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वरुण गांधी को दिखाए काले झंडे
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पीलीभीत के पूरनपुर में मोहनपुर चौराहे पर सांसद को काले झंडे दिखाते किसान और उन्हें रोकती पुलिस।
- फोटो : PILIBHIT
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पूरनपुर (पीलीभीत)। कृषि कानूनों के विरोध में सांसद वरुण गांधी को काले झंडे दिखाने के लिए किसान करीब पांच घंटे तक असम हाईवे पर जमे रहे। सांसद ने रास्ता बदलकर जाने की कोशिश की तो किसान भड़क गए। इस दौरान किसानों ने जमकर हंगामा किया और पुलिस ने नोकझोंक हुई। रास्ता बदलने का पता लगने पर किसानों ने नौ किमी दूर मोहनापुर चौराहे पर जाकर काले झंडे दिखाए। हंगामे के चलते मोहनापुर चौराहा पर करीब एक घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
राष्ट्रीय किसान मजूदर संगठन और अन्नदाता किसान यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे असम हाईवे स्थित बंडा चौराहे पर जमा हुए। उनका इरादा कृषि कानून के विरोध में सांसद वरुण गांधी को काले झंडे दिखाने का था। इसका पता लगने पर सीओ वीरेंद्र विक्रम व प्रशांत पुलिस और पीएसी के साथ बंडा चौराहे पर जा पहुंचे। पूर्वाह्न करीब 11 बजे तक किसान काले झंड लहराकर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे। सीओ ने काले झंडे दिखाने के बजाय सांसद से वार्ता करने के लिए किसानों को राजी कर लिया। वार्ता में केवल 10 किसानों को शामिल होना था, जिनकी सूची पुलिस को सौंप दी गई थी। पौने 12 बजे सूची में शामिल किसानों को सांसद से कराने की कहकर गाड़ियों में बैठा लिया गया। सांसद के काफिले में शामिल कई गाड़ियों के असम हाईवे से खुटार की ओर जाते देखा गया।
उसी समय किसानों को सांसद के रास्ता बदलकर सभा करने के लिए जाने का पता चला। इस पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। सवा बारह बजे किसान सांसद को काले झंडे दिखाने की चेतावनी देकर गांव मोहनपुर चौराहा की ओर चल दिए। उस वक्त सांसद सबलपुर से गांव मोहनपुर में सभा करने जा रहे थे। तभी मोहनपुर चौराहे पर पहुंचे किसानों सांसद को काले झंडे दिखाए। किसानों ने सांसद के काफिले में शामिल कुछ गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। इसको लेकर उनकी कई बार सीओ से नोकझोंक हुई। किसानों के हंगामे के चलते करीब एक घंटे तक मोहनपुर चौराहा पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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आपस में भिड़े प्रदर्शनकारी किसान
सीओ के आश्वासन पर 10 लोगों के नाम सांसद से वार्ता के लिए दिए गए थे। इन नामों पर कुछ किसनों की सहमति नहीं थी। उनका कहना था कि सांसद निकलते समय उनकी बात सुने तब कोई काला झंडा नहीं दिखाएगा। सांसद बात करने के लिए तैयार नहीं होंगे तब काले झंडे दिखाए जाएंगे। सांसद के रास्ता बदलकर निकलने का पता चलने पर किसानों के बीच आपस में नोकझोंक होने लगी।
नजरबंद रहे किसान नेता, कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे
किसानों के सांसद को काले झंडे दिखाने की जानकारी बृहस्पतिवार रात को ही लग गई थी। इससे पुलिस, प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। अन्नदाता किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मनप्रीत सिंह, प्रदेश महासचिव बलजिंदर सिंह, तहसील संगठन मंत्री सतनाम सिंह और करमवीर सिंह को उनके घरों में रात साढ़े 11 बजे से नजरबंद कर पुलिस का पहरा लगा दिया गया था।
काले झंडे दिखाने वालों को हिरासत में लेने की कोशिश
मोहनपुर चौराहा पर सांसद के काफिले को काले झंडे दिखाने पर पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को अपनी गिरफ्त में लेने का प्रयास किया। ताकि सांसद को काले झंडे न दिखाए जा सके। इसको लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस की कई बार नोकझोंक और धक्का मुक्की हुई।
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राष्ट्रीय किसान मजूदर संगठन और अन्नदाता किसान यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे असम हाईवे स्थित बंडा चौराहे पर जमा हुए। उनका इरादा कृषि कानून के विरोध में सांसद वरुण गांधी को काले झंडे दिखाने का था। इसका पता लगने पर सीओ वीरेंद्र विक्रम व प्रशांत पुलिस और पीएसी के साथ बंडा चौराहे पर जा पहुंचे। पूर्वाह्न करीब 11 बजे तक किसान काले झंड लहराकर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे। सीओ ने काले झंडे दिखाने के बजाय सांसद से वार्ता करने के लिए किसानों को राजी कर लिया। वार्ता में केवल 10 किसानों को शामिल होना था, जिनकी सूची पुलिस को सौंप दी गई थी। पौने 12 बजे सूची में शामिल किसानों को सांसद से कराने की कहकर गाड़ियों में बैठा लिया गया। सांसद के काफिले में शामिल कई गाड़ियों के असम हाईवे से खुटार की ओर जाते देखा गया।
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उसी समय किसानों को सांसद के रास्ता बदलकर सभा करने के लिए जाने का पता चला। इस पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। सवा बारह बजे किसान सांसद को काले झंडे दिखाने की चेतावनी देकर गांव मोहनपुर चौराहा की ओर चल दिए। उस वक्त सांसद सबलपुर से गांव मोहनपुर में सभा करने जा रहे थे। तभी मोहनपुर चौराहे पर पहुंचे किसानों सांसद को काले झंडे दिखाए। किसानों ने सांसद के काफिले में शामिल कुछ गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। इसको लेकर उनकी कई बार सीओ से नोकझोंक हुई। किसानों के हंगामे के चलते करीब एक घंटे तक मोहनपुर चौराहा पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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आपस में भिड़े प्रदर्शनकारी किसान
सीओ के आश्वासन पर 10 लोगों के नाम सांसद से वार्ता के लिए दिए गए थे। इन नामों पर कुछ किसनों की सहमति नहीं थी। उनका कहना था कि सांसद निकलते समय उनकी बात सुने तब कोई काला झंडा नहीं दिखाएगा। सांसद बात करने के लिए तैयार नहीं होंगे तब काले झंडे दिखाए जाएंगे। सांसद के रास्ता बदलकर निकलने का पता चलने पर किसानों के बीच आपस में नोकझोंक होने लगी।
नजरबंद रहे किसान नेता, कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे
किसानों के सांसद को काले झंडे दिखाने की जानकारी बृहस्पतिवार रात को ही लग गई थी। इससे पुलिस, प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। अन्नदाता किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मनप्रीत सिंह, प्रदेश महासचिव बलजिंदर सिंह, तहसील संगठन मंत्री सतनाम सिंह और करमवीर सिंह को उनके घरों में रात साढ़े 11 बजे से नजरबंद कर पुलिस का पहरा लगा दिया गया था।
काले झंडे दिखाने वालों को हिरासत में लेने की कोशिश
मोहनपुर चौराहा पर सांसद के काफिले को काले झंडे दिखाने पर पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को अपनी गिरफ्त में लेने का प्रयास किया। ताकि सांसद को काले झंडे न दिखाए जा सके। इसको लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस की कई बार नोकझोंक और धक्का मुक्की हुई।