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तराई की हसीन वादियों को पर्यटकों का इंतजार
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पीटीआर के चूका बीच का मनोहारी दृश्य। फाइल फोटो।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। दुधवा नेशनल पार्क और जिम कार्बेट की तुलना में पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का क्षेत्रफल भले छोटा हो, लेकिन यहां पर्यटर की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत पर्याप्त प्रचार-प्रसार की है। इसके लिए अब तक जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं की गई और न ही शासन स्तर से अहम कदम उठाए गए। यही कारण है कि 13 देशों के टाइगर रिजर्व को पछाड़कर बाघों की वंश वृद्धि के मामले में पहले स्थान पर आया पीटीआर अब तक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र नहीं बन सका।
दुधवा और जिम कार्बेट की तुलना में पीटीआर में पर्यटक बहुत कम आते हैं। उत्तराखंड और यूपी के फॉरेस्ट व वाइल्ड लाइफ के अधिकारी और पर्यटन विभाग से समन्वय स्थापित करके कार्ययोजना बनाएं और उस पर अमल हो जाए तो इकोटूरिज्म का एक नया सर्किट विकसित हो जाएगा। यह सर्किट उत्तराखंड के ईस्ट तराई फॉरेस्ट डिवीजन से शुरू होगा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व होते हुए लखीमपुर के दुधवा टाइगर रिजर्व और जिला बहराइच कर्तनिया घाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी तक फैले हुए वन क्षेत्र का सफर कराएगा। साथ ही जैव विविधता के साथ वन्य जीवों की विभिन्न प्रजातियों से रूबरू कराते हुए नेपाल की ओर ले जाएगा। इसके आगे नेपाल के रॉयल शुक्ला फाटा नेशनल पार्क तक सफर होगा। टनकपुर के निकट तराई फॉरेस्ट डिवीजन से आप पर्यटन सफर शुरू करते हैं चार से पांच दिन में 300 किलोमीटर का सफर करेंगे और वन्य जीव-जंतुओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और धर्म से जुड़े पौराणिक स्थलों का दर्शन करेंगे। प्रकृति के अनूठे नजारे भी अपने कैमरे में कैद कर पाएंगे।
पर्यटन बढ़ा तो यूपी के साथ उत्तराखंड को भी मिलेगा लाभ : अगर शासन गंभीर हो जाए तो पीलीभीत और लखीमपुर खीरी होते हुए नेपाल तक पर्यटन और उससे जुड़ी सेवाओं का विस्तार हो जाएगा। पर्यटन सर्किट बनाने के बाद लोगों का पर्यटन कराने वाली संस्थाओं के साथ शासन प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हो ताकि देश और प्रदेश की राजधानी के बड़े होटलों और पर्यटन केंद्रों में प्रचार-प्रसार किया जा सके। अगर सरकारी स्तर से ऐसी कोई पहल की जाती है तो इसका लाभ न केवल पीलीभीत को मिलेगा बल्कि यूपी और उत्तराखंड के प्रमुख स्थल भी पर्यटन के मानचित्र पर उभरेंगे। लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। प्रकृति और पर्यावरण के साथ लोगों का जुड़ाव भी बढ़ेगा। ब्यूरो
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जिले में ये हैं पर्यटक स्थल
