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‘दरोगा जी’ ने बोलकर लिखाई तहरीर पर गोतस्करों का जिक्र नहीं

Fri, 23 Aug 2019 02:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2019 02:15 AM IST
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बिलसंडा (पीलीभीत)। मोहनपुर गांव में गोमांस तस्करों की गोली से ग्रामीण सोनपाल की मौत के मामले में भी पुलिस खेल करने से बाज नहीं आई। मामला गो तस्करों से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसको दूसरा रूप देने के लिए तहरीर को ही मनमाफिक लिखवा डाला और उसमें गो तस्करों के गोली मारने की बात को पूरी तरह से गायब कर दिया गया। गुरुवार को इसको लेकर हल्ला मचा तो दोबारा मृतक की बहन से तहरीर ली गई, उसको दर्ज एफआईआर में शामिल करने का आश्वासन दिया गया। दोबारा दी गई तहरीर में गोली गोमांस तस्करों द्वारा चलाने की बात लिखी गई है। पुलिस के इस खेल को अफसर भी दिन भर छिपाते रहे।
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घटना की सूचना मिलने के बाद बुधवार रात को सबसे पहले दो सिपाही और यूपी 100 पुलिस मौके पर पहुंची थी। इसके बाद सीओ बीसलपुर प्रवीण मलिक, इंस्पेक्टर बिलसंडा एसके सिंह पहुंचे। देर रात एएसपी रोहित मिश्र भी गांव में आ गए थे। एसपी मनोज कुमार सोनकर दूसरे दिन गुरुवार को घटनास्थल का निरीक्षण कर परिवार से मुलाकात करने पहुंचे थे। घटना की रात में ही जानलेवा हमला करने की धाराओं में एफआईआर कर ली गई थी। इसके बाद बरेली में इलाज के दौरान सोनपाल की मौत हो गई। रात में लिखी गई एफआईआर में पुलिस का खेल भी उजागर हुआ। पीड़ित पक्ष खुलकर गोमांस तस्करों के गोली चलाने से सोनपाल की मौत की बात कह रहा था, लेकिन पुलिस ने इस तथ्य को तहरीर में शामिल नहीं होने दिया। मृतक की बहन ने बताया कि दरोगा उसको बोल-बोलकर तहरीर लिखवाते रहे और हस्ताक्षर करा लिए। बृहस्पतिवार को इस बात पर आपत्ति दर्ज की गई तो पहले पुलिस परिजन को समझाने का प्रयास करती रही, लेकिन बाद में दूसरी तहरीर मांगी गई। इसमें गो तस्करों की गोली से सोनपाल की हत्या का उल्लेख किया गया। अब अधिकारी इस तहरीर को दर्ज रिपोर्ट में शामिल करने का भरोसा दिला रहे हैं।
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दूसरी तहरीर मिल गई है। इसको पूर्व में दर्ज एफआईआर में शामिल कर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रवीण मलिक, सीओ बीसलपुर

दिन भर रहे तनाव के हालात, मोहनपुर बना छावनी
बिलसंडा (पीलीभीत)। सोनपाल उर्फ सोनू की हत्या के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम बरेली में हुआ। घटना को लेकर पहले ही तनाव के हालात थे। ऐसे में प्रशासन को विरोध का भी अंदेशा रहा। इसको लेकर दिन भर परिजन और ग्रामीणों से बातचीत कर अधिकारी कार्रवाई का भरोसा दिलाने में जुटे रहे। विधायक बीसलपुर रामसरन वर्मा के पुत्र विवेक वर्मा भी गांव में मौजूद रहे और परिजन-अधिकारियों से बातचीत कर परिवार की मदद के लिए बात करते रहे।
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बरेली से शव लेकर परिवार के रवाना होते ही गांव में सुरक्षा बंदोबस्त को बढ़ा दिया गया। बिलसंडा के अलावा आठ अन्य थानों का फोर्स भी मोहनपुर गांव में तैनात कर दिया गया। महिला पुलिस और पीएसी भी लगा दी गई। एसडीएम बीसलपुर सौरभ दुबे, सीओ प्रवीण मलिक भी गांव में पहुंच गए। शाम को बरेली से शव गांव पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। काफी संख्या में ग्रामीण भी पहले से ही जमा थे। अधिकारी शव के अंतिम संस्कार को लेकर परिजन से बातचीत करने में जुटे रहे। हालांकि शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। परिजन शव लेकर घर चले गए। परिवार में चीख पुकार मची रही।

24 घंटे में हत्यारों की गिरफ्तारी और 25 लाख मुआवजे की मांग
बिलसंडा। सोनपाल की हत्या के बाद कई संगठनों से जुड़े लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए।
हिंदू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष ठाकुर मनीष सिंह, शोभित शर्मा, विश्व हिंदू परिषद के नवनीत मिश्रा, बजरंग दल के राजीव मिश्रा, व्यापार मंडल के नितिन जायसवाल, युवा विकास संगठन के नितिन पाठक, भाजयुमो के कुणाल अवस्थी समेत कई लोग टीम के साथ बृहस्पतिवार को गांव पहुंच गए। परिवार को ढाढ़स बंधाया। अधिकारियों को संयुक्त ज्ञापन दिया गया। इसमें हत्यारोपियों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और परिवार को आर्थिक मदद के तौर पर 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई।

