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मुझा, रुदपुर समेत कई गांवों में किसानों ने जलाई पराली
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पूरनपुर के गांव मुझा में खेत में जलाई जा रही पराली।
- फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुक रही है। शनिवार को भी गांव मुझा, रुदपुर समेत आसपास के गांवों में किसानों ने सामूहिक रूप से पराली जलाई। पराली जलाने वालों का तर्क है कि धान की फसल का लागत के अनुसार वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पराली नष्ट करने में भी उनका खर्चा होगा। ऐसे में पराली जलाना उनकी मजबूरी है।
पराली न जलाई जाए इसके लिए फसल अवशेष प्रबंधन को जगह-जगह गोष्ठियां हो रही हैं। अफसर कर्मचारियों की बैठकें लेकर पराली किसी कीमत पर न चलने के निर्देश दे रहे हैं। मगर क्षेत्र में किसान पराली जलाने से नहीं मान रहे हैं। शनिवार को भी गांव मुझा, रुदपुर और इनके आसपास गांव में किसानों ने सामूहिक रूप से पराली जलाई। पराली जलाने वाले किसानों ने बताया कि धान की फसल में अच्छी लागत लगने के बाद उसका वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खरीद केंद्रों पर मानक का धान न होने का तर्क देकर टरका दिया जाता है। राइस मिल मालिक और अन्य खाद्यान्न व्यापारी 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद रहे हैं। अफसर पराली न जलाने का दबाव बना रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है पराली को फसल अवशेष प्रबंधन के तहत नष्ट करें। मगर पराली नष्ट करने में पांच हजार रुपये प्रति एकड़ तक का खर्च आ रहा है। ऐसे में पराली जलाना उनकी मजबूरी है।
पराली क्षेत्र में न जले। इसके लिए किसानों को समझाया जा रहा है। तीन दिन पहले तहसील सभागार में किसानों के साथ बैठक कर पराली न जलाने के निर्देश दिए है। इसके बाद भी कुछ किसान पराली जला रहे है। पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर जुर्माना की वसूली कराई जाएगी।
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- रामस्परूप, एसडीएम
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पराली न जलाई जाए इसके लिए फसल अवशेष प्रबंधन को जगह-जगह गोष्ठियां हो रही हैं। अफसर कर्मचारियों की बैठकें लेकर पराली किसी कीमत पर न चलने के निर्देश दे रहे हैं। मगर क्षेत्र में किसान पराली जलाने से नहीं मान रहे हैं। शनिवार को भी गांव मुझा, रुदपुर और इनके आसपास गांव में किसानों ने सामूहिक रूप से पराली जलाई। पराली जलाने वाले किसानों ने बताया कि धान की फसल में अच्छी लागत लगने के बाद उसका वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खरीद केंद्रों पर मानक का धान न होने का तर्क देकर टरका दिया जाता है। राइस मिल मालिक और अन्य खाद्यान्न व्यापारी 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद रहे हैं। अफसर पराली न जलाने का दबाव बना रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है पराली को फसल अवशेष प्रबंधन के तहत नष्ट करें। मगर पराली नष्ट करने में पांच हजार रुपये प्रति एकड़ तक का खर्च आ रहा है। ऐसे में पराली जलाना उनकी मजबूरी है।
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पराली क्षेत्र में न जले। इसके लिए किसानों को समझाया जा रहा है। तीन दिन पहले तहसील सभागार में किसानों के साथ बैठक कर पराली न जलाने के निर्देश दिए है। इसके बाद भी कुछ किसान पराली जला रहे है। पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर जुर्माना की वसूली कराई जाएगी।
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