चूका बीच है आकर्षण का केंद्र : प्राकृतिक नजारों के साथ अगर उत्तराखंड से सफर शुरू करते हैं तो सबसे पहले खटीमा- सितारगंज रोड पर देवहा नदी के किनारे स्थापित नानकमता गुरुद्वारा देख सकेंगे। शारदा सागर डैम के किनारे एक पर्यटन केंद्र के रूप में चूका बीच का विकास किया गया है। शारदा सागर जलाशय की लंबाई 22 किलोमीटर और चौड़ाई 3 से 5 किलोमीटर है। इतने बड़े जल क्षेत्र के किनारे स्थित होने के कारण यह पूरा इलाका चूका बीच जैसा दिखता है। हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने चूका बीच देखने के बाद इसके महत्व को अपने हास्य के जरिए कुछ इस तरह से बताया- ऐ भाई जिसने नहीं देखा चूका, वो भाई जिंदगी से चूका।
नहरों के बाइफरकेशन से बनता है सुंदर नजारा : अंग्रेजी शासन में तैयार किया गया नहरों का नेटवर्क पीलीभीत जिले की पहचान है। कलीनगर तहसील के महोफ रेंज और बराही रेंज के जंगलों के बीच में चार नहरें गुजरती हैं। नहरों का बाइफरकेशन यहां देखने लायक है।
पौराणिक और ऐतिहासिक हैं पीलीभीत के धार्मिक स्थल : पीलीभीत के गौरी शंकर मंदिर का शिवलिंग पौराणिक काल का है। जामा मस्जिद तो दिल्ली की जामा मस्जिद की तर्ज पर ही बनी है। बाहर से आने वाले पर्यटक इन्हें देखना पसंद करते हैं। पर्यटन सर्किट बनता है तो इन दोनों स्थलों पर आने वालों की संख्या भी बढ़ेगी।
गोमती का उद्गम स्थल बन रहा नया पर्यटक स्थल
अभी तक आमतौर पर चूका बीच और टाइगर रिजर्व ही पर्यटक स्थल हुआ करते थे, लेकिन अब
माधोटांडा में गोमती नदी का उद्गम स्थल एक नए पर्यटक स्थल के रूप में उभारा जा रहा है। इसके लिए अधिकारी प्रयासरत हैं।
सबसे बड़ा कच्चा डैम है शारदा सागर
शारदा सागर डैम प्रदेश का सबसे बड़ा कच्चा डैम है। यह एक ऐसा डैम है। जो नहर से भरा जाता है। नहर के जरिए खाली किया जाता है। वाटर स्पोटर्स और नौका विहार कराया जाए तो नैनीताल की नैनी झील की तरह यहां पर भी पर्यटक आएंगे। फिलहाल वाटर हट और मोटर बोट की सुविधा है। शारदा नदी में शुरू हो सकती है वॉटर रॉफ्टिंग : शारदा नदी में रॉफ्टिंग की जा सकती है। इसकी शुरूआत टनकपुर से हो सकती है। टनकपुर में बनबसा बैराज और टनकपुर बैराज है। दोनों पर्यटकों को आकर्षित करने वाले स्थान बन सकते हैं।कर्तनिया घाट से घाघरा नदी गुजरती है, जहां डॉल्फिन भी देखने को मिलती है।
टाइगर रिजर्व में हैं 65 बाघ
तराई के पीलीभीत जनपद के जंगलों में बाघ तो वर्षों से हैं पर 09 जून 2014 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व बना थाु। तब की गणना में 25 टाइगर थे। वर्ष 2018 की गणना का परिणाम 2020 में घोषित किया गया। इसमें यहां 65 टाइगर पाए गए। बाघों की वृद्धि के मामले में पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने भारत, नेपाल, भूटान, मलेशिया, श्रीलंका, रूस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि देशों को भी पीछे छोड़ा है।
पर्यटन से अछूती है देवहा नदी
देवहा नदी के नाम से पहचानी जाने वाली नदी के किनारे नानकमता में नानक सागर डैम बना हुआ है। पीलीभीत में यह नदी रोडवेज के पास से होकर गुजरती है। नदी के आसपास नगर का कूड़ा फेका जा रहा है। इससे जाहिर है कि शासन प्रशासन पीलीभीत को पर्यटन के लिए विकसित करने पर कितना गंभीर है।
टाइगर रिजर्व में घड़ियाल और मगरमच्छ भी देखिए
