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लुधियाना से बिहार जा रहीं बसों को सीज किया तो 180 यात्री दिनभर भटके
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पीलीभीत। लुधियाना से बिहार जा रही दो बसों को एआरटीओ और पीटीओ ने क्षमता से अधिक सवारियां, अवैध परमिट, बकाया रोड टैक्स, मॉडिफाइड सीटों को लेकर सीज कर दिया गया। इसके बाद यात्रियों को रोडवेज बस स्टैंड पर उतार दिया गया। बसों के चालक और परिचालक मौका देखकर खिसक गए। इससे दोनों बसों के 180 यात्री दिनभर सड़कों पर भकटते रहे। काफी जद्दोजहद के बाद शाम को प्रशासन की ओर से तीन बसों का इंतजाम कर यात्रियों को उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
लुधियाना से अपने घरों को लौटने के लिए मजदूरों ने पंजाब की एक ट्रैवेल एजेंसी से बसों के टिकट बुक कराने के बाद बसों में सवार हुए। मगर जिन बसों में एजेंसी द्वारा इनको सवार किया गया उनका 25 दिसंबर 2019 को परमिट अवैध हो चुका था। जबकि कई माह का रोड टैक्स बकाया था। चेकिंग के दौरान एआरटीओ अमिताभ राय और पीटीओ राकेश मोहन ने दोनों बसों को सीज कर दिया। कार्रवाई के दौरान बसों के कर्मचारियों अधिकारियों को कोई प्रपत्र नहीं दिखा सके। इससे बसों को चालान करने के बजाय सीज किया गया था। जबकि बसों की अंदर चेकिंग के दौरान यात्री ठूंसकर बैठाए गए थे। बस मालिकों ने अधिक सवारियां बैठाने के चालान में सीटों को हटवाकर स्लीपर बना दिए। इससे ज्यादा सवारियों को बिठाया जा सके। इस क्षमता से अधिक सवारियां और सीटों को मॉडिफाइड करने की भी कार्रवाई गई थी। अधिकारियों ने एक बसों को ललौरीखेड़ा चौकी के सुपुर्द कर दिया। जबकि दूसरी बसों को रोडवेज स्टैंड को सौंप दिया। इसके बाद यात्रियों से कहा गया कि रोडवेज बस पकड़कर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सकते हैं। शाम को प्रशासन की ओर से दो निजी और एक रोडवेज बस से बच्चों समेत शामिल 180 यात्रियों को उनके गंतव्य के लिए रवाना करा दिया गया था।
यात्री बोले- किराये के पैसे नहीं थे तो दूसरी बस से कैसे जाएं
लुधियाना से मजदूरी कर लौट रहे यात्रियों ने किराया पहले ही दे दिया था। इसके बाद उनके पास दोबारा किराए के लिए पैसे नहीं थे। इससे यात्री दिनभर रोडवेज बस स्टैंड पर ही भटकते रहे। किसी तरह एआरएम से मिलकर बिहार भेजने की गुहार लगाई। मगर एआरएम ने बिना किराए के बसों को भेजने से मना कर दिया। घंटों भटकने के बाद यात्रियों ने डीएम कार्यालय का पता कर उनसे गुहार लगाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चले। मगर वहां कर्मचारियों ने बिना डीएम के मिलाए ही लौटा दिया। इससे तपती धूप में यात्री दिनभर घर जाने की ओड़ में इधर उधर दौड़ते रहे।
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कोई बोला मां की मौत पर जा रहा घर तो कोई रक्षाबंधन में बच्चों को लेने जाने की बात कही
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। मानवता को किस तरह दर किनार किया जाता है। बुधवार को रोडवेज से कलेक्ट्रेट तक लोगों ने देखा। भूखे मासूम बच्चों को गोद में लिए और खुद घरों से कोसो दूर, पास में किराए के लिए पैसे न ही वाहन का इंतजाम। बेबसी से हमदर्दों की तलाश दिनभर बिहार के लोगों की निगाह करतीं रहीं। कोई रक्षाबंधन को लेकर अपने बच्चों को लेने जा रहा था, तो कोई अपनी मां की मौत की सूचना पर कंधा देने के लिए जा रहा था।
रक्षाबंधन को लेकर घर बच्चों के लिए लेने जा रहे है। कंपनी से कुछ दिन छुट्टी मिली थी। ट्रैवेल एजेंसी पर टिकट बुक कराने के बाद बस पर सवार हुए थे। पैसे भी पास में ज्यादा नहीं है। ऐसे में अब आधे रास्ते में बस से उतार दिया गया है। घर कब पहुंचेंगे पता नहीं। मेरा क्या कसूर था। - प्रदीप शर्मा, पुरनिया बिहार
पिछले 15 दिन पहले खन्ना पंजाब काम करने गए थे। मंगलवार को मां गायत्री की मौत होने की सूचना मिली। इस पर मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए के लिए आनन फानन में टिकट बुक कराया था। ज्यादा पैसे भी पास में नहीं है। अब तो मां का मुंह देखना भी नसीब नहीं होगा। - विनोद दुबे, महाराजगंज गोरखपुर
पंजाब में काम की तलाश में अपने साथियों के साथ गया था। वहां काम भी नहीं मिला। घर से जो पैसे ले गया। वह भी खर्च हो गए। किसी तरह से इस बस का 1500 रुपये का टिकट खरीदा। इसके बाद सोचा घर तो पहुंच जाएंगे। मगर रास्ते में ही बस से उतार दिया गया। अब बिना पैसे घर पहुंचना मुश्किल सा लग रहा है। - रविंद्रा, गुलाबबाग जिरौमेल बिहार
परिवार वालों ने रक्षाबंधन को लेकर घर बुलाया था। पास में ज्यादा पैसे नहीं थे, मगर घर जाना जरुरी था। इसके लिए किसी तरह पैसों का इंतजाम कर टिकट बस का टिकट बुक कराया था। अब बस में क्या दिक्कत है। इसकी जानकारी हमें नहीं थी। ट्रेवल एजेंसी से घर तक पहुंचने की गृह जनपद तक पहुंचाने की बात कहीं थी। - रंजीत कुमार, छतापुर सियोल, बिहार
यात्रियों को उनके गंतव्य को भेजने के लिए सपाइयों ने दिया धरना
बिहार के यात्रियों की समस्या सुनने के बाद पूर्वमंत्री हेमराज वर्मा और जिला महासचिव युसूफ कादरी यात्रियों के साथ एआरएम से मिलने रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे। वार्ता के दौरान एआरएम ने बिना कराएं के बसों को भेजने से मना कर दिया। इस पर दोनों नेता कार्यकर्ताओं के साथ रोडवेज के मुख्य गेट पर यात्रियों के साथ धरना पर बैठ गए। सपा नेताओं का कहना था कि जब तक यात्रियों को उनके गतंव्य तक नहीं भेजा जाएगा। तब तक धरना जारी रहेगा। मौके पर पहुंची पुल िस ने दोनों नेताओं को समझाने का प्रयास किया, मगर धरना खत्म नहीं हुआ। बाद में सीओ सिटी वीरेंद्र विक्रम ने भी जल्द बसों का व्यवस्था कर यात्रियों की भेजने की बात कहीं। इसके बाद भी सपा नेता उठने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पीटीओ राकेश मोहन मौके पर पहुंचकर बसों केा इंतजाम होने की बात कहीं। कहा कि बसों केा इंतजाम कर रहे थे। इसी लिए इतनी देरी हुई है। इसके बाद सपा नेताओं ने धरना समाप्त किया। इस दौरान यात्रियों को सपा नेताओं ने हल्का आहार भी करा दिया था।
बिना किराए के बसों को भेजना संभव नहीं था। इसके लिए यात्रियों से किराए की बात कही गई थी। मगर यात्रियों ने किराया देने से साफ मना कर दिया था। इसके लिए बसों को नहीं भेजा गया।
- वीके गंगवार, एआरएम रोडवेज
