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नमी और कमी बता कर क्रय केंद्रों से लौटाए जा रहे किसान
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पीलीभीत मंडी समिति में बिक्री के धान सुखाते किसान।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। भले ही धान की कॉमन प्रजाति का सरकारी समर्थन मूल्य 1940 रुपये और ग्रेड ए धान 1960 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचा जाना हो पर किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्रय केंद्रों से नमी और कमी बताकर किसानों को लौटाए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। पीड़ित किसानों ने धान खरीद के मानकों में ढिलाई पर जोर दिया है लेकिन अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि मानक शासन ने तय किए हैं और शासन ही इसमें बदलाव कर सकता है।
जिला स्तर पर तो तय मानकों के अनुसार खरीद सुनिश्चित की जानी है। मंडी सचिव अशोक कुमार ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर मानक की कसौटी पर धान को कसा जाना जरूरी है क्योंकि चावल की रिकवरी का भी मानक शासन ने तय कर रखा है। अगर मानक पर धान खरा है और फिर भी कोई क्रय केंद्र खरीद नहीं रहा है तो उस पर कार्रवाई की जा रही है। इधर, किसानों का कहना है कि केंद्र पर धान में नमी और उसमें कुछ न कुछ कमी बताकर तौल करने से प्रभारी मना कर रहे हैं। शिकायत पर भी उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। आजिज आकर आढ़तों पर धान को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
पूरी रात मंडी में रुके, लेकिन क्रय केंद्र पर धान दागी और टूटा हुआ कह कर रिजेक्ट कर दिया गया। डीजल इतना महंगा है कि अगर धान लेकर वापस घर जाएं तो लागत और बढ़ जाएगी। इसलिए धान खुले बाजार में 1350 रुपये प्रति क्विंटल पर बेच दिया है।
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- घनश्याम, कल्याणपुर
ये साल किसानों के लिए हर लिहाज से खराब ही रहा। सबसे पहले तो अपनी फसल का दाम नहीं मिला, धान को सेंटर पर दागी बता दिया और नमी का मानक भी पूरा नहीं हुआ। मानक के मामले में सरकार भी कोई रियायत नहीं दे रही है। चक्कर काटने के बाद मजबूरन धान 1200 रुपये प्रति क्विंटल के रेट में बेचने पड़े हैं।
- शिवदयाल, खमरिया पुल
मानक में ढिलाई के लिए शासन को कराया गया है अवगत
पीलीभीत। खाद्य एवं रसद विभाग के डिप्टी आरएमओ ज्ञान चंद वर्मा ने माना कि बाढ़ और बेमौसम बारिश ने धान की फसल को खराब किया है। मानकों में ढिलाई की जरूरत किसान ही नहीं अधिकारियों ने भी महसूस की लेकिन यह स्थानीय अधिकारियों के स्तर पर नहीं हो सकता है। इसीलिए शासन को अवगत कराया गया है। अब शासन स्तर से निर्देश मिलने पर कुछ कार्रवाई हो सकती है। तब तक जो मानक हैं उनकी कसौटी पर किसान का धान कसा जाएगा। क्योंकि शासन के मानक का पालन कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है।
आंकड़ों में धान की खरीद
34 करोड़ 28 लाख 59 हजार रुपये का धान खरीदा गया
05 करोड़ 89 लाख 03 हजार रुपये का किया गया भुगतान
17673.12 मीट्रिक टन धान खरीदे गए
3,56,500 मीट्रिक टन धान की खरीद का है लक्ष्य
मंडी में धान की आवक बढ़ गई है। उम्मीद है कि लक्ष्य के अनुरूप खरीद होगी।
- ज्ञानचंद वर्मा, डिप्टी आरएमओ
