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तलाक याचिका लंबित रहने तक पत्नी को मिलेगा मासिक भरण पोषण
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पीलीभीत। पत्नी से तलाक लेने की पति की याचिका लंबित रहने तक पत्नी को 3000 मासिक अंतरिम भरण पोषण पति को अदा करना होगा। फैमिली कोर्ट के आदेश को उच्च न्यायालय ने सही ठहराया है। पति की याचिका को खारिज कर दिया है।
बरेली महानगर में बीडीए कॉलोनी निवासी जुगल किशोर दुबे की पुत्री नेहा दुबे ने बताया कि उसका विवाह 15 जनवरी 2015 को पीलीभीत जिले के कस्बा पूरनपुर निवासी गौरव मिश्रा पुत्र अशोक कुमार मिश्रा के साथ हुआ है। पत्नी से छुटकारा पाने को पति ने 2018 में तलाक की याचिका प्रस्तुत कर दी। तलाक की याचिका का सम्मान मिलने के बाद नेहा दुबे अदालत पहुंची। बताया कि उनकी आमदनी का कोई साधन नहीं है। उन्हें बरेली से तलाक की याचिका में तारीख पर आने के लिए और मासिक भरण-पोषण के लिए धनराशि की आवश्यकता है। पति की सरिया, सीमेंट और टाइल्स की दुकान है। उसका लाखों रुपये का कारोबार है । महीने की आमदनी भी हजारों रुपये है।
परिवार न्यायालय के अपर प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र मोहन सहाय की अदालत में दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। न्यायालय ने तीन सितंबर 2021 को अपना फैसला सुनाया। पति गौरव मिश्रा को आदेश दिया गया कि वह तलाक की याचिका लंबित रहने तक पत्नी के मासिक भरण पोषण के लिए 3000 रुपये महीने अदा करें। मुकदमा के खर्च के रूप में भी एक मुश्त 5000 रुपये दे। इस आदेश के खिलाफ गौरव मिश्रा ने उच्च न्यायालय प्रयागराज में अपील दायर की। अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की खंड पीठ में हुई। मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने गौरव मिश्रा की अपील को खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही ठहराया है। इस प्रकार नेहा दुबे को पति से 3000 रुपये मासिक भरण-पोषण राशि तलाक की याचिका लंबित रहने तक मिलती रहेगी।
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बरेली महानगर में बीडीए कॉलोनी निवासी जुगल किशोर दुबे की पुत्री नेहा दुबे ने बताया कि उसका विवाह 15 जनवरी 2015 को पीलीभीत जिले के कस्बा पूरनपुर निवासी गौरव मिश्रा पुत्र अशोक कुमार मिश्रा के साथ हुआ है। पत्नी से छुटकारा पाने को पति ने 2018 में तलाक की याचिका प्रस्तुत कर दी। तलाक की याचिका का सम्मान मिलने के बाद नेहा दुबे अदालत पहुंची। बताया कि उनकी आमदनी का कोई साधन नहीं है। उन्हें बरेली से तलाक की याचिका में तारीख पर आने के लिए और मासिक भरण-पोषण के लिए धनराशि की आवश्यकता है। पति की सरिया, सीमेंट और टाइल्स की दुकान है। उसका लाखों रुपये का कारोबार है । महीने की आमदनी भी हजारों रुपये है।
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परिवार न्यायालय के अपर प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र मोहन सहाय की अदालत में दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। न्यायालय ने तीन सितंबर 2021 को अपना फैसला सुनाया। पति गौरव मिश्रा को आदेश दिया गया कि वह तलाक की याचिका लंबित रहने तक पत्नी के मासिक भरण पोषण के लिए 3000 रुपये महीने अदा करें। मुकदमा के खर्च के रूप में भी एक मुश्त 5000 रुपये दे। इस आदेश के खिलाफ गौरव मिश्रा ने उच्च न्यायालय प्रयागराज में अपील दायर की। अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की खंड पीठ में हुई। मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने गौरव मिश्रा की अपील को खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही ठहराया है। इस प्रकार नेहा दुबे को पति से 3000 रुपये मासिक भरण-पोषण राशि तलाक की याचिका लंबित रहने तक मिलती रहेगी।
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