फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   congreats on husband, get martyr status

पति पर फक्र, शहीद का मिले दर्जा

Sun, 21 Nov 2021 01:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 01:36 AM IST
विज्ञापन
congreats on husband, get martyr status
पूरनपुर। दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को वापस लेने के आंदोलन में जान गंवाने वाले किसान की पत्नी ने कहा कि पति ने किसानों के हक की लड़ाई में अपनी जान दी है। जब-जब किसान आंदोलन होंगे, तब-तब उनके पति याद किए जाएंगे। पत्नी ने किसान को शहीद का दर्जा देने, परिवार को मुआवजा दिलवाने की मांग उठाई है।
विज्ञापन

किसान आंदोलन में तहसील क्षेत्र के किसानों की अहम भूमिका रही। बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल होने को जाने वाले किसानों को रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन को कई बार मशक्कत करनी पड़ी। मगर सख्ती के बाद भी क्षेत्र से तमाम किसान बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल होने को पहुंचे। सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव सिंहपुर निवासी बलजिंदर सिंह भी जनवरी माह में आंदोलन में शामिल होने के लिए अन्य किसानों के साथ दिल्ली बॉर्डर पर गए थे। वहां उनकी मौत हो गई थी। पुलिस, प्रशासन ने एक वाहन की टक्कर से किसान की मौत की जानकारी दी। किसान की मौत के बाद उनके परिवार पर समस्याओं का पहाड़ टूट पड़ा। किसान की पत्नी सुखविंदर कौर ने बताया कि बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा आदि को लेकर समस्या तो खड़ी हो गई है। मगर उनके पति ने किसानों की हक के लिए लड़ाई में अपनी जान दी है, इससे उन्हें फक्र है। जब-जब आंदोलन होंगे, तब-तब उनके पति को याद किया जाएगा। किसान के परिवार में पत्नी के अलावा 14 वर्षीय पुत्र नवदीप, आठ साल की पुत्री जसनदीप कौर है। करीब दो एकड़ जमीन है।
विज्ञापन

कृषि कानूनों के वापसी के एलान पर किसानों ने तो राहत की सांस ली है। मगर आंदोलन में जान गंवाने वाले किसान के परिवार को अब तक सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया। परिवार को मुआवजा के साथ किसान को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। - हरप्रताप सिंह
विज्ञापन
विज्ञापन

आंदोलन के दौरान चाहे दिल्ली बॉर्डर पर या फिर लखीमपुर खीरी कांड में किसानों ने जान गंवाई हो। ऐसे में किसान परिवारों को मुआवजा के साथ उनको शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। परिवार को शहीद परिवार जैसे सुविधाएं मिले।
- आकाशदीप, पचपेड़ा
आंदोलन में किसान की मौत पर उनका परिवार आर्थिक संकट में घिर गया। खेती कैसे होगी। इसको लेकर परिवार वाले चिंतित रहते हैं। किसान परिवार को सहायता के साथ किसान को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।

- रणनीत सिंह, कढेरचौरा
आंदोलन में जान गंवाने वाला किसान अपने परिवार का मुखिया और एकलौता कमाऊं था। किसान की मौत पर परिवार का पूरे परिवार के हालात ही बिगड़ गए। किसान को शहीद दर्जा के साथ परिवार वालों को सहायता मिलनी चाहिए।
- कुलवंत सिंह, मंडनपुर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed