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हाथियों का उत्पात जारी, 25 एकड़ फसल रौंदी
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:53 PM IST
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हाथियों का उत्पात जारी
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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तराई में हाथियों का कहर लगातार जारी है। गुस्साएं हाथियों के झुंड ने रात गुन्हान गांव में आतंक मचाते हुए करीब 25 एकड़ से अधिक धान की फसल को बुरी तरह रौंद डाला और एक किसान के खेत में रखे 35 बोरा धान को भी खा गए। रात से लेकर सुबह तक हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में खासा खौफ देखा गया। वहीं स्थिति को जानने पहुंचे डीएफओ व वनधिकारी बीच रास्ते से ही वापस लौट गए।
तराई के गुन्हान में करीब छह दिन पूर्व एक हाथी की संदिग्ध मौत हो गई थी। साथी हाथ की मौत के बाद हाथी उस दौरान वहां से नेपाल की शुक्ला फांटा सेंच्यूरी चले गए, लेकिन उसी रात करीब 30-35 हाथियों का झुंड पुन: लग्गा भग्गा क्षेत्र में आ गया था। आक्रोशित ने तीन दिन पूर्व गभिया सहराई क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया। इस पर बड़ी तादाद में एकत्र ग्रामीणों ने पुलिस, एसएसबी व वन विभाग की मदद से हाथियों को देर रात खदेड़ दिया था। इसके दूसरे ही दिन हाथियों का झुंड नौजल्हा क्षेत्र में शारदा नदी के किनारे दोबारा आ पहुंचा। मार्जनल बांध पर मौजूद ग्रामीणों की भीड़ ने शोर शराबा व पटाखे दागकर हाथियों को आबादी की ओर से रोक दिया था। शनिवार को भी हाथियों की मौजूदगी शारदा नदी के किनारे देखी गई। जिसके चलते ग्रामीणों में एक बार पुन: हड़कंच मच गया। ग्रामीणों ने साहस कर शारदा नदी के बीच बने टापू पर जाकर शोर मचाकर हाथियों को खदेड़ दिया। इधर शनिवार रात करीब 11 बजे हाथियों का झुंड ने गुन्हान क्षेत्र पर हमला बोल दिया। यहां हाथियों ने प्रधान प्रशांत साना, हरान साना, पार्वती, जमुना राजभर, घुरई, गोवर्धन, दूधनाथ, रामशकल, विजय, चंद्रभान, जवाहर सहित करीब डेढ़ दर्जन से अधिक पट्टेदार किसानों की धान व गन्ने की फसल को खाने के साथ बुरी तरह रौंद डाला। कालीपद के खेत में रखे 40 बोरे धान को भी हाथी चट कर गए। खेतों में रखवाली कर रहे ग्रामीणों ने बमुश्किल भागकर अपनी जान बचाई। सारी रात ग्रामीण एकजुट होकर डटे रहे। सुबह करीब छह बजे हाथियों का झुंड शारदा नदी के किनारे होते हुए लग्गा भग्गा क्षेत्र में चला गया। इधर गुन्हान से लेकर नौजल्हा नंबर तक नदी किनारे आधा दर्जन गांवों में हाथियों का झुंड रात को कब गांव में घुस जाए, इसको लेकर ग्रामीण जागकर रातें गुजारने को मजबूर है।
अधिकारियों का दल वापस लौटा
टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश, डीएफओ सामाजिक वानिकी आर्दश कुमार, एसडीओ सामाजिक वानिकी केपी सिंह, रेंजर हसीन अहमद, अनिल शाह, डिप्टी रेंजर दिग्विजय सिंह, आरिफ जमाल रविवार को हाथियों की स्थिति जानने शारदा नदी के रमनगरा घाट पर पहुंचे। अफसरों का यह दल गुन्हान जाना चाहता था। ट्रैक्टर ट्राली की व्यवस्था भी कर ली गई, लेकिन मौसम की खराबी की बात कहते हुए यह दल घाट से वापस लौट गया।
