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कोरोना के डर से नहीं किया महिला का इलाज, तड़पकर हो गई मौत
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पीलीभीत। कई दिनों से बीमार चल रही महिला के बारे में सूचना दिए जाने के बाद स्वास्थ्यकर्मी उसे कोरोना संक्रमित के शक में एंबुलेंस से पुराना जिला अस्पताल स्थित क्वारंटीन वार्ड ले आए। वहां बेड पर लेटाने के बजाय फर्श पर लेटा दिया गया, फिर डॉक्टरों ने भी कोरोना से डरकर इलाज शुरू नहीं किया। वह काफी देर तक फर्श पर तड़पती रही। कोरोना न होने की बात कहते हुए बाद में उसे करीब डेढ़ किलोमीटर दूर नए जिला अस्पताल ले जाया गया, मगर रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
गजरौला क्षेत्र के बिठौराकलां गांव की रहने वाली 50 वर्षीय एक महिला को कई दिन से बुखार आ रहा था और दौरे भी पड़ते थे। उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिवार वालों ने बृहस्पतिवार सुबह 108 नंबर पर कॉल की। इस पर एंबुलेंस कर्मचारी गांव पहुंचे और महिला को एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाने के बजाय उसे कोरोना पीड़ित समझकर पुराना अस्पताल स्थित क्वारंटीन वार्ड में ले गए। बुखार की बात सामने आने के कारण ही स्वास्थ्यकर्मी उसे वहां कोरोना की जांच के लिए ले गए थे। महिला को यहां क्वारंटीन वार्ड में भर्ती करने की तैैयारी भी शुरू कर दी गई। इस बीच उसे फर्श पर लेटा दिया गया। मगर, कोरोना के डर से डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू नहीं किया। तब तक महिला बाहर ही फर्श पर लेटी तड़पती रही। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंची तो महिला को एंबुलेंस से जिला अस्पताल बुलाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला की जिला अस्पताल पहुंचते ही मौत होने से कोरोना से मौत होने का शोर मच गया। इसको लेकर अस्पताल स्टाफ में भी खलबली मची रही। बाद में अधिकारियों ने इसे कोरोना से मौत होने से नकार दिया। हालांकि पोस्टमार्टम कराने के लिए शव कब्जे में ले लिया।
महिला की तबीयत करीब 15 दिन से खराब थी। बुखार होने के साथ ही महिला को दौरे भी पड़ते थे। लिहाजा उसे एंबुलेेंस से लाकर जिला अस्पताल भर्ती करने को कहा गया था। वहां इलाज से पहले ही उसकी मौत हो गई। महिला का नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जाएगा। एंबुलेंसकर्मी उसे क्वारंटीन वार्ड क्यों ले गए, इसकी भी जांच कराई जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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गजरौला क्षेत्र के बिठौराकलां गांव की रहने वाली 50 वर्षीय एक महिला को कई दिन से बुखार आ रहा था और दौरे भी पड़ते थे। उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिवार वालों ने बृहस्पतिवार सुबह 108 नंबर पर कॉल की। इस पर एंबुलेंस कर्मचारी गांव पहुंचे और महिला को एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाने के बजाय उसे कोरोना पीड़ित समझकर पुराना अस्पताल स्थित क्वारंटीन वार्ड में ले गए। बुखार की बात सामने आने के कारण ही स्वास्थ्यकर्मी उसे वहां कोरोना की जांच के लिए ले गए थे। महिला को यहां क्वारंटीन वार्ड में भर्ती करने की तैैयारी भी शुरू कर दी गई। इस बीच उसे फर्श पर लेटा दिया गया। मगर, कोरोना के डर से डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू नहीं किया। तब तक महिला बाहर ही फर्श पर लेटी तड़पती रही। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंची तो महिला को एंबुलेंस से जिला अस्पताल बुलाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला की जिला अस्पताल पहुंचते ही मौत होने से कोरोना से मौत होने का शोर मच गया। इसको लेकर अस्पताल स्टाफ में भी खलबली मची रही। बाद में अधिकारियों ने इसे कोरोना से मौत होने से नकार दिया। हालांकि पोस्टमार्टम कराने के लिए शव कब्जे में ले लिया।
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महिला की तबीयत करीब 15 दिन से खराब थी। बुखार होने के साथ ही महिला को दौरे भी पड़ते थे। लिहाजा उसे एंबुलेेंस से लाकर जिला अस्पताल भर्ती करने को कहा गया था। वहां इलाज से पहले ही उसकी मौत हो गई। महिला का नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जाएगा। एंबुलेंसकर्मी उसे क्वारंटीन वार्ड क्यों ले गए, इसकी भी जांच कराई जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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