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15 वोटों के चक्कर में जेल गए 15
plibhit
Updated Mon, 14 Dec 2015 11:11 PM IST
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ग्राम पंचायत हिम्मतनगर से चुनाव लड़ी 15 अंकों की गिनती भारी पड़ी। चुनाव में उन्हें 15 मतों से हार नसीब हुई और इन्हीं 15 मतों के कारण पुनर्मगणना की मांग करने के दौरान हंगामा होने पर उनके सहित 15 लोगों को जेल की हवा खानी पड़ी।
मरौरी ब्लाक की ग्राम पंचायत हिम्मतनगर से प्रधानी के चुनाव में 10 प्रत्याशी मैदान में थे जिनके भाग्य का फैसला 1836 मतदाताओं को करना था। प्रथम चरण में हुए मतदान में यहां कुल 1643 वोट पड़े थे। मतगणना में 71 मत निरस्त हो गए। शेष मतों में विजेता सुरेंद्र कुमार को 346, कमला देवी को 331, रामसिंह को 212 व बाकी अन्य प्रत्याशियों को मिले। इस तरह कमला देवी मात्र 15 मतों से चुनाव हार गई। कमला देवी के समर्थकों का आरोप है कि जो 71 मत निरस्त हुए हैं उनमें अधिकांश उनके थे जिन्हें मिलीभगत के चलते निरस्त कर दिया। सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचने पर कमला देवी एवं उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्होंने मतगणना पंडाल में पहुंचे डीएम से इसकी शिकायत की तो उन्हें बात नहीं सुनी और बार बार कहने पर धक्का देकर भगा दिया। सोमवार को इसकी शिकायत करने पहुंचे ग्रामीण पुलिस से अभद्रता और जबरन हाइवे जाम करने लगे जिसपर पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
सुबह पांच बजे भी पहुंचे चुनाव कार्यालय
चुनाव में महिला प्रत्याशी कमला देवी के पराजित होने के बाद उनके समर्थक महिला पुरुष रात लगभग पांच बजे भी कलेक्ट्रेट स्थित चुनाव कार्यालय पहुंचे थे लेकिन यहां कुछ कर्मचारियों के ही मिलने पर वह लौट गए। दोबारा 11 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचने पर उन्होंने हंगामा किया और जेल पहुंच गए।
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ग्रामीण के चक्कर में पिट गए राहगीर
हाइवे पर जाम लगाने का प्रयास कर रहे ग्रामीणों को हटाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कई तमाशबीन और राहगीरों पर भी पुलिस ने डंडे पड़ गए।
कुछ पुनर्मतगणना तो कुछ ने की पुनर्मतदान की मांग
कलक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों में कुछ महिलाएं वोटों की गिनती फिर से कराने की मांग कर रही थीं जबकि कुछ महिलाएं पुन: मतदान कराने की मांग कर हंगामा कर रही थीं। कलेक्ट्रेट में हंगामे के दौरान प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ साथ उधर से निकल रहे कई अधिवक्ताओं ने भी ग्रामीणों को पुनर्मतगणना के लिए कोर्ट जाने की सलाह दी लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार ही नहीं दिखे।
मौके की नजाकत नहीं भांप पाए अधिकारी
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने महिला पुलिस की संख्या को अधिक करने की जहमत नहीं उठाई। महिला थाना एसओ के अलावा दो महिला उपनिरीक्षक, दो कांस्टेबिल व एक होमगार्ड के सहारे ही काबू पाने का प्रयास किया गया जबकि अधिकारियों को यहां महिला पुलिस की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए थी।
कमला बोली, जमीन बेचकर लड़ा चुनाव
मात्र 15 वोटों से प्रधानी का चुनाव हारी कमला देवी ने बताया कि वह तीन बार पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं। इस बार गांव के कहने पर ही वह चुनाव में उतरीं थी। इसके लिए उन्होंने तीन बीघा जमीन भी बेच दी। लेकिन प्रशासन ने उन्हें हरा दिया।
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मरौरी ब्लाक की ग्राम पंचायत हिम्मतनगर से प्रधानी के चुनाव में 10 प्रत्याशी मैदान में थे जिनके भाग्य का फैसला 1836 मतदाताओं को करना था। प्रथम चरण में हुए मतदान में यहां कुल 1643 वोट पड़े थे। मतगणना में 71 मत निरस्त हो गए। शेष मतों में विजेता सुरेंद्र कुमार को 346, कमला देवी को 331, रामसिंह को 212 व बाकी अन्य प्रत्याशियों को मिले। इस तरह कमला देवी मात्र 15 मतों से चुनाव हार गई। कमला देवी के समर्थकों का आरोप है कि जो 71 मत निरस्त हुए हैं उनमें अधिकांश उनके थे जिन्हें मिलीभगत के चलते निरस्त कर दिया। सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचने पर कमला देवी एवं उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्होंने मतगणना पंडाल में पहुंचे डीएम से इसकी शिकायत की तो उन्हें बात नहीं सुनी और बार बार कहने पर धक्का देकर भगा दिया। सोमवार को इसकी शिकायत करने पहुंचे ग्रामीण पुलिस से अभद्रता और जबरन हाइवे जाम करने लगे जिसपर पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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सुबह पांच बजे भी पहुंचे चुनाव कार्यालय
चुनाव में महिला प्रत्याशी कमला देवी के पराजित होने के बाद उनके समर्थक महिला पुरुष रात लगभग पांच बजे भी कलेक्ट्रेट स्थित चुनाव कार्यालय पहुंचे थे लेकिन यहां कुछ कर्मचारियों के ही मिलने पर वह लौट गए। दोबारा 11 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचने पर उन्होंने हंगामा किया और जेल पहुंच गए।
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ग्रामीण के चक्कर में पिट गए राहगीर
हाइवे पर जाम लगाने का प्रयास कर रहे ग्रामीणों को हटाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कई तमाशबीन और राहगीरों पर भी पुलिस ने डंडे पड़ गए।
कुछ पुनर्मतगणना तो कुछ ने की पुनर्मतदान की मांग
कलक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों में कुछ महिलाएं वोटों की गिनती फिर से कराने की मांग कर रही थीं जबकि कुछ महिलाएं पुन: मतदान कराने की मांग कर हंगामा कर रही थीं। कलेक्ट्रेट में हंगामे के दौरान प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ साथ उधर से निकल रहे कई अधिवक्ताओं ने भी ग्रामीणों को पुनर्मतगणना के लिए कोर्ट जाने की सलाह दी लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार ही नहीं दिखे।
मौके की नजाकत नहीं भांप पाए अधिकारी
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने महिला पुलिस की संख्या को अधिक करने की जहमत नहीं उठाई। महिला थाना एसओ के अलावा दो महिला उपनिरीक्षक, दो कांस्टेबिल व एक होमगार्ड के सहारे ही काबू पाने का प्रयास किया गया जबकि अधिकारियों को यहां महिला पुलिस की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए थी।
कमला बोली, जमीन बेचकर लड़ा चुनाव
मात्र 15 वोटों से प्रधानी का चुनाव हारी कमला देवी ने बताया कि वह तीन बार पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं। इस बार गांव के कहने पर ही वह चुनाव में उतरीं थी। इसके लिए उन्होंने तीन बीघा जमीन भी बेच दी। लेकिन प्रशासन ने उन्हें हरा दिया।