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रावण मायूस कि कहीं कोरोना न छीन ले अभिनय का मौका
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रावण की वेशभूषा में दिनेश रस्तोगी। फाइल फोटो
- फोटो : PILIBHIT
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बीसलपुर। ऐतिहासिक रामलीला मंचन में 32 साल से रावण का अभिनय करने वाले दिनेश रस्तोगी इस बात से मायूस हैं कि कहीं कोरोना उनसे रामलीला मंचन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से युद्ध करने का मौका न छीन ले। उनके पिता गंगा विष्णु उर्फ कल्लूमल रस्तोगी का उनकी इच्छानुसार 1986 में लीला मंचन के दौरान श्रीराम से युद्ध करते हुए निधन हो गया था।
मोहल्ला दुर्गाप्रसाद निवासी 59 वर्षीय दिनेश रस्तोगी के पिता गंगा विष्णु उर्फ कल्लूमल ने रामलीला मंचन में वर्ष 1941 से 1986 तक रावण का अभिनय किया। उनका लीला मंचन के दौरान राम से युद्ध करते हुए निधन हो गया तो तबसे उनके बेटे दिनेश ने रामलीला मंचन में रावण की भूमिका निभानी शुरू कर दी। पेशे से सराफ दिनेश बताते हैं कि वह पांच वर्ष की उम्र से अपने पिता के साथ रामलीला देखने जाते थे। वह 27 वर्ष की उम्र से ही रावण का अभिनय करने लगे। दिनेश रस्तोगी कहते हैं कि पिछले 32 वर्षों में एक बार भी रामलीला मंचन नहीं छोड़ा। मगर, इस बार कोरोना के चलते डर है कि कहीं भगवान राम से युद्ध करने का मौका हाथ से न चला जाए। मगर, उम्मीद है कि प्रभु राम उनकी लीला मंचन में रावण से आमना-सामना होने की इच्छा पूरी करेंगे। दिनेश के बड़े भाई गनेश नरायन ने भी रामलीला मंचन में 10 वर्षों तक रावण के बेटे अक्षय कुमार की भूमिका निभाई।
कोरोना संक्रमण के प्रकोप से शुरू नहीं हो पाया रामलीला का अभ्यास
बीसलपुर। कोरोना के प्रकोप के चलते इस बार रामलीला की तालीम भी शुरू नहीं हो पाई है। 14 अक्तूबर से प्रस्तावित रामलीला मेला आयोजन की अनुमति शासन से मिलनी बाकी है। कलाकारों में संदेह है कि पता नहीं रामलीला मेला आयोजन की अनुमति मिले या न मिले। इसीलिए कलाकारों ने इस वर्ष अभी तक पात्रों का अभ्यास शुरू नहीं किया है। पात्रों की तैयारी कराने वाले मनोज त्रिपाठी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मेला शुरू होने से एक माह पहले ही जानकी रतन मंदिर में पुजारी लखनलाल मिश्रा के निर्देशन में कलाकार अभ्यास शुरू कर देते हैं। इस बार ऐसा नहीं हो पाया। 30 सितंबर को शासन की नई गाइडलाइन में रामलीला मेला आयोजन की अनुमति मिलती है, तो कमेटी की बैठक होगी। उसके बाद ही पात्रों के अभ्यास को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
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मोहल्ला दुर्गाप्रसाद निवासी 59 वर्षीय दिनेश रस्तोगी के पिता गंगा विष्णु उर्फ कल्लूमल ने रामलीला मंचन में वर्ष 1941 से 1986 तक रावण का अभिनय किया। उनका लीला मंचन के दौरान राम से युद्ध करते हुए निधन हो गया तो तबसे उनके बेटे दिनेश ने रामलीला मंचन में रावण की भूमिका निभानी शुरू कर दी। पेशे से सराफ दिनेश बताते हैं कि वह पांच वर्ष की उम्र से अपने पिता के साथ रामलीला देखने जाते थे। वह 27 वर्ष की उम्र से ही रावण का अभिनय करने लगे। दिनेश रस्तोगी कहते हैं कि पिछले 32 वर्षों में एक बार भी रामलीला मंचन नहीं छोड़ा। मगर, इस बार कोरोना के चलते डर है कि कहीं भगवान राम से युद्ध करने का मौका हाथ से न चला जाए। मगर, उम्मीद है कि प्रभु राम उनकी लीला मंचन में रावण से आमना-सामना होने की इच्छा पूरी करेंगे। दिनेश के बड़े भाई गनेश नरायन ने भी रामलीला मंचन में 10 वर्षों तक रावण के बेटे अक्षय कुमार की भूमिका निभाई।
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कोरोना संक्रमण के प्रकोप से शुरू नहीं हो पाया रामलीला का अभ्यास
बीसलपुर। कोरोना के प्रकोप के चलते इस बार रामलीला की तालीम भी शुरू नहीं हो पाई है। 14 अक्तूबर से प्रस्तावित रामलीला मेला आयोजन की अनुमति शासन से मिलनी बाकी है। कलाकारों में संदेह है कि पता नहीं रामलीला मेला आयोजन की अनुमति मिले या न मिले। इसीलिए कलाकारों ने इस वर्ष अभी तक पात्रों का अभ्यास शुरू नहीं किया है। पात्रों की तैयारी कराने वाले मनोज त्रिपाठी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मेला शुरू होने से एक माह पहले ही जानकी रतन मंदिर में पुजारी लखनलाल मिश्रा के निर्देशन में कलाकार अभ्यास शुरू कर देते हैं। इस बार ऐसा नहीं हो पाया। 30 सितंबर को शासन की नई गाइडलाइन में रामलीला मेला आयोजन की अनुमति मिलती है, तो कमेटी की बैठक होगी। उसके बाद ही पात्रों के अभ्यास को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
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