005 को थाना न्यूरिया में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि वह अनारदेवी का दत्तक पुत्र है। इंदिरा आवास योजना के तहत अनार देवी का आवास बना था। आरोप है सूरज प्रसाद, लालता प्रसाद उर्फ नन्हे, चंद्रसेन और रामकुमार उसकी मां के मकान पर कब्जा करना चाहते थे। इसको लेकर सूरज प्रसाद और अन्य से मुकदमा चल रहा है। सात मई 2005 को सुबह 10 बजे सूरज प्रसाद ने अपने साथियों की मदद से मां अनारदेवी के आवास पर कब्जा करने की नीयत से धावा बोला दिया। विरोध करने पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, जिससे मां गंभीर रूप से झुलस गई। इलाज के दौरान 20 जून 2005 को उनकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना में मामला झूठा पाते हुए न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत की। वादी जयशंकर ने फाइनल रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए न्यायालय में आपत्ति दाखिल की। न्यायालय ने सुनवाई के बाद पुलिस द्वारा दाखिल फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर बसंतापुर निवासी लालता प्रसाद, रामकुमार, जमुना देवी, तारादेवी और जसोदा देवी को तलब किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पांचों आरोपियों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए महिलाओं को छह-छह माह कैद और एक-एक हजार जुर्माना पुरुषों को 10-10 वर्ष कैद और 25-25 सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी एडीजीसी मुजीबुल हक ने की।
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