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कैसे निगले खाना, जब दरिंदों की हैवानियत का शिकार हो गई लाडली
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पीलीभीत। बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने मां को अंदर से तोड़ दिया है। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी मां ने अन्न्न का एक दाना भी नहीं खाया है। मां का बस यही कहना है कि मैं खाना कैसे खा सकतीं हूं। जब मेरी प्यारी बेटी ही दरिंदगी का शिकार हो गई।
दरिंदों की हैवानियत का शिकार हुई बिटिया ने सभी को अंदर से झकझोर दिया है। सभी की जुबां पर बिटिया की बातें थी। जिसने सुना वहीं थर्रा उठा। सहेलियों से लेकर गांव के बुजुर्ग तक उसके कुशल व्यवहार की दास्ता बयां कर रहे थे। कोई नम आंखों से तो कोई अफसोस जताते हैवानों को कोस रहा था।
पिता ने बताया कि लाडली के साथ हुई घटना का जब से पता चला है। तब से उसकी मां ने खाना-पीना छोड़ दिया है। परिवार के सभी लोग खाना खिलाने की कोशिश करते हैं, मगर वह बिटिया को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर अड़ी हैं। बस बिटिया को जल्द इंसाफ मिले। इसी बात की रट लगाए हुए है। सोमवार को सुबह से ही ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा। सभी लोग परिवार को ढांढस बधा रहे थे। वहीं चटाई पर एक कोने में बैठी मां बातें तो सबसे कर रहीं थी। मगर उनका दर्द चेहरे से साफ दिखाई दे रहा है। अपनी लाडली की दास्तां सभी के सामने बयां करतीं रही। होनहार बिटिया की तारीफ सभी के सामने कर रहीं थी।
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दरिंदों की हैवानियत का शिकार हुई बिटिया ने सभी को अंदर से झकझोर दिया है। सभी की जुबां पर बिटिया की बातें थी। जिसने सुना वहीं थर्रा उठा। सहेलियों से लेकर गांव के बुजुर्ग तक उसके कुशल व्यवहार की दास्ता बयां कर रहे थे। कोई नम आंखों से तो कोई अफसोस जताते हैवानों को कोस रहा था।
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पिता ने बताया कि लाडली के साथ हुई घटना का जब से पता चला है। तब से उसकी मां ने खाना-पीना छोड़ दिया है। परिवार के सभी लोग खाना खिलाने की कोशिश करते हैं, मगर वह बिटिया को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर अड़ी हैं। बस बिटिया को जल्द इंसाफ मिले। इसी बात की रट लगाए हुए है। सोमवार को सुबह से ही ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा। सभी लोग परिवार को ढांढस बधा रहे थे। वहीं चटाई पर एक कोने में बैठी मां बातें तो सबसे कर रहीं थी। मगर उनका दर्द चेहरे से साफ दिखाई दे रहा है। अपनी लाडली की दास्तां सभी के सामने बयां करतीं रही। होनहार बिटिया की तारीफ सभी के सामने कर रहीं थी।
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