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चार साल पहले पत्र भेजकर दिया था तीन तलाक, अब जाकर दर्ज हुई रिपोर्ट
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विवाद के बाद मायके में रह रही महिला डॉक्टर (आयुर्वेदिक) को पति ने डाक से पत्र भेजकर तीन तलाक दे दिया। भरण पोषण को लेकर विचाराधीन वाद की तारीख पर आए पति से इसको लेकर पीड़िता ने दुबारा तस्दीक की, तो पति ने दिए गए तीन तलाक को सही ठहराते हुए किसी तरह का रिश्ता रखने से इंकार कर दिया। तलाकनामा मिलने के पांच साल बाद मामले में एसपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने शनिवार रात घरेलू हिंसा और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम की धारा तीन और चार के तहत पति के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है।
शहर के मोहल्ला अशरफ खां निवासी डॉ. उजमा खान पुत्री मास्टर इकबाल हुसैन खान ने बताया कि उनकी शादी सात अक्तूबर 2008 में फर्रूखाबाद जिले के मोहल्ला सरायबाग कॉलोनी घेर शामू खां निवासी डॉ. मोहम्मद रिजवान खां से हुई थी। उसके एक बेटी है, जोकि दस साल की है। पति से अनबन के बाद साल 2012 में वह बेटी के साथ मायके आकर रहने लगी। पति के खिलाफ भरण पोषण का एक वाद न्यायालय में विचाराधीन है। उनका कहना है कि 19 अगस्त 2015 को पति ने रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर उनको तीन तलाक दे दिया। यह देख उनके होश उड़ गए। पहले तो उनको विश्वास नहीं हुआ कि पति ने उनको तीन तलाक दे दिया है। इस पर उन्होंने वकील के माध्यम से नोटिस भेजा। इसमें तस्दीक कराई कि कहीं किसी के बहकावे में तो तीन तलाक नहीं दिया गया है। उनके अनुसार पति ने इसके जवाब में एक पत्र भेजा, उसमें तीन तलाक को सही ठहराया। 18 मई 2019 को न्यायालय में विचाराधीन वाद की तारीख पर आए पति से एक बार फिर उन्होंने बात की। उस वक्त भी पति ने पत्र के माध्यम से दिए गए तलाक को सही करार दिया। उससे किसी तरह का रिश्ता न होने की बात कही। पति पर मानसिक शोषण करने का भी आरोप लगाया। तीन दिन पूर्व महिला ने इसकी शिकायत एसपी से की। इसके बाद अब कानूनी कार्रवाई की गई है। शिकायत में देरी को लेकर महिला का कहना है कि अब तक तीन तलाक को लेकर कोई कानून पास नहीं हुआ था। वह न्याय पाना चाहती थीं। अब जब उनको पता लगा कि इसका कानून बन गया है, तो उन्होंने कानूनी कार्रवाई के आगे आकर शिकायत कर दी। उन्होंने पति पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
महिला से मिली तहरीर के आधार पर उसके पति के खिलाफ घरेलू हिंसा और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम की धारा तीन और चार के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। विवेचना एसआई उपेंद्र सिंह को दी गई है। तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। - धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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शहर के मोहल्ला अशरफ खां निवासी डॉ. उजमा खान पुत्री मास्टर इकबाल हुसैन खान ने बताया कि उनकी शादी सात अक्तूबर 2008 में फर्रूखाबाद जिले के मोहल्ला सरायबाग कॉलोनी घेर शामू खां निवासी डॉ. मोहम्मद रिजवान खां से हुई थी। उसके एक बेटी है, जोकि दस साल की है। पति से अनबन के बाद साल 2012 में वह बेटी के साथ मायके आकर रहने लगी। पति के खिलाफ भरण पोषण का एक वाद न्यायालय में विचाराधीन है। उनका कहना है कि 19 अगस्त 2015 को पति ने रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर उनको तीन तलाक दे दिया। यह देख उनके होश उड़ गए। पहले तो उनको विश्वास नहीं हुआ कि पति ने उनको तीन तलाक दे दिया है। इस पर उन्होंने वकील के माध्यम से नोटिस भेजा। इसमें तस्दीक कराई कि कहीं किसी के बहकावे में तो तीन तलाक नहीं दिया गया है। उनके अनुसार पति ने इसके जवाब में एक पत्र भेजा, उसमें तीन तलाक को सही ठहराया। 18 मई 2019 को न्यायालय में विचाराधीन वाद की तारीख पर आए पति से एक बार फिर उन्होंने बात की। उस वक्त भी पति ने पत्र के माध्यम से दिए गए तलाक को सही करार दिया। उससे किसी तरह का रिश्ता न होने की बात कही। पति पर मानसिक शोषण करने का भी आरोप लगाया। तीन दिन पूर्व महिला ने इसकी शिकायत एसपी से की। इसके बाद अब कानूनी कार्रवाई की गई है। शिकायत में देरी को लेकर महिला का कहना है कि अब तक तीन तलाक को लेकर कोई कानून पास नहीं हुआ था। वह न्याय पाना चाहती थीं। अब जब उनको पता लगा कि इसका कानून बन गया है, तो उन्होंने कानूनी कार्रवाई के आगे आकर शिकायत कर दी। उन्होंने पति पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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महिला से मिली तहरीर के आधार पर उसके पति के खिलाफ घरेलू हिंसा और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम की धारा तीन और चार के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। विवेचना एसआई उपेंद्र सिंह को दी गई है। तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। - धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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