पीलीभीत के टाइगर रिजर्व में टाइगर और तेंदुए के साथ दुधवा टाइगर रिजर्व में हाथी और गेंडा, टाइगर और लैपर्ड देख पाएंगे। इसके अलावा ऊद बिलाव, घड़ियाल दोनों स्थानों पर देख सकते हैं। चिड़ियों की 500 प्रजातियां दोनों जगह देख सकते हैं। तितलियां इतनी तरह की हैं कि आप गणना नहीं कर पाएंगे। जलीय जंतुओं में मगर मच्छ और कछुआ भी है। कछुआ की 12 प्रजातियां यहां हैं। इसमें से आठ प्रजातियां शेड्यूल वन में हैं। कर्तनिया घाट में डॉल्फिन देखने को मिलती है।
बर्ड वॉचिंग के लिए लकड़ी के पांच टॉवर बने
टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने कहा कि चूका बीच मुख्य आकर्षण केंद्र है। बर्ड वॉचिंग के लिए पांच वॉच टॉवर अलग-अलग लोकेशन पर बनाए गए हैं। पर्यटकों के ठहरने के लिए बंबू हट तो पहले से हैं लेकिन इस बार एक ओवर वाटर हट भी बनाई गई है। इसकी बुकिंग 20 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। हट में एक साथ दो से तीन लोग रुक सकते हैं। बंबू हट और ट्री हट तो पहले से हैं जहां पर्यटक ठहरते हैं। हट के लिए वन निगम से ऑनलाइन बुकिंग कराई जा सकेगी। चूका में दो नए द्वार बनाए गए हैं। ताकि पर्यटकों का आकर्षण बढ़े। चूका बीच में थ्रीडी फिल्म के जरिए प्रकृति के नजारे दिखाने की भी तैयारी है। चूका हट और टाइगर रिजर्व वैसे पहली तारीख से खोलने की तैयारी है लेकिन अभी आदेश नहीं आए हैं।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
इको टूरिज्म के लिए पीलीभीत में काफी गुंजाइश है। उत्तराखंड और यूपी के स्थानों को जोड़ते हुए अगर कोई इको टूरिज्म का नया सर्किट विकसित किया जाए तो बहुत अच्छा रहेगा। मेरी ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पुलकित खरे, डीएम
पीटीआर की जानकारी तो रेलवे स्टेशन पर पर्यटकों को मिल जाती, लेकिन सभी पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थलों की जानकारी नहीं मिल पाती है। इसलिए ऐसे बोर्ड रेलवे स्टेशन पर लगवाए जाएं जो पूरे पीलीभीत को पर्यटन महत्व वाले स्थानों की तस्वीरें दिखाएं और जानकारी उपलब्ध कराएं। क्योंकि जिले में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। - लक्ष्मी कांत शर्मा, पर्यटन क्षेत्र के जानकार
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दुधवा और जिम कार्बेट की तुलना में पीटीआर में पर्यटक बहुत कम आते हैं। उत्तराखंड और यूपी के फॉरेस्ट व वाइल्ड लाइफ के अधिकारी और पर्यटन विभाग से समन्वय स्थापित करके कार्ययोजना बनाएं और उस पर अमल हो जाए तो इकोटूरिज्म का एक नया सर्किट विकसित हो जाएगा। यह सर्किट उत्तराखंड के ईस्ट तराई फॉरेस्ट डिवीजन से शुरू होगा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व होते हुए लखीमपुर के दुधवा टाइगर रिजर्व और जिला बहराइच कर्तनिया घाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी तक फैले हुए वन क्षेत्र का सफर कराएगा। साथ ही जैव विविधता के साथ वन्य जीवों की विभिन्न प्रजातियों से रूबरू कराते हुए नेपाल की ओर ले जाएगा। इसके आगे नेपाल के रॉयल शुक्ला फाटा नेशनल पार्क तक सफर होगा। टनकपुर के निकट तराई फॉरेस्ट डिवीजन से आप पर्यटन सफर शुरू करते हैं चार से पांच दिन में 300 किलोमीटर का सफर करेंगे और वन्य जीव-जंतुओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और धर्म से जुड़े पौराणिक स्थलों का दर्शन करेंगे। प्रकृति के अनूठे नजारे भी अपने कैमरे में कैद कर पाएंगे।
