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शाहजहांपुर-शहबाजनगर के बीच दस नवंबर तक इलेक्ट्रिक लोको से ट्रायल होने की उम्मीद

Tue, 02 Nov 2021 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 12:27 AM IST
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पीलीभीत जंक्शन पर शाहजहांपुर की ओर जाने वाले ट्रैक पर खड़ी ट्रेन। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। शाहजहांपुर से शहबाजनगर के बीच इलेक्ट्रिक लोको का ट्रायल 10 नवंबर तक हो सकता है। फिलहाल इलेक्ट्रिक वायर डालने का काम तेजी से किया जा रहा है। विद्युतीकरण की कार्यदायी संस्था ग्रीन पावर इंटरनेशनल के एक अधिकारी ने बताया कि पीलीभीत से निगोही तक विद्युतीकरण का काम पूरा हो चुका है। जबकि निगोही से शहबाजनगर के बीच सिर्फ इलेक्ट्रिक वायर डालने का काम होना है। जिसको सप्ताह भर में पूरा कर लिया जाएगा। दस से 15 नवंबर के बीच इलेक्ट्रिक लोको से ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद सीआरएस निरीक्षण को लेकर प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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ट्रेन संचालन के लिए विद्युतीकरण का काम लगभग पूरा
शाहजहांपुर रूट पर विद्युतीकरण अंतिम छोर पर है। इससे अफसर डीजल इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन दौड़ाने की कोशिश में है। अगर कासगंज इंजन डीजल लेने जाएगा। जो काफी खर्चा होगा। इसीलिए डीजल इंजन से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। जबकि पीलीभीत से शहबाजनगर के बीच 80 फीसदी विद्युतीकरण का काम पूरा हो चुका है। शाहजहांपुर से शहबाजनगर के बीच भी 40 फीसदी काम पूरा बताया जा रहा है।
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2018 में मीटरगेज ट्रेनों का संचालन कर दिया गया था बंद
बता दें कि 30 मई 2018 को ब्रॉडगेज के काम को लेकर मीटर गेज की ट्रेनों का हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। इसके बाद जून में शाहजहांपुर रूट के 84 किलोमीटर में आमान परिवर्तन का काम शुरू हुआ था। इस रूट पर 427 करोड़ की लागत होने वाले आमान परिवर्तन में शुरूआती दौरान में तो काफी तेजी दिखाई दी। अफसर भी एक साल में काम पूरा करने का दावा कर रहे थे। मगर दिन बीतते गए और काम की गति सुस्त होती चली गई। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद बीसलपुर तक 37 किलोमीटर में ट्रेेन चलाने की कवायद शुरू हुई। इससे फरवरी 2020 में सीआरएस निरीक्षण हो गया। मगर इसके बाद भी ट्रेन नहीं चल सकी। बाद में बीसलपुर और शहबाजनगर के बीच काम पूरा हो गया। नवंबर 2020 में सीआरएस ने पीलीभीत-शहबाजनगर के बीच 79 किलोमीटर में ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी थी, मगर अफसरों की हीलाहवाली के चलते ट्रेेनों का संचालन नहीं हो सका। इसके बाद उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे का सात माह पेच फंसा रहा। दोनों डिवीजनों की सहमति बनने के बाद जुलाई 2021 में काम पूरा हो गया और चार अगस्त को सीआरएस ने फाइनल निरीक्षण का इस 84 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रेनों के संचालन को अनुमति दे दी।
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दो जोड़ी ट्रेनों के संचालन को भेजा जा चुका है प्रस्ताव
शाहजहांपुर तक ट्रैक ओके होने के बाद इज्जतनगर मंडल की ओर से ट्रेन के संचालन को लेकर प्रस्ताव मांगा गया था। इससे दो जोड़ी ट्रेनों के संचालन को प्रस्ताव बना कर भेज गया था। हालांकि प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड की ओर से अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

रेल मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। अभी तक ट्रेन के संचालन को लेकर हरी झंडी नहीं मिली है। इससे ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। जल्द ही अनुमति मिलने की उम्मीद है। इसके बाद संचालन शुरू कर दिया जाएगा। सीपी चौहान, पीआरओ गोरखपुर
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