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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संक्रमित सराफ को बरेली के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया
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पीलीभीत। मोहल्ला साहूकारा में संक्रमित निकले सराफा कारोबारी पर स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी लगातार जारी है। रसूख के चलते पहले परिवार के सदस्यों को होम क्वारंटीन रखा गया। इसके बाद माता-पिता के संक्रमित निकलने पर भी रवैया बदला नहीं है। सराफ को निजी खर्च पर बरेली के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके माता-पिता भी संक्रमित निकलने पर बरेली के एल-2 श्रेणी के राजश्री अस्पताल में भर्ती किए गए हैं। एक ही परिवार के तीन संक्रमितों को जिला स्तर पर कोविड अस्पताल में न रखे जाने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शहर के मोहल्ला साहूकारा निवासी सराफा कारोबारी का 29 जून को सैंपल लिया गया था। इसकी रिपोर्ट बरेली से पॉजिटिव आई थी। सराफ के संक्रमित निकलने पर अन्य मरीजों की भांति परिवार के सदस्यों को क्वारंटीन सेंटर भेजने के बजाय घर पर ही क्वारंटीन कर दिया गया था। इसके पीछे रसूख और साठगांठ की चर्चा रही थी। एक दिन पूर्व शुक्रवार को सराफ के माता-पिता भी कोरोना संक्रमित निकले। एंबुलेंस जब उन्हें लेने पहुंची तो उन्होंने कोविड अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया था। अब इन तीनों को पहले के मरीजों की तरह कोविड अस्पताल आयुर्वेदिक कॉलेज में नहीं रखा गया। सराफ को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराने के पीछे स्वास्थ्य विभाग ब्लड शुगर की बीमारी पहले से होना वजह बता रहा है। इसके अलावा माता-पिता के 70 वर्ष से अधिक उम्र का होने पर बरेली के एल-2 श्रेणी अस्पताल भेजने की बात कही गई। मगर इससे पहले भी 70 से अधिक उम्र के मरीज जिले में निकल चुके हैं। उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने बरेली नहीं भिजवाया था। ऐसे में एक समान केसों में अलग-अलग हो रही कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर गई है। स्थानीय लोग भी इसे लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। अमरिया की 73 वर्षीय महिला या फिर पूरनपुर के 75 वर्षीय वृद्ध को भी संक्रमित मिलने पर एल 1 श्रेणी के कोविड अस्पताल ही रखकर इलाज किया गया था। फिलहाल किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
संक्रमित सराफा कारोबारी को पहले से ब्लड शुगर की बीमारी है। वह निजी खर्च पर बरेली के प्राइवेट कोविड अस्पताल में भेजा गया है। साथ ही माता-पिता सीनियर सिटीजन होने पर नियम के अनुसार ही भेजे गए हैं। किसी तरह का पक्षपात या भेदभाव नहीं किया है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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शहर के मोहल्ला साहूकारा निवासी सराफा कारोबारी का 29 जून को सैंपल लिया गया था। इसकी रिपोर्ट बरेली से पॉजिटिव आई थी। सराफ के संक्रमित निकलने पर अन्य मरीजों की भांति परिवार के सदस्यों को क्वारंटीन सेंटर भेजने के बजाय घर पर ही क्वारंटीन कर दिया गया था। इसके पीछे रसूख और साठगांठ की चर्चा रही थी। एक दिन पूर्व शुक्रवार को सराफ के माता-पिता भी कोरोना संक्रमित निकले। एंबुलेंस जब उन्हें लेने पहुंची तो उन्होंने कोविड अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया था। अब इन तीनों को पहले के मरीजों की तरह कोविड अस्पताल आयुर्वेदिक कॉलेज में नहीं रखा गया। सराफ को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराने के पीछे स्वास्थ्य विभाग ब्लड शुगर की बीमारी पहले से होना वजह बता रहा है। इसके अलावा माता-पिता के 70 वर्ष से अधिक उम्र का होने पर बरेली के एल-2 श्रेणी अस्पताल भेजने की बात कही गई। मगर इससे पहले भी 70 से अधिक उम्र के मरीज जिले में निकल चुके हैं। उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने बरेली नहीं भिजवाया था। ऐसे में एक समान केसों में अलग-अलग हो रही कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर गई है। स्थानीय लोग भी इसे लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। अमरिया की 73 वर्षीय महिला या फिर पूरनपुर के 75 वर्षीय वृद्ध को भी संक्रमित मिलने पर एल 1 श्रेणी के कोविड अस्पताल ही रखकर इलाज किया गया था। फिलहाल किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
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संक्रमित सराफा कारोबारी को पहले से ब्लड शुगर की बीमारी है। वह निजी खर्च पर बरेली के प्राइवेट कोविड अस्पताल में भेजा गया है। साथ ही माता-पिता सीनियर सिटीजन होने पर नियम के अनुसार ही भेजे गए हैं। किसी तरह का पक्षपात या भेदभाव नहीं किया है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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