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प्रशासन ने केंद्र बढ़ाए मगर आढ़तों पर भीड़, क्रय केंद्र सूने

Sat, 16 Oct 2021 01:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 01:15 AM IST
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पूरनपुर मंडी की आढ़तों पर धान के लगे ढेर। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। एक अक्तूबर को जिले में धान खरीद शुरू हुई। शुरुआती दौरान में 86 केंद्रों पर धान को लेकर तैयारियों की गईं थी। हालांकि बाद में केंद्रों की संख्या बढ़ा दी गई। इस समय प्रशासन की ओर से 141 क्रय केंद्रों संचालित होने की बात कही जा रही है। जबकि 90 क्रय केंद्रों पर ही धान की खरीद हो रही है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार 4332 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी। मंडियों में इन दिनों आढ़तों पर धान की भरमार हो रही जबकि क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है।
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पूरनपुर। धान खरीद केंद्रों पर धान की बिक्री के तय मानकों को लेकर कुछ किसान तमाम झंझटों से बचने को खरीद केंद्रों पर न पहुंचकर व्यापारियों को कम रेट पर मजबूरन धान की बिक्री कर रहे हैं। इसके अलावा खरीद केंद्र पहुंचने वाले अधिकांश किसानों को मानक के अनुरूप धान न होना बताकर टरकाया जा रहा है। गुड़ मंडी में लगाए गए छह खरीद केंद्रों पर अभी तक एक भी खरीद केंद्र पर धान का एक दाना भी नहीं खरीदा गया है। सभी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा है। इसमें तीन खरीद केंद्रों पर तो मात्र बैनर टांगकर छोड़े गए है। इन खरीद केंद्रों पर कोई कमरी तक मौजूद नहीं रहा। अन्य खरीद केंद्रों पर मौजूद मिले कर्मचारियों ने बताया कि उन लोगों के खरीद केंद्र का अब तक कोई टोकन जारी नहीं हुआ है। इससे खरीद शुरू नहीं हा सकी। मंडी समिति लगाए गए खरीद केंद्रों में चार-पांच खरीद केंद्रों पर ही खरीद हो रही है। दूसरी ओर आढ़तों पर धान के ढेर लगे है। राइस मिलों में भी सुबह पांच बजे से धान से भरे वाहनों की लाइनें लगनी शुरू हो जाती है।
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बीसलपुर। मंडी परिसर में लगे पीसीएफ के राजकीय धान क्रय केंद्रों पर 15 दिन बाद भी वारदाना नहीं आ पाया है। इससे साफ जाहिर है कि अधिकारी धान की तौल कराने में कितने गंभीर हैं। पीसीएफ के छह राजकीय धान क्रय केंद्र स्थापित किए गए थे। उसके बाद पीसीएफ का ही एक और राजकीय धान क्रय केंद्र खुल गया था। कुल मिलाकर मंडी परिसर में अकेले पीसीएफ के सात राजकीय धान क्रय केंद्र हो गए हैं। इन केंद्रों पर अन्य सुविधाएं तो सुनिश्चित हैं लेकिन वारदाना अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे इन केंद्रों पर धान की तौल होने की कोई संभावना नहीं है। इससे साफ जाहिर है कि संबंधित अधिकारी राजकीय क्रय केंद्रों पर किसानों का धान तुलवाने में कितनी रुचि रख रहे हैं। यदि इन केंद्रों पर कोई किसान धान लेकर आएगा, तो उसका धान कैसे तुल पाएगा। इस बात का जबाव देने वाला कोई अधिकारी नहीं है। इस बीच प्रशासन, राजस्व, विपणन और सहकारिता विभाग के कई अधिकारियों ने क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिससे पीसीएफ के क्रय केंद्रों पर अभी तक वारदाने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। संबंधित अधिकारियों की हीला हवाली के चलते इन केंद्रों पर यह हालात भविष्य में कब तक बने रहेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। पीसीएफ के केंद्रो पर नियंत्रण रखने वाले सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) करन सिंह ने बताया कि बहुत जल्द मंडी के सातों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगे पीसीएफ के दोनों राजकीय धान केंद्रों पर आवश्यकतानुसार वारदाना उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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सभी 141 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद हो रही है। अभी तक 483 मीट्रिक टन धान की खरीद हो रही है। सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। - महीपाल गंगवार, प्रभारी डिप्टी आरएमओ
जिले में 91 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू हुुई थी। बाद में 50 क्रय केेंद्र और बढ़ाए गए है। हालांकि बाद में बढ़ाए गए केंद्र अभी अपडेट नहीं हो पाए है। दो दिन का अवकाश होने के चलते शनिवार को वह भी क्रय केंद्र शुरू हो जाएंगे। - देवेंद्र प्रताप मिश्रा, नोडल/एडीएम न्यायिक
धान खरीद : 15 दिन में सिर्फ तीन दिन हुई खरीद
प्रशासन भले ही धान खरीद को लेकर अलर्ट हो, मगर हकीकत में सिर्फ तीन दिन ही धान की खरीद हो पाई है। 15 दिन में 12 दिन अवकाश और इंटरनेट बाधित और ई-पॉप मशीन खराब होने में गुजर गए है। नई क्रय नीति से शासन स्तर पर बेहतर धान खरीद का दावा किया जा रहा है। इसके बाद भी जिले में 15 दिन में सिर्फ 4332 क्विंटल धान की खरीद हो सकी।

जिले में एक अक्तूबर से धान की खरीद शुरू हुई थी। पहले दिन ई-पॉप मशीन खराब होने से खरीद शून्य रही। इसके बाद दो दिन अवकाश रहा। बाद में लखीमपुर की घटना को लेकर पांच दिन इंटरनेट बाधित रहने से खरीद नहीं हो सकी। इसके बाद तीन दिन खरीदा होने के बाद फिर दो दिन का अवकाश पड़ गया और धान की खरीद नहीं हो सकी। किसानों के इंतजार करने के बजाय सस्ते में ही धान बेंचने का मन बना लिया है। इससे क्रय केंद्रों पर अवकाश होने के बाद भी किसान औने पौने दाम में धान को बेंच रहे है। जबकि सरकार किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के प्रयास कर रही है। सरकारी मशीनरी में अवकाश का नाम आते ही शासन के निर्देश भी फेल हो जाते है।
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