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स्वयं सहायता समूहों ने लगाई घर में तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी
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पीलीभीत। अब गांव की महिलाएं भी तरक्की की ऊंची उड़ान भरने के इरादे लेकर कारोबार के क्षेत्र में कदम बढ़ा रही हैं। इसकी बानगी गांधी प्रेक्षागृह के सभागार में दिखाई पड़ी। महिलाओं के 40 स्वयं सहायता समूहों ने अपने अलग-अलग उत्पाद दिखाए। उनकी बिक्री हुई। अधिकारियों से लेकर आम आदमी तक ने घर के बने उत्पाद खरीदे। गोबर से बने दीये, जैविक अनाज और आटा, चावल, गुड़, राब से लेकर मोमबत्ती, खिलौने, कपड़े, सेनेट्री पैड आदि लेकर महिला स्वयं सहायता समूह आए थे।
जिलाधिकारी पुलकित खरे की पहल पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए शनिवार को गांधी प्रेक्षागृह में मेला लगाया गया। मेले का समापन रविवार को हुआ। महिलाओं ने बताया कि पीलीभीत शहर में उनको दूसरी बार अपने हाथों से तैयार उत्पाद लोगों के बीच प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लगाई गई इस प्रदर्शनी में जैविक उत्पादों के प्रति शहर के लोगों ने काफी उत्साह दिखाया। महिलाओं ने गोबर से तैयार दीये और मूर्तियों का प्रदर्शन किया। इसे देखने आए आए जिले के गो-सेवा प्रमुख राम सिंह चौहान और सह प्रमुख दिलीप कुमार ने महिला स्वयं सहायता समूह को दस हजार दीये बनाने के लिए आर्डर देने की बात कही। इस पर महिलाओं का कहना है था कि जितने दीये तैयार होंगे उतने देती जाएंगी। महिलाओं ने यह भी बताया कि ऐसा पहली बार हुआ जो इतने सारे लोगों ने उनके हाथ के बने उत्पाद देखे और आर्डर भी दिए हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय आजीविका मिशन के परियोजना अर्थशास्त्री जगदीश चंद्र जोशी ने महिलाओं के अनुभव सुनें। मिशन के जिला प्रबंधक प्रदीप गौतम ने महिलाओं को उत्साहित किया।
मेले में महिलाओं का यह रहा अनुभव
पिलो कवर और मास्क लेकर आई निकहत ने बताया कि मेले में सीडीओ से लेकर आम आदमी तक ने पिलो कवर पसंद किए और खरीदे हैं। खुद के हाथों बने उत्पाद की बिकी होने से वह उत्साहित हैं।
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अमरिया क्षेत्र से आई प्रेमलता ने बताया कि स्वयं सहायता समूह उन्हें अपने पैरों पर आर्थिक रूप से खड़े होने के लिए प्रेरित करते हैं। हम अपने गांव में ही उत्पाद बनाकर अब बाहर तक बेच रहे हैं।
गीता गंगवार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के मेले में आने से मुझे तमाम महिलाओं से मिलने और उनके काम काज को समझने का मौका मिला। यही अनुभव मेरे समूह के काम आएगा।
सत्यवती ने बताया कि कुछ नया करने और आगे बढ़ने का अवसर इस मेले ने दिया। हम उत्साहित हैं और आने वाले समय में दूसरी महिलाएं भी हमसे प्रेरित होकर आगे बढ़ेंगी तो अच्छा लगेगा।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से मेले के अनुभव सुनते परियोजना अर्थशास्त्री जगदीश चंद्र जोशी।
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जिलाधिकारी पुलकित खरे की पहल पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए शनिवार को गांधी प्रेक्षागृह में मेला लगाया गया। मेले का समापन रविवार को हुआ। महिलाओं ने बताया कि पीलीभीत शहर में उनको दूसरी बार अपने हाथों से तैयार उत्पाद लोगों के बीच प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लगाई गई इस प्रदर्शनी में जैविक उत्पादों के प्रति शहर के लोगों ने काफी उत्साह दिखाया। महिलाओं ने गोबर से तैयार दीये और मूर्तियों का प्रदर्शन किया। इसे देखने आए आए जिले के गो-सेवा प्रमुख राम सिंह चौहान और सह प्रमुख दिलीप कुमार ने महिला स्वयं सहायता समूह को दस हजार दीये बनाने के लिए आर्डर देने की बात कही। इस पर महिलाओं का कहना है था कि जितने दीये तैयार होंगे उतने देती जाएंगी। महिलाओं ने यह भी बताया कि ऐसा पहली बार हुआ जो इतने सारे लोगों ने उनके हाथ के बने उत्पाद देखे और आर्डर भी दिए हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय आजीविका मिशन के परियोजना अर्थशास्त्री जगदीश चंद्र जोशी ने महिलाओं के अनुभव सुनें। मिशन के जिला प्रबंधक प्रदीप गौतम ने महिलाओं को उत्साहित किया।
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मेले में महिलाओं का यह रहा अनुभव
पिलो कवर और मास्क लेकर आई निकहत ने बताया कि मेले में सीडीओ से लेकर आम आदमी तक ने पिलो कवर पसंद किए और खरीदे हैं। खुद के हाथों बने उत्पाद की बिकी होने से वह उत्साहित हैं।
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अमरिया क्षेत्र से आई प्रेमलता ने बताया कि स्वयं सहायता समूह उन्हें अपने पैरों पर आर्थिक रूप से खड़े होने के लिए प्रेरित करते हैं। हम अपने गांव में ही उत्पाद बनाकर अब बाहर तक बेच रहे हैं।
गीता गंगवार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के मेले में आने से मुझे तमाम महिलाओं से मिलने और उनके काम काज को समझने का मौका मिला। यही अनुभव मेरे समूह के काम आएगा।
सत्यवती ने बताया कि कुछ नया करने और आगे बढ़ने का अवसर इस मेले ने दिया। हम उत्साहित हैं और आने वाले समय में दूसरी महिलाएं भी हमसे प्रेरित होकर आगे बढ़ेंगी तो अच्छा लगेगा।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से मेले के अनुभव सुनते परियोजना अर्थशास्त्री जगदीश चंद्र जोशी।