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गुन्हान के तीन ग्रामीणों को मार चुके हैं हाथी
वर्ष 1992 में हाथियों के झुंड ने गुन्हान निवासी मंगल मिस्त्री, रंजन गाइन, सुखलाल को कुचलकर मार डाला था। बताते हैं कि यह सभी किसान रात को अपने खेतों की रखवाली कर रहे थे।
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तराई के गुन्हान में करीब छह दिन पूर्व एक हाथी की संदिग्ध मौत हो गई थी। साथी हाथ की मौत के बाद हाथी उस दौरान वहां से नेपाल की शुक्ला फांटा सेंच्यूरी चले गए, लेकिन उसी रात करीब 30-35 हाथियों का झुंड पुन: लग्गा भग्गा क्षेत्र में आ गया था। आक्रोशित ने तीन दिन पूर्व गभिया सहराई क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया। इस पर बड़ी तादाद में एकत्र ग्रामीणों ने पुलिस, एसएसबी व वन विभाग की मदद से हाथियों को देर रात खदेड़ दिया था। इसके दूसरे ही दिन हाथियों का झुंड नौजल्हा क्षेत्र में शारदा नदी के किनारे दोबारा आ पहुंचा। मार्जनल बांध पर मौजूद ग्रामीणों की भीड़ ने शोर शराबा व पटाखे दागकर हाथियों को आबादी की ओर से रोक दिया था। शनिवार को भी हाथियों की मौजूदगी शारदा नदी के किनारे देखी गई। जिसके चलते ग्रामीणों में एक बार पुन: हड़कंच मच गया। ग्रामीणों ने साहस कर शारदा नदी के बीच बने टापू पर जाकर शोर मचाकर हाथियों को खदेड़ दिया। इधर शनिवार रात करीब 11 बजे हाथियों का झुंड ने गुन्हान क्षेत्र पर हमला बोल दिया। यहां हाथियों ने प्रधान प्रशांत साना, हरान साना, पार्वती, जमुना राजभर, घुरई, गोवर्धन, दूधनाथ, रामशकल, विजय, चंद्रभान, जवाहर सहित करीब डेढ़ दर्जन से अधिक पट्टेदार किसानों की धान व गन्ने की फसल को खाने के साथ बुरी तरह रौंद डाला। कालीपद के खेत में रखे 40 बोरे धान को भी हाथी चट कर गए। खेतों में रखवाली कर रहे ग्रामीणों ने बमुश्किल भागकर अपनी जान बचाई। सारी रात ग्रामीण एकजुट होकर डटे रहे। सुबह करीब छह बजे हाथियों का झुंड शारदा नदी के किनारे होते हुए लग्गा भग्गा क्षेत्र में चला गया। इधर गुन्हान से लेकर नौजल्हा नंबर तक नदी किनारे आधा दर्जन गांवों में हाथियों का झुंड रात को कब गांव में घुस जाए, इसको लेकर ग्रामीण जागकर रातें गुजारने को मजबूर है।
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अधिकारियों का दल वापस लौटा
टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश, डीएफओ सामाजिक वानिकी आर्दश कुमार, एसडीओ सामाजिक वानिकी केपी सिंह, रेंजर हसीन अहमद, अनिल शाह, डिप्टी रेंजर दिग्विजय सिंह, आरिफ जमाल रविवार को हाथियों की स्थिति जानने शारदा नदी के रमनगरा घाट पर पहुंचे। अफसरों का यह दल गुन्हान जाना चाहता था। ट्रैक्टर ट्राली की व्यवस्था भी कर ली गई, लेकिन मौसम की खराबी की बात कहते हुए यह दल घाट से वापस लौट गया।
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गुन्हान के तीन ग्रामीणों को मार चुके हैं हाथी
वर्ष 1992 में हाथियों के झुंड ने गुन्हान निवासी मंगल मिस्त्री, रंजन गाइन, सुखलाल को कुचलकर मार डाला था। बताते हैं कि यह सभी किसान रात को अपने खेतों की रखवाली कर रहे थे।