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महंगाई की मार फिर मिट्टी के चूल्हों तक ले आई
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गांव नवादा महेश में मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनातीं तारावती। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। गांव की वे महिलाएं, जिन्होंने किसी तरह मिट्टी के चूल्हों से उठते धुएं से निजात पाई थी। गैस चूल्हे पर खाना पकाने लगीं थीं। घरेलू गैस सिलिंडर के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने उन्हें फिर से लकड़ी बटोरकर मिट्टी का चूल्हा फूंकने को मजबूर कर दिया है। चूल्हों से उठता धुआं उनकी आंखों के साथ साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है।
रसोई गैस सिलिंडर के दाम लगातार बढ़ने से निम्न आय वर्ग की कमर टूट गई है। गांव ही नहीं, शहरों में भी कई परिवारों ने सिलिंडर का इस्तेमाल ही छोड़ दिया है। शहर में महिलाओं ने चूल्हे की जगह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का सहारा ले लिया हैं। इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का कहना है कि यह सुरक्षित के साथ कम खर्चीला है। एक महीने में सिलिंडर का जितना खर्च पड़ेगा, उससे काफी कम बिजली का खर्च आता है।
वहीं ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि रसोई गैस के दाम इतने बढ़ गए हैं कि अब उसका खर्च उठाना उनके बस की बात नहीं। ऐसे में मिट्टी का चूल्हा ही बेहतर है। घर का बजट नियंत्रित करने के लिए यह उपाय जरूरी था। चूल्हे को घर के कोने में रख दिया गया है।
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इंडक्शन चूल्हों की बिक्री बढ़ी
इन दिनों इंडक्शन चूल्हों की खरीदारी बढ़ गई है। शहर के एक दुकानदार सोनू महतिया का कहना है कि सिलिंडर के दाम में जैसे-जैसे बढ़ोतरी हो रही है। इन चूल्हों की मांग बढ़ती जा रही है। बताया कि पहले भी इनकी बिक्री होती थी, लेकिन कुछ लोग ही करते थे। अब रोजाना दो से तीन इंडक्शन बिक रहे हैं। इसमें भी ग्रामीण इलाकों के लोग ज्यादा हैं।
घट गई सिलिंडर की खपत
महंगाई के कारण जिले में सिलिंडर की खपत में करीब 30 फीसदी तक कमी आई है। खुद की एजेंसी की बात करें तो पिछले साल 350 सिलिंडर की बिक्री थी, मगर अब 300 के आसपास रह गई है। सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र में कमी आई है। इस समय 917.50 रुपये सिलिंडर की कीमत है। - प्रेम गंगवार इंडेन गैस एजेंसी जाटो चौराहा
महिलाओं ने सरकार को कोसा
शहर के मोहल्ला शेखचांद निवासी गृहिणी निधि अग्रवाल ने बताया कि सिलिंडर से ज्यादा इंडक्शन सस्ता पड़ रहा है। लगातार गैस के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। सब्सिडी भी बंद कर दी गई है। ऐसे में सरकार ने धोखा देने का काम किया है। अगर महंगाई ऐसे ही बढ़ती रही तो सभी को सिलिंडर भूलना पड़ेगा।
शहर के मोहल्ला राजीव कॉलोनी निवासी गृहिणी सुनीता सक्सेना ने बताया कि सिलिंडर की महंगाई को देखते हुए इंडक्शन ही सही साबित हो रहा है। कम खर्च में जल्दी खाना बन जाता है। जबकि सिलिंडर पर महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। सरकार को आमजन मानस के बारे में भी सोचना चाहिए।
गांव नवादा महेश निवासी गृहिणी तारावती ने बताया कि जब गैस का कनेक्शन लिया गया था। तब सिलिंडर छह सौ रुपये में मिल जाता था। अब हर माह सिलिंडर की कीमत बढ़ रही है। इसके लिए सिलिंडर साइड में ही रखना सही समझा।
गांव जादोपुर नत्था निवासी गृहिणी अनीता देवी ने बताया कि आसानी के लिए गैस कनेक्शन कराया था। उस समय पांच सौ रुपये का था। मगर अब नौ से ऊपर का हो गया है। इतनी महंगाई में मिट्टी का चूल्हा ही सही है। इस लिए गैस भराना बंद कर दिया है।
