{"_id":"617ee9e0e6409374a763c5cd","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly464806452","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले बाढ़ ने मारा, अब खाद के बढ़े दाम ने किसानों को रुलाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले बाढ़ ने मारा, अब खाद के बढ़े दाम ने किसानों को रुलाया
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इफको के क्रय केंद्र पर रखी नए दाम की खाद।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। एक वर्ष में एनपीके के दाम 350 रुपये प्रति बोरी बढ़ गए। डीजल के दाम में भी कई बार बढ़ोतरी हुई है। ईंधन के दाम बढ़ने से जरूरी सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं, पर बाढ़ में धान खराब हो गया। भाव जमीन पर आ गया है। दिवाली और धनतेरस का त्योहार सिर पर है लेकिन जेब खाली है तो खरीदारी कैसे करें? यही सवाल जेहन में घूम ही रहा है। अगली फसल की तैयारी करनी है। गेहूं और लाही की बुआई होनी है। एनपीके खाद के दाम इस कदर बढ़ गए हैं कि खेती अब घाटे का सौदा नजर आने लगी है। मजबूरी की बात यह है दूसरा कोई काम नहीं मिल रहा है। इसलिए घाटा हो या मुनाफा खेती तो करनी ही है। महंगाई की मार से जूझ रहे इफको के मंडी समिति स्थित विक्रय केंद्र पर काफी आहत नजर आए। केंद्र पर दोपहर 1.30 बजे 250 किसानों की कतार थी लेकिन जब उन्हें बताया गया कि बढ़े हुए दाम का नया खाद मिलेगा तो संख्या घटकर आधी भी नहीं रह गई। जाहिर है कि महंगाई से जूझ रहे किसानों के लिए महंगा खाद खरीद पाना मुश्किल भरा है।
एनपीके के दाम में इतना उछाल एक साथ कभी नहीं आया
एनपीके के दाम में एक साथ इतना उछाल कभी नहीं आया। शनिवार को कुछ किसान ऐसे भी थे जिनके पास बढ़े दाम के हिसाब से रुपये नहीं थे और वे भाव पूछकर लौट गए। असल में अभी सहकारी समितियों के पास पुराने दाम का एनपीके उपलब्ध है और समिति सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि जिस बोरी पर जो पुराना भाव अंकित है। उसी भाव पर खाद बेचना है। किसान अगर पुराने भाव की एनपीके समिति से लेता है तो उसे 285 रुपये कम देने पड़ेंगे, जब तक पुराना स्टाक है तब तक पुराने भाव का लाभ मिलेगा पर पीलीभीत के इफको केंद्र में एनपीके का पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है। एनपीके के दाम एक वर्ष में 350 रुपये बढ़े हैं जबकि 285 रुपये की बढ़ोतरी तो 15 अक्तूबर से हुई है।
(मंडी समिति स्थित इफको के खाद बिक्री केंद्र के प्रभारी नरेंद्र सिंह से हुई बातचीत के आधार पर)
एनपीके का कब क्या था भाव
01 जुलाई 2020-1100
01 अक्तूबर 2020-1175
16 फरवरी 2021-1185
15 अक्तूबर 2021-1450
(भाव प्रति 50 किलोग्राम की बोरी का है, जुलाई 2020 से अक्तूबर 2021 तक 350 रुपये एक बोरी खाद पर बढ़ गए)
मैंने बटाई पर खेत लिया था। रेट 1185 के हिसाब से रुपये लेकर गए थे। वहां पता चला कि 1450 का भाव हो गया। बटाईदार से पूछा तो वह बढ़े हुए रुपये देने के लिए राजी नहीं हुआ। महंगाई की वजह से तत्काल लौट आए।
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- चतुरबिहारी, टिकरीमाफी किसान
