फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   corona effect

लॉकडाउन में चिकन कारोबारियों को लगी करोड़ो की चपत

Thu, 09 Apr 2020 11:29 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2020 11:29 PM IST
विज्ञापन
corona effect
पीलीभीत। कुछ काम कोरोना के खौफ ने किया, कुछ लॉकडाउन की वजह से हो गया। कोरोना संक्रमण ने भले ही हजारों इंसानों की जान मुश्किल में डाल दी, मगर इसकी वजह से रोजाना बड़ी संख्या में कटने वाले मुर्गे और बकरों की जान कुछ समय के लिए जरूर बख्श गई। हजारों मुर्गे, बकरे या अन्य जानवर कोरोना के डर से इंसानी आहार बनने से बच गए।
विज्ञापन

शहर में 50 लाइसेंसी और 100 से ज्यादा गैर लाइसेंसी मीट की दुकानें हैं। कुछ लोग घरों पर भी इन्हें काटकर बेच लेते हैं। कुल मिलाकर बकरे, मुर्गे और अन्य जानवरों की रोजाना औसतन 80 से 100 क्विंटल मीट की खपत है। मुर्गा 160 रुपये प्रति किलो और बकरा 400 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। एक दिन में पांच लाख रुपये से अधिक का मीट बिक जाता है। 18 दिन के लॉकडाउन में इस कारोबार को लगभग एक करोड़ का चूना लग चुका है। लॉकडाउन खत्म होने तक मीट और चिकन सेंटर फिलहाल तो बंद हैं क्योंकि कोरोना के डर से कोई भी किसी भी जानवर के मांस को हाथ नहीं लगाना चाहता। इसलिए रोजाना कटने वाले मुर्गे और बकरों की जान फिलहाल सही सलामत है।
विज्ञापन

मांसाहारियों ने बनाई दूरी
22 मार्च के जनता कर्फ्यू से अब तक 18 दिन बीत चुके है। तबसे बकरे, मुर्गे और मछली की दुकानें बंद है। मीट कारोबार लगभग न के बराबर ही रह गया है। खोखों या गैर लाइसेंसी दुकानों पर कटने वाले मुर्गे, बकरे चोरी छुपे कटकर घरों में पहुंच रहे हैं। मगर, कोरोना का संक्रमण बढ़ने की खबरें आने से अब लोगों ने जानवरों का मांस खाने से बचना शुरू कर दिया है क्योंकि अधिकांश लोगों का मानना है कि चीन में कोरोना जानवरों से ही फैला है। हालांकि इस बात के अभी कोई पुष्ट प्रमाण नहीं हैं कि जानवरों का मांस खाने से कोरोना फैलता है या नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक होटल से हो रही सप्लाई
शहर में मुर्गे, बकरे, मछली या किसी भी तरह की मीट की दुकानें लॉकडाउन के चलते बंद हैं। मगर, एक होटल खास अनुमति से विशेष परिस्थितियों के नाम पर खोला गया है, जबकि इस समय ऐसी कोई परिस्थितियां होटल खुलने की नहीं हैं। बताया जाता है कि इस होटल से कुछ विशेष लोगों को चोरी छिपे चिकन और मटन रोजाना सप्लाई होता है। कुछ लोग मटन और चिकन खाने के इतने शौकीन हैं कि वे एक भी दिन बिना इसके रह नहीं सकते। ऐसे विशेष लोग कोरोना से संक्रमित होने से बिना डरे अब भी चिकन और मटन खा रहे हैं।
100 क्विंटल से अधिक मछलियों की भी जान बची
एक अनुमान के अनुसार जनपद के शहरी और ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन दिन छह क्विंटल मछलियों की बिक्री होती है। 18 दिन के लॉकडाउन में 100 क्विंटल से अधिक मछलियों की जान फिलहाल कुछ समय तक के लिए बच चुकी है। अगर कोरोना या लॉकडाउन नहीं होता तो अब तक 100 क्विंटल मछलियां आहार बन चुकी होतीं। गली मोहल्लों की दुकानों पर थोड़ी बिक्री जरूर हो रही है। मगर, अधिकांश दुकानों पर ताला पड़ा है। अभी यह सिलसिला 14 अप्रैल तक जारी रहेगा। आगे लॉकडाउन की परिस्थिति पर निर्भर है। आमतौर पर लोग भी मांस या मछलियां खाने से बचने लगे हैं।
लॉकडाउन होने से मीट कारोबारी और मुर्गी पालन करने वालों को रोजाना दो लाख का नुकसान हो रहा है। कोरोना के चक्कर में अधिकांश लोगों ने मीट खाना बंद कर दिया है। अगर लॉकडाउन 15 अप्रैल के बाद भी जारी रहा तो बहुत बड़ा नुकसान होगा। -मोबिन, मीट विक्रेता
जान है तो जहान है। कोरोना संक्रमण फैला हुआ है। यह इंसान से जानवरों की ओर भी बढ़ रहा है। इस स्थिति में मीट बिल्कुल न खाएं। मेरी अपील है कि इस वक्त सभी लोग हरी सब्जी और दाल खाएं, यही स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। -अहसान अशरर्फी, मस्जिद हुसैनी, लाल रोड

डॉक्टर बोले- मांसाहार से दूरी बनाएं
कोरोना वायरस तेजी से फैला है। यह वायरस कहीं न कहीं जानवरों की ओर से भी बढ़ रहा है। जब तक कोरोना संक्रमण खत्म न हो जाए तब तक मीट मछली या अन्य मांसाहार से दूरी बनाए रखें। खाने पीने में हरी सब्जी, दालें और फलों का उपयोग करें, ये स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। -डॉ. आर. के तिवारी, प्राचार्य आयुर्वेदिक कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed