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सम्मान निधि पाने को भटक रहे किसान

Wed, 01 Sep 2021 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 01:54 AM IST
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पीलीभीत। तमाम ग्रामीण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने के लिए भटक रहे हैं। अफसर और संबंधित कर्मचारी किसानों को आश्वासन देकर लौटा देते हैं। साथ ही सम्मान निधि सबको दिए जाने का दाबा किया जा रहा है।
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फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत हुई थी। एक साल में छह हजार रुपये तीन किश्तों में किसानों के खाते में भेजे जाते हैं। इसकी जिम्मेदारी कृषि विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें किसान के नाम कृषि भूमि पर उसे पात्रता सूची में शामिल किया जाता है। कृषि विभाग की ओर से करीब साढ़े तीन लाख किसानों को सम्मान निधि भेजी जा रही है। मगर जिम्मेदारों को यह भी नहीं पता कि यह किसान पात्र है या अपात्र। ऐसे में जो पात्र किसान हैं, उनको सम्मान निधि की धनराशि नहीं मिली है। ऐसे किसान सम्मान निधि पाने को इधर-उधर भटक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय पहुंचने पर उनको निराशा ही हाथ लगती है। मगर जिम्मेदार उनको सही से बताने को भी तैयार नहीं होते। मजबूरन किसान जनसुविधा केंद्रों पर जाकर जानकारी करते हैं। इससे उनको धनराशि मिलने के बजाय जेब से खर्च करनी पड़ती है।
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सत्यापन में 49056 किसान अपात्र
कृषि विभाग के अभिलेखों के अनुसार 341213 किसानों को सम्मान निधि देनी है। इनमें नवीं किस्त के लिए 292197 किसानों का डाटा जनपद स्तर से डाटा डिजिटल सिग्नेचर करने के बाद शासन को भेज दिया गया है। जबकि 49056 किसान सत्यापन में अपात्र पाए गए हैं। हालांकि हजारों की संख्या में ऐसे किसान हैं जो रोजाना त्रुटि ठीक कराने के लिए कृषि विभाग या फिर जनसेवा केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनकी कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है।
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विभाग को ही नहीं पता किसको मिल रही निधि
खास बात यह है कि कितने किसानों के खाते में सम्मान निधि पहुंची और कितनों में नहीं। कितनों को कौन सी किस्त मिली और कितनों को नियमानुसार मिल रहीं है। इसका कोई रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। न ही सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। जिससे अफसर भी परेशान हैं। विभाग अभी तक यह भी नहीं पता लगा सका कि कौन पात्र हैं और कौन अपात्र। बस हर बार डाटा डिजिटल सिग्नेचर करने के बाद शासन को पत्रावली भेज दी जाती है।
मात्र एक बीघा जमीन है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए तीन बार रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पहले आधार ठीक कराया। दोबारा में खाता ठीक कराया। मगर आज तक कोई पैसा उनके खाते में नहीं आया। - सगीर अहमद, किसान
फरवरी 2019 को रजिस्ट्रेशन कराया था। कई बार कृषि बीज भंडार अमरिया पहुंचकर खाते में एक भी पैसा ना पहुंचने के बारे में जानकारी की। बताया गया आपका खाता एक्टिवेट है जांच चल रही है। तीन साल हो चुके है। अभी जांच पूरी नहीं हुई। - अमीर अहमद किसान
किसान सम्मान निधि के लिए 17 फरवरी 2019 को कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया था। 22 बीघा जमीन होने पर पात्र की श्रेणी में बताया जाता है। इसके बाद भी आज तक मेरा खाता पेंडिंग दिखा रहा है। - रईस अहमद किसान
योजना शुरू हुई थी तभी किसान सम्मान निधि के लिए कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया था। किस्त नहीं आने पर जब जारी की, तो अधिकारियों ने बताया कि खाता पेंडिंग दिखा रहा है। इसके बाद भी किस्त खाते में नहीं पहुंची है। - लीलावती किसान
पिछले दो सालों से कई जन सुविधा केंद्रों पर ऑनलाइन करा चुके हैं। लेकिन हर बार उन का ऑनलाइन किया फार्म रिजेक्ट हो जाता है। वह अपनी समस्या को लेकर कई बार कृषि विभाग के अधिकारियों के पास गए। आज तक समाधान नहीं हुआ। -अहमद नूर, किसान
किसान सम्मान निधि की कुछ किस्ते खातें में आई। मगर आखिर की दो किस्ते अभी खाते में नहीं पहुंची है। बरसात के महीने में किसानों को इस समय खाद, कीटनाशक, सिंचाई करने की जरुरत है। सम्मान निधि न आने से उसका इंतजार किया जा रहा है। - रमेश चंद्र मिश्र, भाकियू नेता
पिता के देहांत के बाद मां नत्थो देवी के वसीयत में जमीन नाम आ गई। मां का भी तीन, चार महीने पहले देहांत हो गया। विरासत में जमीन उसके नाम आनी है। शुरू से ही मां के नाम किसान निधि की धनराशि खाते में नहीं आई। - शंकरलाल, किसान
पिछले लंबे समय से विभाग के चक्कर लगा रहे है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। जानकारी करने बताया जाता है कि अभी साइड बंद है। घर जाओ जल्द ही किस्त आ जाएगी। - मृणाल राय, किसान

अपात्र किसानों को लगातार सम्मान निधि किसानों के खातों में जा रही है। कुछ किसानों के आवेदन के दौरान त्रुटि होने पर धनराशि खाते में नहीं आई है। करीब 49 हजार अपात्र का सत्यापन कराया जा रहा है। शासन की ओर से 1644 अपात्रों की सूची आई है। सम्मान निधि के लिए जमीन की कोई बाध्यता नहीं है। - डॉ. वीके यादव, जिला कृषि अधिकारी
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