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अवैध तरीके से मदरसा संचालित करने पर प्रबंधक पर रिपोर्ट
Updated Fri, 30 Jun 2017 05:15 PM IST
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पीलीभीत। शासन के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम की जांच में मोहल्ला भूरे खां में संचालित हो रहा मदरसा जामिया अहले सुन्नत मुशाहिदुल उलूम अवैध पाया गया। जिसमें किसी तरह का पठन पाठन कार्य होता नहीं मिला। मदरसा प्रबंधक की ओर से दिए गए कागजात भी अवैध बताए गए। जिसके बाद जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर पर सदर कोतवाली में इसके प्रबंधक आस्ताने हशमतिया दरगाह के सज्जादानशीन मौलाना जरताब रजा खां पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
पुलिस को दी तहरीर में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि नौ जून को शासन द्वारा गठित की गई जांच टीम ने मदरसे की जांच की। इसमें प्रकाश में आया कि मदरसा की जांच पूर्व में दो फरवरी 2017 को की गई थी। इस दौरान प्रबंधक मौलाना जरताब रजा खां ने मदरसा मजार शरीफ परिसर में मदरसा हशमुर्तजा खां हशमतनगर के भवन में दिखाया गया था। टीम को पूरी तरह से गुमराह किया गया। प्रबंधक ने यह भी बताया कि मदरसा दारुल उलूम हशमुर्तजा खां का नाम बदलकर मदरसा जामिया अहले सुन्नत मुशाहिदुल उलूम कर दिया गया। जबकि जांच के दौरान यह गलत पाया गया। इसमें अलावा प्रबंधक पर आरोप है कि उन्होंने एक मदरसे के अध्यापक को दूसरे में दर्शाकर शासकीय धन का दुरुपयोग किया। यही नहीं नबंबर 2016 में मदरसे में आग लगने की बात भी झूठी साबित हुई। जांच रिपोर्ट में मदरसा जामिया अहले सुन्नत मुशाहिदुल उलूम नाम का कोई मदरसा राज्य सरकार तथा भारत सरकार के छात्रवृत्ति पोर्टल पर अंकित नहीं पाया गया। कई सालों से इसके छात्र द्वारा छात्रवृत्ति का आवेदन नहीं हुआ। आरोप है कि कई बार मांगने के बाद भी मदरसा संचालक यू-डाइस कोड प्रपत्र भरकर नहीं दे सके। फर्जी व कूटरचित तरीके से शासकीय अनुदान हड़पने के लिए गलत तथ्यों को देकर भ्रमित करने तथा पठन पाठन के बजाए उक्त भवन का सालाना उर्स के दौरान अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था बनाकर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। जिसके आधार पर पुलिस ने मदरसा प्रबंधक के खिलाफ फर्जी कागजात तैयार करने, धोखाधड़ी आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।
शासन से गठित टीम के सदस्य
शासन से गठित की गई जांच टीम में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार के अलावा तहसीलदार अमरिया नरेंद्र कुमार, डिप्टी कलेक्टर जेबी सिंह, मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ के रजिस्ट्रार मोहम्मद तारिक, अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय लखनऊ के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे शामिल थे।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से मिली तहरीर के आधार पर मौलाना जरताब रजा खां के खिलाफ अवैध तरीके से मदरसा संचालित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शासन से गठित टीम ने तहरीर के साथ अपनी जांच आख्या भी पुलिस को दी है।
- निशांक शर्मा, सीओ सिटी
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प्रबंधक ने उठाए कार्रवाई पर सवाल, लगाए संगीन आरोप
पीलीभीत। इधर अवैध तरीके से मदरसा संचालन करने के आरोपी बनाए गए मौलाना जरताब रजा खां ने प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बसपा सरकार में प्रदेश से सौ मदरसे अनुदान सूची में शामिल किए गए थे। जिसमें उनका मदरसा भी शामिल किया गया। जिसको अस्थाई मान्यता कहकर छोड़ दिया गया। 2007 से मदरसा की मान्यता स्थाई हुई। इसको लेकर रिट दायर की गई थी, जिसमें पांच मई 2011 मदरसे के पक्ष में निर्णय हुआ और दो माह में अनुदान सूची में मदरसे को शामिल करने के निर्देश दिए गए। नाम बदलने को लेकर कोई बात नहीं छिपाई गई। डीएम-एसडीएम को भी मदरसे का नाम बदलने की जानकारी दी गई। नगर पालिका में भी दर्ज कराया गया। कोर्ट का आदेश न मानने पर उन्होंने दोबारा रिट 23 अप्रैल 2017 को दायर की है। जिसमें उनका कहना है किे 12 जुलाई को अफसरों को लखनऊ हाईकोर्ट ने अफसरों को तलब किया है। आरोप है कि इसको लेकर पूर्व में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के डायरेक्टर व सचिव ने उनसे लखनऊ में वार्ता के दौरान मोटी रकम मांगी। जिसको न देने पर उनको गलत तरीके से फांसा गया। निरीक्षण उस वक्त किया गया जब रमजान में मदरसे की छुट्टी चल रही थी और इसी के आधार पर पठन पाठन न होने की रिपोर्ट बना दी गई। उन्होंने कहा कि सच्चाई जल्द सामने आएगी।