मैंने सोचा था कि पुराने दाम पर खाद लेने गए थे लेकिन जब वहां देखा कि दाम बढ़ गए हैं तो बिना खाद लिए लौट आए। धान बर्बाद हो गया है। अब उधार लेकर खाद लाएंगे या फिर खाद कम लगाएंगे। खेती तो करनी ही है। - लीलाधर, मुड़िया हुलास
मैं 11.30 बजे खाद लेने गया था लेकिन रेट अधिक होने की वजह से लौट आया। धान बारिश में खराब हो गया है। भीगा हुआ धान क्रय केंद्र पर बिक रहा है। मंडी में 1000 रुपये क्विंटल बिक्री है। ऐसे में खाद खरीदने के लिए रुपये नहीं है।
- मोहनस्वरूप, टिकरीमाफी
बाढ़ में धान डूब कर खराब हो गया। जैसा धान निकला उसे शनिवार को मंडी में 650 रुपये क्विंटल बेचना पड़ा। गेहूं और लाही की बुआई करनी थी। खाद चाहिए थी लेकिन इफ्को केंद्र पर खाद की महंगाई देखकर निराश होकर लौटना पड़ा।
- नरेश कुमार, मुड़िया हुलास
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एनपीके के दाम में इतना उछाल एक साथ कभी नहीं आया
एनपीके के दाम में एक साथ इतना उछाल कभी नहीं आया। शनिवार को कुछ किसान ऐसे भी थे जिनके पास बढ़े दाम के हिसाब से रुपये नहीं थे और वे भाव पूछकर लौट गए। असल में अभी सहकारी समितियों के पास पुराने दाम का एनपीके उपलब्ध है और समिति सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि जिस बोरी पर जो पुराना भाव अंकित है। उसी भाव पर खाद बेचना है। किसान अगर पुराने भाव की एनपीके समिति से लेता है तो उसे 285 रुपये कम देने पड़ेंगे, जब तक पुराना स्टाक है तब तक पुराने भाव का लाभ मिलेगा पर पीलीभीत के इफको केंद्र में एनपीके का पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है। एनपीके के दाम एक वर्ष में 350 रुपये बढ़े हैं जबकि 285 रुपये की बढ़ोतरी तो 15 अक्तूबर से हुई है।
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(मंडी समिति स्थित इफको के खाद बिक्री केंद्र के प्रभारी नरेंद्र सिंह से हुई बातचीत के आधार पर)
एनपीके का कब क्या था भाव
01 जुलाई 2020-1100
01 अक्तूबर 2020-1175
16 फरवरी 2021-1185
15 अक्तूबर 2021-1450
(भाव प्रति 50 किलोग्राम की बोरी का है, जुलाई 2020 से अक्तूबर 2021 तक 350 रुपये एक बोरी खाद पर बढ़ गए)
मैंने बटाई पर खेत लिया था। रेट 1185 के हिसाब से रुपये लेकर गए थे। वहां पता चला कि 1450 का भाव हो गया। बटाईदार से पूछा तो वह बढ़े हुए रुपये देने के लिए राजी नहीं हुआ। महंगाई की वजह से तत्काल लौट आए।
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- चतुरबिहारी, टिकरीमाफी किसान
मैंने सोचा था कि पुराने दाम पर खाद लेने गए थे लेकिन जब वहां देखा कि दाम बढ़ गए हैं तो बिना खाद लिए लौट आए। धान बर्बाद हो गया है। अब उधार लेकर खाद लाएंगे या फिर खाद कम लगाएंगे। खेती तो करनी ही है। - लीलाधर, मुड़िया हुलास
मैं 11.30 बजे खाद लेने गया था लेकिन रेट अधिक होने की वजह से लौट आया। धान बारिश में खराब हो गया है। भीगा हुआ धान क्रय केंद्र पर बिक रहा है। मंडी में 1000 रुपये क्विंटल बिक्री है। ऐसे में खाद खरीदने के लिए रुपये नहीं है।
- मोहनस्वरूप, टिकरीमाफी
बाढ़ में धान डूब कर खराब हो गया। जैसा धान निकला उसे शनिवार को मंडी में 650 रुपये क्विंटल बेचना पड़ा। गेहूं और लाही की बुआई करनी थी। खाद चाहिए थी लेकिन इफ्को केंद्र पर खाद की महंगाई देखकर निराश होकर लौटना पड़ा।
- नरेश कुमार, मुड़िया हुलास