पहले फायर में बच गए थे सोनपाल
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार पशु तस्करों ने जब पहली बार फायर किया तो सोनपाल और उनके साथ खड़े संत कुमार और रामाकुमार इधर-उधर हो गए थे। बाद में सोनपाल लगातार विरोध करता रहा। नतीजतन एक तस्कर उसकी तरफ आगे बढ़ा और नजदीक आकर दूसरा फायर कर दिया। गोली सोनपाल की कोख में लगी, जिससे उसकी बाद में मौत हो गई।

बड़े भाई की बिगड़ी तबीयत
सोनपाल की हत्या के बाद बड़े भाई संत कुमार की तबीयत बिगड़ गई। वह घटना से सदमे में दिखाई दिए। बृहस्पतिवार को भी दिन भर परिजन उनको संभालते रहे।

तीन भाइयों में सबसे छोटा था सोनपाल
मृतक सोनपाल तीन भाइयों में सबसे छोटा अविवाहित था। उसके दो बड़े भाई बांकेलाल, संतकुमार और तीन विवाहित बहनें रामबेटी, रामगीता और कमला हैं। वह देवी जागरण में म्यूजिक सिस्टम बजाया करता था। उसकी मौत के बाद मां राम देवी का रो-रोकर बुरा हाल रहा।

कई टीमें दबिश देने में जुटीं, आधा दर्जन से अधिक हिरासत में
पीलीभीत। गो तस्करों की गोली से ग्रामीण की मौत के बाद पुलिस विभाग में खलबली मची गई। अधिकारियों ने रात में ही पुलिस की टीमें तैयार कीं और क्षेत्र के शातिर गोमांस तस्करों की धरपकड़ में लगा दीं। रात से ही ताबड़तोड़ दबिश का दौर शुरू हो गया, जोकि दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गोमांस तस्करों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। एक सरगना की भी पुलिस तलाश करती रही, लेकिन वह मिल नहीं सका। गुरुवार को कस्बा बिलसंडा से भी पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया, उनसे पूछताछ की जा रही है।

अन्य तथ्यों पर भी पुलिस कर रही पड़ताल
बिलसंडा (पीलीभीत)। घटना के बाद भले ही परिवार और ग्रामीण गोमांस तस्करों के गोली चलाने की बात कह रहे हों, लेकिन पुलिस इसके साथ ही अन्य बिंदुओं पर भी पड़ताल कर रही है।
गो तस्करों के गोली मारने का तथ्य तो पुुलिस की प्राथमिकता में है, लेकिन मसला कोई और भी हो सकता है इससे भी पुलिस अधिकारी इंकार नहीं कर रहे हैं। घटना बुधवार रात 9:30 के आसपास की बताई गई है। उस वक्त गोमांस तस्करों के गांव के भीतर आबादी के निकट पशु उठाना पुलिस को कुछ अटपटा सा लग रहा है। घटनास्थल पर पड़ताल करने के बाद भी पुलिस की माने तो इस संबंध कोई खास साक्ष्य नहीं मिले हैं। ऐसे में पुलिस की टीमें रंजिश और अन्य विवादों का भी पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि वादी की बात को झुठलाया नहीं जा रहा। सिर्फ उसके साथ अन्य तथ्यों पर भी काम किया जा रहा है।

एक माह पहले भी ग्रामीण और तस्कर आए थे आमने-सामने
मोहनपुर गांव में एक माह पूर्व भी गोमांस तस्करों ने दस्तक दी थी, लेकिन वह वारदात को अंजाम नहीं दे सके । ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक माह पूर्व तस्कर इसी तरह से वाहन में आवारा पशुओं को लाद रहे थे। ग्रामीणों के एकजुट होकर विरोध करने पर भाग गए थे। हालांकि इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी गई थी।

पुलिस कर्मियों की भी जान ले चुके हैं तस्कर
गोकशी का धंधा जिले के लिए नया नहीं है। नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा होने के कारण यहां गोकशी लंबे समय से हो रही है। गोमांस तस्करों के बुलंद हौसलों की बात करें तो वे पुलिस कर्मियों की भी जान ले चुके हैं। साल 2012 में गोवंशीय पशु से लदे ट्रक को पकड़ने गए सिटी कंट्रोल रूम की चार पहिया वाहन को तस्करों ने अपने ट्रक से टक्कर मार दी थी। हालांकि बाद में ट्रक भी पुलिस जीप पर पलट गया था। जहानाबाद क्षेत्र में हुई इस घटना में दो सिपाहियों की जान चली गई थी, जबकि एक होमगार्ड गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके अलावा भी दबिश देने के दौरान कई बार तस्करों से पुलिस की मुठभेड़ हुई। पुलिस पर तस्करों ने फायरिंग भी की। बीते दिनों बरखेड़ा, बिलसंडा और सुनगढ़ी क्षेत्र से मुठभेड़ के मामले सामने आए। इसमें बरेली और शाहजहांपुर के तस्कर अधिक शामिल रहे।


2018 में 12.86 प्रतिशत बढ़ी थी गोकशी
वर्ष 2016 में जिले में गोकशी के 213 और 2017 में 149 मामले सामने आए थे। इसके बाद 2018 में अचानक गोकशी 12.86 प्रतिशत बढ़ी। 171 एफआईआर दर्ज की गईं। इसमें 436 तस्करों में से 378 को जेल भेजा गया। नौ तस्करों पर रासुका लगी। 50 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, 102 पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई। इसके अलावा आठ में से पांच इनामी गोमांस तस्कर भी पकड़े गए थे।
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