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दरिंदगी पर उतारू अफसरों का स्टॉफ तो खुद को डीएम-एसडीएम माने बैठा है..

Sun, 15 Sep 2019 07:32 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 07:32 PM IST
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crime
पीलीभीत। भांजे ऋषभ को अगवा कर उस पर जानलेवा हमले और लूटपाट करने के मामले में एसडीएम के पेशकार को बचाने की कोशिश पर बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत भड़क उठे। बोले-मारपीट करने वालों का पूरा गैंग है, इसमें अधिकारियों के कई चहेते कर्मचारी शामिल हैं। ये लोग शाम को जनता को परेशान करने के लिए खुद डीएम-एसडीएम तक बन जाते हैं। इन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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इधर, डीएम के गनर समेत तीन आरोपियों को जेल भेजने के बाद पुलिस इस मामले में एसडीएम सदर के पेशकार अमित सक्सेना की नामजदगी को लेकर उलझ गई है। आरोपी घटना के वक्त कहीं और होने, इसकी वीडियो फुटेज होने के साक्ष्य का दावा कर रहा है, लिहाजा अब पुलिस ने उससे साक्ष्य तलब किए हैं। पकड़े गए आरोपियों से हुई पूछताछ में भी अमित को राहत मिलती दिख रही है। हालांकि अभी छानबीन के दौरान साक्ष्य मिलने पर ही पुलिस अंतिम निर्णय लेगी। अज्ञात के तौर पर बताए गए आरोपियों का भी पता नहीं लग सका है।
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वसुंधरा कॉलोनी निवासी ऋषभ की ओर से बृहस्पतिवार रात अपहरण, डकैती और जानलेवा हमला करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें डीएम के गनर मोहित गुर्जर, एसडीएम के पेशकार अमित सक्सेना, पुनीत गंगवार, डोडो उर्फ सनी को नामजद और 11 अज्ञात आरोपी बताए गए थे। आरोप है कि सब्जी खरीदने जा रहे ऋषभ को आरोपियों ने मंडी समिति के पास रोककर मारपीट की। इसके बाद कार में डालकर ले गए और डेढ़ घंटे तक बंधक बनाकर पीटते रहे। भांजे के साथ हुई घटना के बाद विधायक भी खासा गुस्साए थे। शुक्रवार को सुनगढ़ी पुलिस ने मुख्य आरोपी गनर मोहित, पुनीत गंगवार और सनी को जेल भेज दिया था। चौथे नामजद आरोपी अमित सक्सेना की पैरवी करने के लिए खुद एसडीएम सुनगढ़ी थाने पहुंचीं थीं और उस पर लगे आरोपों को गलत बताया था। यह बताया गया कि अमित घटना के वक्त दूसरी जगह पर मौजूद था। उसकी वीडियो क्लिप होने का भी दावा किया गया। ऐसे में अब पुलिस अमित की नामजदगी को लेकर पड़ताल कर रही है। उससे साक्ष्य तलब किए गए हैं। पुलिस ने जेल भेजने से पूर्व पकड़े गए आरोपियों से भी पूछताछ की, लेकिन बताते हैं कि उसमें भी अन्य लोगों के नाम पता नहीं लग पाए। इधर, प्रदेश शासन ने भी जिले के पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधकर पूरे मामले की जानकारी की है। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल का कहना है कि नामजद आरोपी अमित सक्सेना के दूसरी जगह होने की बात कही जा रही है। इसको लेकर उससे साक्ष्य मांगे गए हैं। उनका अध्ययन करने के बाद ही अग्रिम निर्णय लिया जाएगा। पुलिस गहनता से पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। घटना में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने को भी प्रयास जारी है, सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई होगी।
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विधायक बोले- अफसरों के चहेते कर्मचारी मारपीट गैंग का हिस्सा
विधायक बरखेड़ा किशनलाल राजपूत ने कहा कि घटना की रात एसडीएम का पेशकार अमित सक्सेना कहां था, इस पर वह कुछ नहीं कहना चाहते हैं। बात सिर्फ ये है कि उनको भांजे से पता लगा कि मारपीट करने वालों में अमित सक्सेना भी था। उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। बोले- पहले तो डीएम ने भी अपने गनर को बचाने का प्रयास किया था, लेकिन वह मौके पर पकड़ा गया, इसलिए वह कामयाब नहीं हो सके। अब एसडीएम सदर अपने पेशकार का बचाव कर रहीं हैं। मारपीट करने वालों का पूरा गैंग है, जो शाम को सात बजे के बाद आपराधिक घटनाएं करता है। इन सभी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। कहा, अधिकारियों के कई और भी चहेते कर्मचारी इस गैंग में शामिल हैं। ये लोग शाम को जनता को परेशान करने के लिए खुद डीएम-एसडीएम तक बन जाते हैं। जिले में शांति व्यवस्था बरकरार रहे, अपराधों पर शिकंजा कसा जाए, इसके लिए इस गैंग पर सख्ती होनी चाहिए।

डीएम बोले- अमित तो चकबंदी अधिकारी के साथ था देर रात तक
डीएम वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि वह किसी का बचाव नहीं कर रहे हैं। घटना का पता लगते ही जानकारी कराई गई थी। इसमें यह सामने आया है कि जिस वक्त घटना हुई, उस वक्त एसडीएम सदर का पेशकार अमित सक्सेना चकबंदी अधिकारी समेत अन्य कर्मचारियों साथ देर रात तक रहा है। ऐसे में वह दूसरी जगह जाकर मारपीट कैसे कर सकता है।


बढ़ती जा रही है पुलिस में गुटबाजी
डीएम के गनर पर हुई कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में गुटबाजी तेज होती जा रही है। एकतरफा कार्रवाई होने की बात कहते हुए पुलिसकर्मी खफा दिखाई दे रहे हैं। इसको लेकर विभाग में सुगबुगाहट भी तेज है। घटना के बाद पकड़े गए सिपाही से मारपीट के बाद भी दूसरे पक्ष की ओर से कार्रवाई न होने की बात कहते हुए अब खुद पुलिसकर्मी भी सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल मामला पुलिस विभाग में हर तरफ चर्चा में है।
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