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नगरपालिका में खत्म हो गया बजट, संक्रमित इलाकों में नहीं लगीं बांस बल्लियां
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पीलीभीत। कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद अब जब ज्यादा एहतियात की जरूरत है, तब नगरपालिका में बजट खत्म हो गया। अफसर भले ही स्वीकार न करें लेकिन नगरपालिका कर्मचारियों का दबी जुबान से कहना है कि बजट न होने से कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाकों में बैरिकेडिंग नहीं कराई जा रही है। इससे इलाकों में आवाजाही पर रोक नहीं लग पा रही। इतना ही नहीं संक्रमितों के संपर्क आने वाले लोग भी सैंपल देने के बाद सड़कों पर घूम रहे है।
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद शहरी इलाकों में नगरपालिका को सैनिटाइज और बैरिकेडिंग कराने की जिम्मेदारी दी गई है। जनपद में अब तक 400 से अधिक कोरोना संक्रमित मिल चुके है। इनमें सबसे अधिक शहरी क्षेत्र में ही निकले हैं। बीते एक सप्ताह में जब कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी तो इसके बाद नगरपालिका ने कई इलाकों में बैरिकेडिंग नहीं कराई है। इसका कारण बजट नहीं होना बताया गया। नगरपालिका के अफसरों का कहना है कि बैरिकेडिंग के लिए कोई अलग से बजट नहीं मिला है। यह सब काम बोर्ड फंड से कराया जा रहा है। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन लगने से नगरपालिका की आमदनी आधी से भी कम रह गई है। इसलिए नगरपालिका के पास फंड उपलब्ध नहीं है। हालांकि नगरपालिका के अफसर अपनी साख बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की सूची के आधार पर बैरिकेडिंग करने की बात कह रहे हैं। लेकिन, बजट के अभाव में कोरोना संक्रमित इलाकों में नहीं हुई बैरिकेडिंग शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। कोरोना संक्रमित इलाकों में सैंपल देने वाले भी घूम रहे हैं। इधर, इसका एक कारण यह भी है कि ठेकेदारों को नगरपालिका बांस बल्लियों का भुगतान नहीं कर पाई। इसलिए वह नगरपालिका को सामान देने से कतरा रहे है। बैरिकेडिंग न होने से लोगों पर संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है।
कोरोना संक्रमित इलाकों में बैरिकेडिंग के लिए अलग से कोई बजट नहीं मिला है। यह काम बोर्ड फंड से कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सूची के आधार पर संक्रमित इलाकों में बैरिकेडिंग करा दी गई है। -निशा मिश्रा, ईओ नगरपालिका
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कोरोना संक्रमण फैलने के बाद शहरी इलाकों में नगरपालिका को सैनिटाइज और बैरिकेडिंग कराने की जिम्मेदारी दी गई है। जनपद में अब तक 400 से अधिक कोरोना संक्रमित मिल चुके है। इनमें सबसे अधिक शहरी क्षेत्र में ही निकले हैं। बीते एक सप्ताह में जब कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी तो इसके बाद नगरपालिका ने कई इलाकों में बैरिकेडिंग नहीं कराई है। इसका कारण बजट नहीं होना बताया गया। नगरपालिका के अफसरों का कहना है कि बैरिकेडिंग के लिए कोई अलग से बजट नहीं मिला है। यह सब काम बोर्ड फंड से कराया जा रहा है। कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन लगने से नगरपालिका की आमदनी आधी से भी कम रह गई है। इसलिए नगरपालिका के पास फंड उपलब्ध नहीं है। हालांकि नगरपालिका के अफसर अपनी साख बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की सूची के आधार पर बैरिकेडिंग करने की बात कह रहे हैं। लेकिन, बजट के अभाव में कोरोना संक्रमित इलाकों में नहीं हुई बैरिकेडिंग शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। कोरोना संक्रमित इलाकों में सैंपल देने वाले भी घूम रहे हैं। इधर, इसका एक कारण यह भी है कि ठेकेदारों को नगरपालिका बांस बल्लियों का भुगतान नहीं कर पाई। इसलिए वह नगरपालिका को सामान देने से कतरा रहे है। बैरिकेडिंग न होने से लोगों पर संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है।
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कोरोना संक्रमित इलाकों में बैरिकेडिंग के लिए अलग से कोई बजट नहीं मिला है। यह काम बोर्ड फंड से कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सूची के आधार पर संक्रमित इलाकों में बैरिकेडिंग करा दी गई है। -निशा मिश्रा, ईओ नगरपालिका
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