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गैर इरादतन हत्या के आरोपी को सात साल कैद, जुर्माना
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पीलीभीत। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएस पटेल ने गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी दियोरियाकलां क्षेत्र के रामनगर जगतपुर गांव निवासी विनोद उर्फ भूरा को दोषी पाते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई। आरोपी को सात हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दियोरियाकलां कोतवाली में पांच सितंबर 2015 को गांव रामनगर जगतपुर निवासी लालाराम ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अनुसार उसी दिन शाम करीब साढ़े छह बजे उसकी मां बिलासो देवी मकान के बाहर मौजूद थीं। तभी विनोद उर्फ भूरा घर के सामने लगे सरकारी हैंडपंप पर नहाने गया। वह हैंडपंप जोर से चलाने लगा। बिलासों देवी ने उसे टोकने के साथ नल धीरे चलाने को कहा। इस पर विनोद नाराज हो गया और झगड़ा करने लगा। और बिलासो देवी को कुल्हाड़ी के डंडे से पीटा। उनकी चीख सुनकर वादी की भतीजी बिरजा कुमारी बचाने पहुंची। तभी धमकी देते हुए विनोद भाग गया। कुछ देर बाद विलासो देवी की मौत हो गई। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की और विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता धीरेंद्र मिश्र ने तर्क प्रस्तुत किए। इस प्रकरण में आधा दर्जन गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। मामले की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएस पटेल ने विनोद उर्फ भूरा को दोषी पाते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और सात हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सजा सुनाने के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया है।
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दियोरियाकलां कोतवाली में पांच सितंबर 2015 को गांव रामनगर जगतपुर निवासी लालाराम ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अनुसार उसी दिन शाम करीब साढ़े छह बजे उसकी मां बिलासो देवी मकान के बाहर मौजूद थीं। तभी विनोद उर्फ भूरा घर के सामने लगे सरकारी हैंडपंप पर नहाने गया। वह हैंडपंप जोर से चलाने लगा। बिलासों देवी ने उसे टोकने के साथ नल धीरे चलाने को कहा। इस पर विनोद नाराज हो गया और झगड़ा करने लगा। और बिलासो देवी को कुल्हाड़ी के डंडे से पीटा। उनकी चीख सुनकर वादी की भतीजी बिरजा कुमारी बचाने पहुंची। तभी धमकी देते हुए विनोद भाग गया। कुछ देर बाद विलासो देवी की मौत हो गई। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की और विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता धीरेंद्र मिश्र ने तर्क प्रस्तुत किए। इस प्रकरण में आधा दर्जन गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। मामले की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएस पटेल ने विनोद उर्फ भूरा को दोषी पाते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और सात हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सजा सुनाने के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया है।
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