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पर्यटन बढ़ा तो यूपी के साथ उत्तराखंड को भी मिलेगा लाभ : अगर शासन गंभीर हो जाए तो पीलीभीत और लखीमपुर खीरी होते हुए नेपाल तक पर्यटन और उससे जुड़ी सेवाओं का विस्तार हो जाएगा। पर्यटन सर्किट बनाने के बाद लोगों का पर्यटन कराने वाली संस्थाओं के साथ शासन प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हो ताकि देश और प्रदेश की राजधानी के बड़े होटलों और पर्यटन केंद्रों में प्रचार-प्रसार किया जा सके। अगर सरकारी स्तर से ऐसी कोई पहल की जाती है तो इसका लाभ न केवल पीलीभीत को मिलेगा बल्कि यूपी और उत्तराखंड के प्रमुख स्थल भी पर्यटन के मानचित्र पर उभरेंगे। लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। प्रकृति और पर्यावरण के साथ लोगों का जुड़ाव भी बढ़ेगा। ब्यूरो
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जिले में ये हैं पर्यटक स्थल
चूका बीच है आकर्षण का केंद्र : प्राकृतिक नजारों के साथ अगर उत्तराखंड से सफर शुरू करते हैं तो सबसे पहले खटीमा- सितारगंज रोड पर देवहा नदी के किनारे स्थापित नानकमता गुरुद्वारा देख सकेंगे। शारदा सागर डैम के किनारे एक पर्यटन केंद्र के रूप में चूका बीच का विकास किया गया है। शारदा सागर जलाशय की लंबाई 22 किलोमीटर और चौड़ाई 3 से 5 किलोमीटर है। इतने बड़े जल क्षेत्र के किनारे स्थित होने के कारण यह पूरा इलाका चूका बीच जैसा दिखता है। हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने चूका बीच देखने के बाद इसके महत्व को अपने हास्य के जरिए कुछ इस तरह से बताया- ऐ भाई जिसने नहीं देखा चूका, वो भाई जिंदगी से चूका।
नहरों के बाइफरकेशन से बनता है सुंदर नजारा : अंग्रेजी शासन में तैयार किया गया नहरों का नेटवर्क पीलीभीत जिले की पहचान है। कलीनगर तहसील के महोफ रेंज और बराही रेंज के जंगलों के बीच में चार नहरें गुजरती हैं। नहरों का बाइफरकेशन यहां देखने लायक है।
पौराणिक और ऐतिहासिक हैं पीलीभीत के धार्मिक स्थल : पीलीभीत के गौरी शंकर मंदिर का शिवलिंग पौराणिक काल का है। जामा मस्जिद तो दिल्ली की जामा मस्जिद की तर्ज पर ही बनी है। बाहर से आने वाले पर्यटक इन्हें देखना पसंद करते हैं। पर्यटन सर्किट बनता है तो इन दोनों स्थलों पर आने वालों की संख्या भी बढ़ेगी।
गोमती का उद्गम स्थल बन रहा नया पर्यटक स्थल
अभी तक आमतौर पर चूका बीच और टाइगर रिजर्व ही पर्यटक स्थल हुआ करते थे, लेकिन अब
माधोटांडा में गोमती नदी का उद्गम स्थल एक नए पर्यटक स्थल के रूप में उभारा जा रहा है। इसके लिए अधिकारी प्रयासरत हैं।
सबसे बड़ा कच्चा डैम है शारदा सागर
शारदा सागर डैम प्रदेश का सबसे बड़ा कच्चा डैम है। यह एक ऐसा डैम है। जो नहर से भरा जाता है। नहर के जरिए खाली किया जाता है। वाटर स्पोटर्स और नौका विहार कराया जाए तो नैनीताल की नैनी झील की तरह यहां पर भी पर्यटक आएंगे। फिलहाल वाटर हट और मोटर बोट की सुविधा है। शारदा नदी में शुरू हो सकती है वॉटर रॉफ्टिंग : शारदा नदी में रॉफ्टिंग की जा सकती है। इसकी शुरूआत टनकपुर से हो सकती है। टनकपुर में बनबसा बैराज और टनकपुर बैराज है। दोनों पर्यटकों को आकर्षित करने वाले स्थान बन सकते हैं।कर्तनिया घाट से घाघरा नदी गुजरती है, जहां डॉल्फिन भी देखने को मिलती है।