अवैध परमिट, टैक्स बकाया, क्षमता से अधिक सवारियां, बसों में मॉडिफाइड सीटों पर कार्रवाई की गई। बस कर्मचारियों से प्रापत्र मांग गई, मगर चालक नहीं दिखा सके। इस पर दोनों बसों को सीज किया गया। यात्रियों को दूसरी बसों से उनके गतंव्य के लिए रवाना कर दिया गया। - अमिताभ राय, एआरटीओ
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लुधियाना से अपने घरों को लौटने के लिए मजदूरों ने पंजाब की एक ट्रैवेल एजेंसी से बसों के टिकट बुक कराने के बाद बसों में सवार हुए। मगर जिन बसों में एजेंसी द्वारा इनको सवार किया गया उनका 25 दिसंबर 2019 को परमिट अवैध हो चुका था। जबकि कई माह का रोड टैक्स बकाया था। चेकिंग के दौरान एआरटीओ अमिताभ राय और पीटीओ राकेश मोहन ने दोनों बसों को सीज कर दिया। कार्रवाई के दौरान बसों के कर्मचारियों अधिकारियों को कोई प्रपत्र नहीं दिखा सके। इससे बसों को चालान करने के बजाय सीज किया गया था। जबकि बसों की अंदर चेकिंग के दौरान यात्री ठूंसकर बैठाए गए थे। बस मालिकों ने अधिक सवारियां बैठाने के चालान में सीटों को हटवाकर स्लीपर बना दिए। इससे ज्यादा सवारियों को बिठाया जा सके। इस क्षमता से अधिक सवारियां और सीटों को मॉडिफाइड करने की भी कार्रवाई गई थी। अधिकारियों ने एक बसों को ललौरीखेड़ा चौकी के सुपुर्द कर दिया। जबकि दूसरी बसों को रोडवेज स्टैंड को सौंप दिया। इसके बाद यात्रियों से कहा गया कि रोडवेज बस पकड़कर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सकते हैं। शाम को प्रशासन की ओर से दो निजी और एक रोडवेज बस से बच्चों समेत शामिल 180 यात्रियों को उनके गंतव्य के लिए रवाना करा दिया गया था।
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यात्री बोले- किराये के पैसे नहीं थे तो दूसरी बस से कैसे जाएं
लुधियाना से मजदूरी कर लौट रहे यात्रियों ने किराया पहले ही दे दिया था। इसके बाद उनके पास दोबारा किराए के लिए पैसे नहीं थे। इससे यात्री दिनभर रोडवेज बस स्टैंड पर ही भटकते रहे। किसी तरह एआरएम से मिलकर बिहार भेजने की गुहार लगाई। मगर एआरएम ने बिना किराए के बसों को भेजने से मना कर दिया। घंटों भटकने के बाद यात्रियों ने डीएम कार्यालय का पता कर उनसे गुहार लगाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चले। मगर वहां कर्मचारियों ने बिना डीएम के मिलाए ही लौटा दिया। इससे तपती धूप में यात्री दिनभर घर जाने की ओड़ में इधर उधर दौड़ते रहे।
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कोई बोला मां की मौत पर जा रहा घर तो कोई रक्षाबंधन में बच्चों को लेने जाने की बात कही
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। मानवता को किस तरह दर किनार किया जाता है। बुधवार को रोडवेज से कलेक्ट्रेट तक लोगों ने देखा। भूखे मासूम बच्चों को गोद में लिए और खुद घरों से कोसो दूर, पास में किराए के लिए पैसे न ही वाहन का इंतजाम। बेबसी से हमदर्दों की तलाश दिनभर बिहार के लोगों की निगाह करतीं रहीं। कोई रक्षाबंधन को लेकर अपने बच्चों को लेने जा रहा था, तो कोई अपनी मां की मौत की सूचना पर कंधा देने के लिए जा रहा था।
