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पत्नी की हत्या में पति को आजीवन कारावास
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पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने पत्नी की हत्या के जुर्म में पति को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पांच हजार रुपये जुर्माना भी डाला है।
थाना न्यूरिया में 28 जून 2019 को ग्राम बरी निवासी गेंदालाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया था कि उनकी पुत्री जयवंती देवी की शादी वर्ष 2000 में मूलचंद के साथ हुई थी। जयवंती के कोई संतान नहीं थी। मूलचंद 12 दिनों से उन्हीं के घर पर रह रहा था। वह शराब पीने का आदी था। मूलचंद को शक था कि उसकी पत्नी के कल्याणपुर निवासी एक व्यक्ति से संबंध हैं। इसी बात को लेकर वह पत्नी से झगड़ा करता रहता था। 27 जून 2019 को खेत पर मूलचंद व उसकी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। तभी मूलचंद ने पत्नी जयंती देवी की खेत पर ले जाकर गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसकी लाश खेत के किनारे फेंक दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने मूलचंद को पत्नी की हत्या का दोषी ठहराया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अभियोजन अधिकारी जगदीश प्रसाद ने अधिक से अधिक सजा देने की गुहार की, जबकि बचाव पक्ष ने कहा कि इस घटना का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी साक्षी नहीं है। हत्या का यह मामला परिस्थिति जन्य साक्षी पर आधारित है। इसलिए कम से कम सजा दी जाए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने मूलचंद को आजीवन कारावास और पांच हजार अर्थदंड से दंडित किया है। आरोपी घटना के समय से ही जिला कारागार में बंद है। अर्थदंड वसूल होने पर उसमें से आधी धनराशि मुकदमे के वादी को दी जाएगी।
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थाना न्यूरिया में 28 जून 2019 को ग्राम बरी निवासी गेंदालाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया था कि उनकी पुत्री जयवंती देवी की शादी वर्ष 2000 में मूलचंद के साथ हुई थी। जयवंती के कोई संतान नहीं थी। मूलचंद 12 दिनों से उन्हीं के घर पर रह रहा था। वह शराब पीने का आदी था। मूलचंद को शक था कि उसकी पत्नी के कल्याणपुर निवासी एक व्यक्ति से संबंध हैं। इसी बात को लेकर वह पत्नी से झगड़ा करता रहता था। 27 जून 2019 को खेत पर मूलचंद व उसकी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। तभी मूलचंद ने पत्नी जयंती देवी की खेत पर ले जाकर गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसकी लाश खेत के किनारे फेंक दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
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मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने मूलचंद को पत्नी की हत्या का दोषी ठहराया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अभियोजन अधिकारी जगदीश प्रसाद ने अधिक से अधिक सजा देने की गुहार की, जबकि बचाव पक्ष ने कहा कि इस घटना का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी साक्षी नहीं है। हत्या का यह मामला परिस्थिति जन्य साक्षी पर आधारित है। इसलिए कम से कम सजा दी जाए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक पांडेय ने मूलचंद को आजीवन कारावास और पांच हजार अर्थदंड से दंडित किया है। आरोपी घटना के समय से ही जिला कारागार में बंद है। अर्थदंड वसूल होने पर उसमें से आधी धनराशि मुकदमे के वादी को दी जाएगी।
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