टाइगर रिजर्व में हैं 65 बाघ
तराई के पीलीभीत जनपद के जंगलों में बाघ तो वर्षों से हैं पर 09 जून 2014 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व बना थाु। तब की गणना में 25 टाइगर थे। वर्ष 2018 की गणना का परिणाम 2020 में घोषित किया गया। इसमें यहां 65 टाइगर पाए गए। बाघों की वृद्धि के मामले में पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने भारत, नेपाल, भूटान, मलेशिया, श्रीलंका, रूस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि देशों को भी पीछे छोड़ा है।
पर्यटन से अछूती है देवहा नदी
देवहा नदी के नाम से पहचानी जाने वाली नदी के किनारे नानकमता में नानक सागर डैम बना हुआ है। पीलीभीत में यह नदी रोडवेज के पास से होकर गुजरती है। नदी के आसपास नगर का कूड़ा फेका जा रहा है। इससे जाहिर है कि शासन प्रशासन पीलीभीत को पर्यटन के लिए विकसित करने पर कितना गंभीर है।
टाइगर रिजर्व में घड़ियाल और मगरमच्छ भी देखिए
पीलीभीत के टाइगर रिजर्व में टाइगर और तेंदुए के साथ दुधवा टाइगर रिजर्व में हाथी और गेंडा, टाइगर और लैपर्ड देख पाएंगे। इसके अलावा ऊद बिलाव, घड़ियाल दोनों स्थानों पर देख सकते हैं। चिड़ियों की 500 प्रजातियां दोनों जगह देख सकते हैं। तितलियां इतनी तरह की हैं कि आप गणना नहीं कर पाएंगे। जलीय जंतुओं में मगर मच्छ और कछुआ भी है। कछुआ की 12 प्रजातियां यहां हैं। इसमें से आठ प्रजातियां शेड्यूल वन में हैं। कर्तनिया घाट में डॉल्फिन देखने को मिलती है।
बर्ड वॉचिंग के लिए लकड़ी के पांच टॉवर बने
टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने कहा कि चूका बीच मुख्य आकर्षण केंद्र है। बर्ड वॉचिंग के लिए पांच वॉच टॉवर अलग-अलग लोकेशन पर बनाए गए हैं। पर्यटकों के ठहरने के लिए बंबू हट तो पहले से हैं लेकिन इस बार एक ओवर वाटर हट भी बनाई गई है। इसकी बुकिंग 20 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। हट में एक साथ दो से तीन लोग रुक सकते हैं। बंबू हट और ट्री हट तो पहले से हैं जहां पर्यटक ठहरते हैं। हट के लिए वन निगम से ऑनलाइन बुकिंग कराई जा सकेगी। चूका में दो नए द्वार बनाए गए हैं। ताकि पर्यटकों का आकर्षण बढ़े। चूका बीच में थ्रीडी फिल्म के जरिए प्रकृति के नजारे दिखाने की भी तैयारी है। चूका हट और टाइगर रिजर्व वैसे पहली तारीख से खोलने की तैयारी है लेकिन अभी आदेश नहीं आए हैं।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
इको टूरिज्म के लिए पीलीभीत में काफी गुंजाइश है। उत्तराखंड और यूपी के स्थानों को जोड़ते हुए अगर कोई इको टूरिज्म का नया सर्किट विकसित किया जाए तो बहुत अच्छा रहेगा। मेरी ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पुलकित खरे, डीएम
पीटीआर की जानकारी तो रेलवे स्टेशन पर पर्यटकों को मिल जाती, लेकिन सभी पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थलों की जानकारी नहीं मिल पाती है। इसलिए ऐसे बोर्ड रेलवे स्टेशन पर लगवाए जाएं जो पूरे पीलीभीत को पर्यटन महत्व वाले स्थानों की तस्वीरें दिखाएं और जानकारी उपलब्ध कराएं। क्योंकि जिले में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। - लक्ष्मी कांत शर्मा, पर्यटन क्षेत्र के जानकार