रक्षाबंधन को लेकर घर बच्चों के लिए लेने जा रहे है। कंपनी से कुछ दिन छुट्टी मिली थी। ट्रैवेल एजेंसी पर टिकट बुक कराने के बाद बस पर सवार हुए थे। पैसे भी पास में ज्यादा नहीं है। ऐसे में अब आधे रास्ते में बस से उतार दिया गया है। घर कब पहुंचेंगे पता नहीं। मेरा क्या कसूर था। - प्रदीप शर्मा, पुरनिया बिहार
पिछले 15 दिन पहले खन्ना पंजाब काम करने गए थे। मंगलवार को मां गायत्री की मौत होने की सूचना मिली। इस पर मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए के लिए आनन फानन में टिकट बुक कराया था। ज्यादा पैसे भी पास में नहीं है। अब तो मां का मुंह देखना भी नसीब नहीं होगा। - विनोद दुबे, महाराजगंज गोरखपुर
पंजाब में काम की तलाश में अपने साथियों के साथ गया था। वहां काम भी नहीं मिला। घर से जो पैसे ले गया। वह भी खर्च हो गए। किसी तरह से इस बस का 1500 रुपये का टिकट खरीदा। इसके बाद सोचा घर तो पहुंच जाएंगे। मगर रास्ते में ही बस से उतार दिया गया। अब बिना पैसे घर पहुंचना मुश्किल सा लग रहा है। - रविंद्रा, गुलाबबाग जिरौमेल बिहार
परिवार वालों ने रक्षाबंधन को लेकर घर बुलाया था। पास में ज्यादा पैसे नहीं थे, मगर घर जाना जरुरी था। इसके लिए किसी तरह पैसों का इंतजाम कर टिकट बस का टिकट बुक कराया था। अब बस में क्या दिक्कत है। इसकी जानकारी हमें नहीं थी। ट्रेवल एजेंसी से घर तक पहुंचने की गृह जनपद तक पहुंचाने की बात कहीं थी। - रंजीत कुमार, छतापुर सियोल, बिहार
यात्रियों को उनके गंतव्य को भेजने के लिए सपाइयों ने दिया धरना
बिहार के यात्रियों की समस्या सुनने के बाद पूर्वमंत्री हेमराज वर्मा और जिला महासचिव युसूफ कादरी यात्रियों के साथ एआरएम से मिलने रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे। वार्ता के दौरान एआरएम ने बिना कराएं के बसों को भेजने से मना कर दिया। इस पर दोनों नेता कार्यकर्ताओं के साथ रोडवेज के मुख्य गेट पर यात्रियों के साथ धरना पर बैठ गए। सपा नेताओं का कहना था कि जब तक यात्रियों को उनके गतंव्य तक नहीं भेजा जाएगा। तब तक धरना जारी रहेगा। मौके पर पहुंची पुल िस ने दोनों नेताओं को समझाने का प्रयास किया, मगर धरना खत्म नहीं हुआ। बाद में सीओ सिटी वीरेंद्र विक्रम ने भी जल्द बसों का व्यवस्था कर यात्रियों की भेजने की बात कहीं। इसके बाद भी सपा नेता उठने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पीटीओ राकेश मोहन मौके पर पहुंचकर बसों केा इंतजाम होने की बात कहीं। कहा कि बसों केा इंतजाम कर रहे थे। इसी लिए इतनी देरी हुई है। इसके बाद सपा नेताओं ने धरना समाप्त किया। इस दौरान यात्रियों को सपा नेताओं ने हल्का आहार भी करा दिया था।
बिना किराए के बसों को भेजना संभव नहीं था। इसके लिए यात्रियों से किराए की बात कही गई थी। मगर यात्रियों ने किराया देने से साफ मना कर दिया था। इसके लिए बसों को नहीं भेजा गया।
- वीके गंगवार, एआरएम रोडवेज
अवैध परमिट, टैक्स बकाया, क्षमता से अधिक सवारियां, बसों में मॉडिफाइड सीटों पर कार्रवाई की गई। बस कर्मचारियों से प्रापत्र मांग गई, मगर चालक नहीं दिखा सके। इस पर दोनों बसों को सीज किया गया। यात्रियों को दूसरी बसों से उनके गतंव्य के लिए रवाना कर दिया गया। - अमिताभ राय, एआरटीओ