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एक युद्ध पटाखों के विरुद्धः हानिकारक रसायन से बनने वाले पटाखे सेहत के लिए ठीक नहीं

Sat, 31 Oct 2020 12:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2020 12:40 AM IST
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crackers issue in diwali
पीलीभीत। दिवाली प्रकाश और खुशियों का पर्व है। ऐसे में सुनिश्चित करना चाहिए कि इस दिन की सार्थकता बनी रही। इस दिन पटाखों को जलाने का भी चलन तेजी से बढ़ा है। पटाखों में कई ऐसे रसायन होते हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर डालते हैं। सरकार नियम लागू कर पटाखे जलाने से रोकती है, मगर दिखावे और जागरूकता के अभाव में लोग जानकर भी अंजान बने रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हद से ज्यादा प्रदूषण इंसान ही नहीं बल्कि प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचा रहा है।
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दिवाली पर अकेले शहर क्षेत्र में ही करीब 200 आतिशबाजी की दुकानें लगती हैं। आतिशबाजी के शौकीन तेज धमाके वाले और देर तक चलने वाले पटाखों को ही पसंद करते हैं, मगर वह पटाखे खरीदते समय यह भूल जाते हैं कि वह पटाखे नहीं, बल्कि अपनों की सेहत से खिलवाड़ करने वाला सामान खरीदकर ले जा रहे हैं।
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उपाधि महाविद्यालय के रसायन प्रवक्ता डॉ. विजय अग्रवाल के मुताबिक, पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैस सांस के जरिए शरीर मेें प्रवेश कर जाती है और कई बीमारियों का कारण बनती है। उन्होंने बताया कि पटाखा बनाने में गन पाउडर का इस्तेमाल होता है, जिसकी वजह से हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड फैलती है, जो दमा के रोगियों के लिए जहर का काम करता है। तेज रोशनी के लिए पटाखों में पोटेशियम क्लोरेट का इस्तेमाल किया जाता है, जो फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक है। वहीं पटाखों से होने वाले प्रदूषण से ऐसे जहरीले कण निकलते हैं, जिनकी वजह से आंखों में जलन और पानी निकलने की समस्या हो जाती है। पटाखों के धुंए के ज्यादा समय तक संपर्क में रहने से गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
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पटाखे निश्चित तौर पर वातावरण को प्रदूषित करते हैं। दुखद यह है कि इन पटाखों को बनाने वाले ज्यादातर बच्चे और किशोर होते हैं। उन पर खतरनाक रसायनों का असर होता है। लोग जागरूक हो रहे हैं। वैसे भी दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा है। इसी परंपरा को कायम रखे। इससे वातावरण शुद्ध होता है। - प्रभात जायसवाल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष
देश में प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है, मगर इस अंजान खतरे से लोग वाकिफ होने के बाद भी दिवाली पर अंधाधुंध पटाखों का इस्तेमाल करते हैं। त्योहार की पवित्रता को धुएं में न उड़ाएं। त्योहार को मनाने के लिए घर को सजाकर उसे दीये, मोमबत्ती और बिजली के बल्बों से जगमग करें। - अजय सूूरी, व्यापारी
हानिकारक पटाखों से केवल इंसान ही नहीं बल्कि पेड़-पौधे और जलस्त्रोत भी प्रभावित होते हैं। दीपों के इस त्योहार की सार्थकता यही है कि इस पावन त्योहार को दीपों से जगमग करें। जो खर्च पटाखों पर करते हैं, वह खर्च दिवाली के दिन गरीबों पर खर्च कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करें। - ओमप्रकाश वर्मा, प्रधानाचार्य, सनातन धर्म बांके बिहारी राम इंटर कॉलेज

बढ़ती आबादी से वैसे ही पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। मगर दिवाली की रात पटाखों से निकलने वाले धुएं से यह प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है। इससे बच्चे और बुजुर्ग खासे प्रभावित होते हैं। इससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए बेहतर यही है कि प्रदूषण रहित दिवाली मनाएं और उनको भी खुशियां देने का प्रयास करें तो आर्थिक तंगी में जीवन गुजार रहे हैं। - डॉ. महेश चंद्रा, कार्डियोलॉजिस्ट
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