{"_id":"5f63b9558ebc3eb72f6f8de6","slug":"crime-pilibhit-news-bly4201980114","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्राम प्रधान और सचिव को नोटिस देकर कार्रवाई करना भूले अफसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्राम प्रधान और सचिव को नोटिस देकर कार्रवाई करना भूले अफसर
विज्ञापन
पीलीभीत। स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर उसकी धनराशि गबन करने वाले पंचायत सचिव पर पंचायत राज विभाग मेहरबान है। जांच में करीब तीन लाख रुपये के गबन की पुष्टि होने पर पंचायत सचिव को नोटिस देकर खानापूरी कर दी गई। इसके बाद न तो अधिकारियों ने सुध ली, न ही सचिव ने अपना जवाब भेजा। इधर, सचिव पर कार्रवाई न होने से गुस्साए ग्रामीणों ने दोबारा इस मामले में शिकायत की है।
मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत देवीपुरा के सचिव और ग्राम प्रधान ने कागजों में 25 स्ट्रीट लाइट गांव में लगवाना दर्शाते हुए सरकारी बजट ठिकाने लगाया था। कुछ ग्रामीणों ने डीएम और सीडीओ से इस मामले की शिकायत की थी। एक साल पहले हुई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई गई। पहले तो कई महीनों तक मामले में टालमटोल चलती रही। फिर जांच में शिकायत सही निकली। 25 स्ट्रीट लाइट लगवाने के नाम पर 3,84,800 रुपये निकाले गए थे। मगर पंचायत सचिव 85,000 रुपये की लाइट खरीद के ही वाउचर प्रस्तुत करा सके।
2,99,800 रुपये का गबन ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा किए जाने की पुष्टि हुई। शिकंजा कसने के दावे करते हुए ग्राम प्रधान और सचिव को छह सितंबर को नोटिस जारी किए गए। सात दिन में उस नोटिस का जवाब मांगा गया, मगर अभी तक पंचायत सचिव की ओर से जवाब नहीं दिया गया है। उधर, पंचायत सचिव का कहना है कि उसके द्वारा लाइटों की खरीद ही नहीं की गई थी। एक फर्म से रेता बजरी और सीमेंट खरीदा गया था। उसी के बिल वाउचर दे दिए गए थे। उन्हें मिले नोटिस का जल्द जवाब दिया जाएगा। सीडीओ श्रीनिवास मिश्र ने बताया कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित धन में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। कई लोगों से रिकवरी भी की जा चुकी है। इस मामले को भी गंभीरता से दिखवाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत देवीपुरा के सचिव और ग्राम प्रधान ने कागजों में 25 स्ट्रीट लाइट गांव में लगवाना दर्शाते हुए सरकारी बजट ठिकाने लगाया था। कुछ ग्रामीणों ने डीएम और सीडीओ से इस मामले की शिकायत की थी। एक साल पहले हुई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई गई। पहले तो कई महीनों तक मामले में टालमटोल चलती रही। फिर जांच में शिकायत सही निकली। 25 स्ट्रीट लाइट लगवाने के नाम पर 3,84,800 रुपये निकाले गए थे। मगर पंचायत सचिव 85,000 रुपये की लाइट खरीद के ही वाउचर प्रस्तुत करा सके।
विज्ञापन
2,99,800 रुपये का गबन ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा किए जाने की पुष्टि हुई। शिकंजा कसने के दावे करते हुए ग्राम प्रधान और सचिव को छह सितंबर को नोटिस जारी किए गए। सात दिन में उस नोटिस का जवाब मांगा गया, मगर अभी तक पंचायत सचिव की ओर से जवाब नहीं दिया गया है। उधर, पंचायत सचिव का कहना है कि उसके द्वारा लाइटों की खरीद ही नहीं की गई थी। एक फर्म से रेता बजरी और सीमेंट खरीदा गया था। उसी के बिल वाउचर दे दिए गए थे। उन्हें मिले नोटिस का जल्द जवाब दिया जाएगा। सीडीओ श्रीनिवास मिश्र ने बताया कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित धन में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। कई लोगों से रिकवरी भी की जा चुकी है। इस मामले को भी गंभीरता से दिखवाया जाएगा।
विज्ञापन