भारत सरकार के मानक के मुताबिक सरकारी क्रय केंद्रों पर बदरंग धान सिर्फ चार प्रतिशत तक लिया जा सकता है। लेकिन बारिश और बाढ़ के कारण जिले में जो धान मंडी तक आ रहा है, उसमें 10-18 प्रतिशत तक धान बदरंग है। मानक में ढिलाई के लिए शासन से संस्तुति की गई है। लेकिन कर्मचारी और अधिकारी शासन के मानकों से बंधे हुए हैं। जब तक मानक में छूट की संस्तुति पर कोई निर्णय नहीं होता है तब तक प्रचलित मानक का ही पालन कराया जाएगा।
- देवेंद्र प्रताप मिश्र, अपर जिलाधिकारी एवं धान खरीद के नोडल अधिकारी
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जिला स्तर पर तो तय मानकों के अनुसार खरीद सुनिश्चित की जानी है। मंडी सचिव अशोक कुमार ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर मानक की कसौटी पर धान को कसा जाना जरूरी है क्योंकि चावल की रिकवरी का भी मानक शासन ने तय कर रखा है। अगर मानक पर धान खरा है और फिर भी कोई क्रय केंद्र खरीद नहीं रहा है तो उस पर कार्रवाई की जा रही है। इधर, किसानों का कहना है कि केंद्र पर धान में नमी और उसमें कुछ न कुछ कमी बताकर तौल करने से प्रभारी मना कर रहे हैं। शिकायत पर भी उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। आजिज आकर आढ़तों पर धान को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
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पूरी रात मंडी में रुके, लेकिन क्रय केंद्र पर धान दागी और टूटा हुआ कह कर रिजेक्ट कर दिया गया। डीजल इतना महंगा है कि अगर धान लेकर वापस घर जाएं तो लागत और बढ़ जाएगी। इसलिए धान खुले बाजार में 1350 रुपये प्रति क्विंटल पर बेच दिया है।
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- घनश्याम, कल्याणपुर
ये साल किसानों के लिए हर लिहाज से खराब ही रहा। सबसे पहले तो अपनी फसल का दाम नहीं मिला, धान को सेंटर पर दागी बता दिया और नमी का मानक भी पूरा नहीं हुआ। मानक के मामले में सरकार भी कोई रियायत नहीं दे रही है। चक्कर काटने के बाद मजबूरन धान 1200 रुपये प्रति क्विंटल के रेट में बेचने पड़े हैं।
- शिवदयाल, खमरिया पुल
मानक में ढिलाई के लिए शासन को कराया गया है अवगत
पीलीभीत। खाद्य एवं रसद विभाग के डिप्टी आरएमओ ज्ञान चंद वर्मा ने माना कि बाढ़ और बेमौसम बारिश ने धान की फसल को खराब किया है। मानकों में ढिलाई की जरूरत किसान ही नहीं अधिकारियों ने भी महसूस की लेकिन यह स्थानीय अधिकारियों के स्तर पर नहीं हो सकता है। इसीलिए शासन को अवगत कराया गया है। अब शासन स्तर से निर्देश मिलने पर कुछ कार्रवाई हो सकती है। तब तक जो मानक हैं उनकी कसौटी पर किसान का धान कसा जाएगा। क्योंकि शासन के मानक का पालन कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है।
आंकड़ों में धान की खरीद
34 करोड़ 28 लाख 59 हजार रुपये का धान खरीदा गया
05 करोड़ 89 लाख 03 हजार रुपये का किया गया भुगतान
17673.12 मीट्रिक टन धान खरीदे गए
3,56,500 मीट्रिक टन धान की खरीद का है लक्ष्य
मंडी में धान की आवक बढ़ गई है। उम्मीद है कि लक्ष्य के अनुरूप खरीद होगी।
- ज्ञानचंद वर्मा, डिप्टी आरएमओ
भारत सरकार के मानक के मुताबिक सरकारी क्रय केंद्रों पर बदरंग धान सिर्फ चार प्रतिशत तक लिया जा सकता है। लेकिन बारिश और बाढ़ के कारण जिले में जो धान मंडी तक आ रहा है, उसमें 10-18 प्रतिशत तक धान बदरंग है। मानक में ढिलाई के लिए शासन से संस्तुति की गई है। लेकिन कर्मचारी और अधिकारी शासन के मानकों से बंधे हुए हैं। जब तक मानक में छूट की संस्तुति पर कोई निर्णय नहीं होता है तब तक प्रचलित मानक का ही पालन कराया जाएगा।
- देवेंद्र प्रताप मिश्र, अपर जिलाधिकारी एवं धान खरीद के नोडल अधिकारी