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पुलिस को दी तहरीर में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि नौ जून को शासन द्वारा गठित की गई जांच टीम ने मदरसे की जांच की। इसमें प्रकाश में आया कि मदरसा की जांच पूर्व में दो फरवरी 2017 को की गई थी। इस दौरान प्रबंधक मौलाना जरताब रजा खां ने मदरसा मजार शरीफ परिसर में मदरसा हशमुर्तजा खां हशमतनगर के भवन में दिखाया गया था। टीम को पूरी तरह से गुमराह किया गया। प्रबंधक ने यह भी बताया कि मदरसा दारुल उलूम हशमुर्तजा खां का नाम बदलकर मदरसा जामिया अहले सुन्नत मुशाहिदुल उलूम कर दिया गया। जबकि जांच के दौरान यह गलत पाया गया। इसमें अलावा प्रबंधक पर आरोप है कि उन्होंने एक मदरसे के अध्यापक को दूसरे में दर्शाकर शासकीय धन का दुरुपयोग किया। यही नहीं नबंबर 2016 में मदरसे में आग लगने की बात भी झूठी साबित हुई। जांच रिपोर्ट में मदरसा जामिया अहले सुन्नत मुशाहिदुल उलूम नाम का कोई मदरसा राज्य सरकार तथा भारत सरकार के छात्रवृत्ति पोर्टल पर अंकित नहीं पाया गया। कई सालों से इसके छात्र द्वारा छात्रवृत्ति का आवेदन नहीं हुआ। आरोप है कि कई बार मांगने के बाद भी मदरसा संचालक यू-डाइस कोड प्रपत्र भरकर नहीं दे सके। फर्जी व कूटरचित तरीके से शासकीय अनुदान हड़पने के लिए गलत तथ्यों को देकर भ्रमित करने तथा पठन पाठन के बजाए उक्त भवन का सालाना उर्स के दौरान अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था बनाकर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। जिसके आधार पर पुलिस ने मदरसा प्रबंधक के खिलाफ फर्जी कागजात तैयार करने, धोखाधड़ी आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।
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शासन से गठित टीम के सदस्य
शासन से गठित की गई जांच टीम में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार के अलावा तहसीलदार अमरिया नरेंद्र कुमार, डिप्टी कलेक्टर जेबी सिंह, मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ के रजिस्ट्रार मोहम्मद तारिक, अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय लखनऊ के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे शामिल थे।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से मिली तहरीर के आधार पर मौलाना जरताब रजा खां के खिलाफ अवैध तरीके से मदरसा संचालित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शासन से गठित टीम ने तहरीर के साथ अपनी जांच आख्या भी पुलिस को दी है।
- निशांक शर्मा, सीओ सिटी
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प्रबंधक ने उठाए कार्रवाई पर सवाल, लगाए संगीन आरोप
पीलीभीत। इधर अवैध तरीके से मदरसा संचालन करने के आरोपी बनाए गए मौलाना जरताब रजा खां ने प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बसपा सरकार में प्रदेश से सौ मदरसे अनुदान सूची में शामिल किए गए थे। जिसमें उनका मदरसा भी शामिल किया गया। जिसको अस्थाई मान्यता कहकर छोड़ दिया गया। 2007 से मदरसा की मान्यता स्थाई हुई। इसको लेकर रिट दायर की गई थी, जिसमें पांच मई 2011 मदरसे के पक्ष में निर्णय हुआ और दो माह में अनुदान सूची में मदरसे को शामिल करने के निर्देश दिए गए। नाम बदलने को लेकर कोई बात नहीं छिपाई गई। डीएम-एसडीएम को भी मदरसे का नाम बदलने की जानकारी दी गई। नगर पालिका में भी दर्ज कराया गया। कोर्ट का आदेश न मानने पर उन्होंने दोबारा रिट 23 अप्रैल 2017 को दायर की है। जिसमें उनका कहना है किे 12 जुलाई को अफसरों को लखनऊ हाईकोर्ट ने अफसरों को तलब किया है। आरोप है कि इसको लेकर पूर्व में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के डायरेक्टर व सचिव ने उनसे लखनऊ में वार्ता के दौरान मोटी रकम मांगी। जिसको न देने पर उनको गलत तरीके से फांसा गया। निरीक्षण उस वक्त किया गया जब रमजान में मदरसे की छुट्टी चल रही थी और इसी के आधार पर पठन पाठन न होने की रिपोर्ट बना दी गई। उन्होंने कहा कि सच्चाई जल्द सामने आएगी।