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गैर इरादतन हत्या के तीन दोषियों को 10-10 साल का कारावास
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पीलीभीत। रामेश्वर दयाल की गैर इरादतन हत्या के मामले में पांच साल बाद तीन आरोपियों को अपर सत्र न्यायाधीश छांगुर राम ने दोषी पाते हुए 10-10 साल के कारावास और प्रत्येक को 15500 के अर्थदंड से दंडित किया है।
बीसलपुर के मोहल्ला दुर्गाप्रसाद निवासी रामेश्वर दयाल ने खुद और अपने ममेरे भाई ओमप्रकाश पर जानलेवा हमला की मोहल्ले के ही सलारू, हरीशंकर और गणेश के खिलाफ नौ अक्तूबर 2017 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा कि वह और उसका ममेरा भाई खेत पर फसल की आठ अक्तूबर 2017 को रखवाली कर रहे थे। रात करीब दस बजे सलारु, हरीशंकर, गणेश उसके खेत पर आए और गाली गलौज शुरू कर दिया। धमकाते हुए हाथापाई करने लगे। उसे और उसके ममेरे भाई पर बांके और डंडों से हमला कर दिया। जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद मेडिकल के लिए ले गए। वहां इलाज के दौरान रामेश्वर दयाल की मौत हो गई।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाद में विवेचना आरोप पत्र न्यायालय मे दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कई गवाह पेश किए। वहीं आरोपियों ने खुद को निर्दोष होना बताया। न्यायालय ने दोनों ओर से प्रस्तुत तर्कों को सुनने व पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद आरोपियों को गैर इरादतन हत्या करने मे दोषी पाते हुए सजा सुनाई। राज्य सरकार की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार वर्मा ने की।
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बीसलपुर के मोहल्ला दुर्गाप्रसाद निवासी रामेश्वर दयाल ने खुद और अपने ममेरे भाई ओमप्रकाश पर जानलेवा हमला की मोहल्ले के ही सलारू, हरीशंकर और गणेश के खिलाफ नौ अक्तूबर 2017 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा कि वह और उसका ममेरा भाई खेत पर फसल की आठ अक्तूबर 2017 को रखवाली कर रहे थे। रात करीब दस बजे सलारु, हरीशंकर, गणेश उसके खेत पर आए और गाली गलौज शुरू कर दिया। धमकाते हुए हाथापाई करने लगे। उसे और उसके ममेरे भाई पर बांके और डंडों से हमला कर दिया। जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद मेडिकल के लिए ले गए। वहां इलाज के दौरान रामेश्वर दयाल की मौत हो गई।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाद में विवेचना आरोप पत्र न्यायालय मे दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कई गवाह पेश किए। वहीं आरोपियों ने खुद को निर्दोष होना बताया। न्यायालय ने दोनों ओर से प्रस्तुत तर्कों को सुनने व पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद आरोपियों को गैर इरादतन हत्या करने मे दोषी पाते हुए सजा सुनाई। राज्य सरकार की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार वर्मा ने की।
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