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प्रवासी मजदूरों की संख्या के साथ बढ़ रहे कोरोना के मामले

Tue, 19 May 2020 10:23 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 10:23 PM IST
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corona positive case
पूरनपुर/ बीसलपुर/ पीलीभीत। देश के सर्वाधिक कोरोना संक्रमित राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या जैसे-जैसे जनपद में बढ़ रही है, उसी रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामले भी बढ़ चुके हैं। घर पहुंचने की ललक में स्क्रीनिंग न कराना, स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन के नियमों का पालन न करना संक्रमण बढ़ने की मुख्य वजह हैं। अगर यही सिलसिला चलता रहा तो कोरोना संक्रमण गांवों की ओर अपने पैर फैलाकर विस्फोटक रूप ले सकता है। तब स्थिति को संभालना आसान नहीं होगा।
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जनपद मुख्यालय के अलावा पूरनपुर और बीसलपुर में 10 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर पहुंच चुके हैं। इनमें अधिकतर या तो सीधे गांव पहुंच गए हैं या फिर स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन किए गए हैं। यह सिलसिला अब भी जारी है। संख्या बढ़ने के साथ ही कोरोना संक्रमण के केस भी बढ़ रहे हैं। अब जितना भी कोरोना संक्रमण फैल रहा है, वह प्रवासियों के आने से ही है। पहले इन्हें शेल्टर होम में रखा जा रहा था। मगर, अब अधिकतर प्रवासी मजदूर स्क्रीनिंग के बाद 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन किए जा रहे हैं। मगर, अधिकतर प्रवासी होम क्वारंटीन नियमों का पालन नहीं करते। तमाम प्रवासी बिना स्क्रीनिंग कराए सीधे गांव पहुंच गए हैं। वे स्क्रीनिंग भी नहीं करा रहे हैं। जिनकी सूचना मिल जाती है, तो वहां स्वास्थ्य टीम जाकर स्क्रीनिंग कर लेती है। मगर, जिन प्रवासियों के आने का पता नहीं चल पाता, वे बिना स्क्रीनिंग के ही रह रहे हैं। उनकी निगरानी स्थानीय कमेटी पर छोड़ दी गई है। इनसे संक्रमण फैलने का खतरा सर्वाधिक हैं। ऐसे तमाम शिकायतें पुलिस और प्रशासन को रोज मिल रही हैं। अफसर भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं कि संक्रमण की चेन अगर बढ़ी तो उसे रोक पाना आसान नहीं होगा।
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1517 प्रवासी मजदूर होम क्वारंटीन
बीसलपुर। सीएचसी अभिलेखों के अनुसार नगर और विभिन्न गांवों में बाहर से आए हुए 1417 मजदूर 21 दिनों तक होम क्वांरटीन हैं। इनमें से अधिकतर नियमों का पालन नहीं करते। इस वजह से ग्रामीण डरे हुए हैं। नगरपालिका सभासद या ग्राम प्रधान अगर सुझाव देते हैं तो भी यह नहीं मानते। नियम यह है कि क्वारंटीन मजदूर 21 दिन घरों से न निकलें। न ही परिवार से मिलें। मगर, इसके विपरीत प्रवासी मजदूर घर से बाहर भी निकलकर चौपाल में बैठते हैं। दुकानों पर खरीदारी करने के अलावा खेतों मे काम करने भी जाते हैं।
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बैरियर पर करते हैं ड्यूटी
गांव बमरोली के एक व्यक्ति का कहना है कि उनके गांव में क्वारंटीन मजदूरों में से तीन गांव के बाहर ग्राम पंचायत द्वारा लगाए बैरियर पर ड्यूटी करते हैं। मना करने पर भी नहीं मानते नहीं हैं।
खेत में जाकर रहने लगा
चंद्रपुरा गांव के बाशिंदों ने बताया कि मंगलवार सुबह राजस्थान से आकर प्रवासी अपने घर जाने लगा था। गांव वालों ने उसे रोककर स्क्रीनिंग कराने को कहा तो वह अपने गन्ने के खेत में जाकर बैठ गया। वहीं उसे खाना दिया जा रहा है।
बाहर से आए लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग में उनका तापमान नापा जाता है। अगर तापमान ठीक है तो खांसी या सांस लेने में परेशानी को मरीज छिपा लेते हैं। इससे संक्रमण होने का खतरा तो है। मगर, इन्हें होम क्वारंटीन किया जा रहा है। -डॉ. सीपी सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पूरनपुर

प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। सभी का सैंपल लिया जाना संभव नहीं है। इसे लेकर रेंडम सैंपल लिए जा रहे हैं। जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। उन्हें होम क्वारंटीन किया जाता है। लक्षण दिखने पर व्यक्ति को क्वारंटीन सेंटर भेजा जाता है। - डॉ. वीबी राम, नोडल अधिकारी कोविड-19
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