गांव सरैंया निवासी शकुंतला देवी ने बताया कि सरकार ने महिलाओं को धुएं से राहत देने के लिए गैस सिलिंडर तो, बांट दिए। इसके बाद गैस पर इतनी महंगाई होने के कारण सिलिंडर से खाना बनाना मुश्किल हो रहा है। लकड़ी से खाना बनाने में आसानी हो रही है।
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रसोई गैस सिलिंडर के दाम लगातार बढ़ने से निम्न आय वर्ग की कमर टूट गई है। गांव ही नहीं, शहरों में भी कई परिवारों ने सिलिंडर का इस्तेमाल ही छोड़ दिया है। शहर में महिलाओं ने चूल्हे की जगह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का सहारा ले लिया हैं। इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का कहना है कि यह सुरक्षित के साथ कम खर्चीला है। एक महीने में सिलिंडर का जितना खर्च पड़ेगा, उससे काफी कम बिजली का खर्च आता है।
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वहीं ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि रसोई गैस के दाम इतने बढ़ गए हैं कि अब उसका खर्च उठाना उनके बस की बात नहीं। ऐसे में मिट्टी का चूल्हा ही बेहतर है। घर का बजट नियंत्रित करने के लिए यह उपाय जरूरी था। चूल्हे को घर के कोने में रख दिया गया है।
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इंडक्शन चूल्हों की बिक्री बढ़ी
इन दिनों इंडक्शन चूल्हों की खरीदारी बढ़ गई है। शहर के एक दुकानदार सोनू महतिया का कहना है कि सिलिंडर के दाम में जैसे-जैसे बढ़ोतरी हो रही है। इन चूल्हों की मांग बढ़ती जा रही है। बताया कि पहले भी इनकी बिक्री होती थी, लेकिन कुछ लोग ही करते थे। अब रोजाना दो से तीन इंडक्शन बिक रहे हैं। इसमें भी ग्रामीण इलाकों के लोग ज्यादा हैं।
घट गई सिलिंडर की खपत
महंगाई के कारण जिले में सिलिंडर की खपत में करीब 30 फीसदी तक कमी आई है। खुद की एजेंसी की बात करें तो पिछले साल 350 सिलिंडर की बिक्री थी, मगर अब 300 के आसपास रह गई है। सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र में कमी आई है। इस समय 917.50 रुपये सिलिंडर की कीमत है। - प्रेम गंगवार इंडेन गैस एजेंसी जाटो चौराहा
महिलाओं ने सरकार को कोसा
शहर के मोहल्ला शेखचांद निवासी गृहिणी निधि अग्रवाल ने बताया कि सिलिंडर से ज्यादा इंडक्शन सस्ता पड़ रहा है। लगातार गैस के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। सब्सिडी भी बंद कर दी गई है। ऐसे में सरकार ने धोखा देने का काम किया है। अगर महंगाई ऐसे ही बढ़ती रही तो सभी को सिलिंडर भूलना पड़ेगा।
शहर के मोहल्ला राजीव कॉलोनी निवासी गृहिणी सुनीता सक्सेना ने बताया कि सिलिंडर की महंगाई को देखते हुए इंडक्शन ही सही साबित हो रहा है। कम खर्च में जल्दी खाना बन जाता है। जबकि सिलिंडर पर महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। सरकार को आमजन मानस के बारे में भी सोचना चाहिए।
गांव नवादा महेश निवासी गृहिणी तारावती ने बताया कि जब गैस का कनेक्शन लिया गया था। तब सिलिंडर छह सौ रुपये में मिल जाता था। अब हर माह सिलिंडर की कीमत बढ़ रही है। इसके लिए सिलिंडर साइड में ही रखना सही समझा।
गांव जादोपुर नत्था निवासी गृहिणी अनीता देवी ने बताया कि आसानी के लिए गैस कनेक्शन कराया था। उस समय पांच सौ रुपये का था। मगर अब नौ से ऊपर का हो गया है। इतनी महंगाई में मिट्टी का चूल्हा ही सही है। इस लिए गैस भराना बंद कर दिया है।
गांव सरैंया निवासी शकुंतला देवी ने बताया कि सरकार ने महिलाओं को धुएं से राहत देने के लिए गैस सिलिंडर तो, बांट दिए। इसके बाद गैस पर इतनी महंगाई होने के कारण सिलिंडर से खाना बनाना मुश्किल हो रहा है। लकड़ी से खाना बनाने में आसानी हो रही है।