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बाढ़ का खतरा... तटबंध के निकट छह ठोकरें बुरी तरह क्षतिग्रस्त
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पीलीभीत। गभिया सहराई के नलडेंगा क्षेत्र में में बारह करोड़ रुपये की लागत से तटबंध के किनारे पत्थर की बनी आधा दर्जन से अधिक ठोकरें बुरी तरह से नदी की बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। फिलहाल कटान जारी होने से खतरा और बढ़ गया है। यही स्थिति रही तो तटबंध क्षतिग्रस्त हो सकता है। जिससे दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
शारदा नदी के दाए किनारे पर शारदा सागर खंड की ओर से तटबंध के किनारे बनी ठोकर संख्या 16 पिछली वर्षा ऋतु में क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिससे नदी के भीतरी हिस्से का कुछ भाग नदी के गर्भ में समा गया था। जिसके बाद यहां पर शारदा सागर खंड में 12 करोड़ रुपये की लागत के बाढ़ नियंत्रण योजना शासन से मंजूर करा कर बनाई जिसका निर्माण कार्य जुलाई तक जारी रहा। इस बाढ़ नियंत्रण योजना के बन जाने से इस स्थान पर तो शारदा नदी की मुख्यधारा बाहर से हटकर नदी के बीच में चली गई लेकिन उसके डाउनस्ट्रीम में नदी की धार का करंट दाहिने किनारे की ओर ही आ गया। सटे गांव नलडेंगा क्षेत्र में तटबंध के किनारे किनारे पत्थर की लगभग नगरिया कट की भुजिया तक एक दर्जन ठोकरें बनी थी शारदा नदी ने इन सभी ठोकरों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया था और यह इस स्थिति आज भी जारी है यह इलाका शारदा सागर खंड के अधीन है अभियंताओं ने यहां पर कटान रोकने के लिए टेंपरेरी कार्य के रूप में झाड़ झंखाड़ और ठोकरों के दोनों ओर देसी बैग में रेत भरकर बचाव कार्य किए हैं लेकिन बेशक ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं नदी का जलस्तर जब बढ़ता है और उसके कम होते ही कटान शुरू हो जाता है। शारदा नदी की रामनगरा तक चौड़ाई काफी अधिक होने के कारण बहुत अधिक तेज कटान की गति नहीं हो पाती जलस्तर कम होते ही पानी भी इसमें मुख्य धार के रूप में चला और जब जब जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो दाहिने किनारे की ओर ना केवल दो घरों के बीच का भाग कटान करती हैं बल्कि ठोकर ओं को भी बुरी तरह से शारदा नदी क्षतिग्रस्त करती जा रही है यह स्थिति जो बाढ़ नियंत्रण योजना बनाई गई है उसके डाउनस्ट्रीम से लेकर नगरिया कट की भुजिया तक बनती जा रही है जो लगभग एक किलोमीटर के दायरे में पड़ता है और करोड़ों रुपये की ठोकरें विशाल बनी हुई हैं अगर इस निर्माणाधीन बाढ़ नियंत्रण योजना के साथ-साथ डाउनस्ट्रीम में बनी ठाकुरों को प्रसारित से पहले मजबूत कर दिया जाता तो आज यह करोड़ों रुपये की बनी ठोकरें क्षतिग्रस्त नहीं होती। हर साल टेंपरेरी कार्य के रूप में 410 सागर खंड ठेकेदारों से मिलकर बंदरबांट कर लेता है और फर्जी भुगतान निकालकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।
इधर, आओ गांव के तटबंध के किनारे रहने वाले सभी ग्रामीण परेशान हैं कई घर शारदा की चपेट में आ चुके हैं और नदी कृषि फॉर्म का कटान करने के साथ-साथ पत्थर की बनी मिसाल टुकड़ों को भी निशाना बनाए हुए हैं फिलहाल जलस्तर घटने के करते और सादा की चौड़ाई अधिक होने के चलते कटान की गति धीमी है और रुक रुक कर कटान हो रहा है।
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रामनगरा भुजिया और बिजोरी खुर्द में शारदा की चौड़ाई काफी अधिक हो चुकी है क्योंकि उसने बाएं किनारे की ओर जो कृषि भूमि किसानों की शारदा ने 5 वर्ष पूर्व छोड़ दी थी और उस पर खेती हो रही थी ऐसी लगभग ढाई सौ एकड़ कृषि भूमि फिर नदी के गर्भ में समा गई है ऐसी ही स्थिति दाहिने किनारे की ओर भी है जहां कृषि भूमि का कटान कर रही है वही दोनों ओर बिजोरी खुर्द कला का जंगल भी कट रहा है और नदी दाहिने किनारे की ओर निचला हिस्सा होने के चलते जंगल से सटे इलाके में मैं एक नई धारा बनाने का प्रयास कर रही है लेकिन शारदा की चौड़ाई यहां पर काफी अधिक हो जाने के चलते शारदा का जलस्तर काफी अधिक बढ़ने पर ही यह स्थिति पैदा होती है लेकिन बुक रिटन बाय किनारे की ओर इस इलाके में भी जारी है।
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शारदा नदी के दाए किनारे पर शारदा सागर खंड की ओर से तटबंध के किनारे बनी ठोकर संख्या 16 पिछली वर्षा ऋतु में क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिससे नदी के भीतरी हिस्से का कुछ भाग नदी के गर्भ में समा गया था। जिसके बाद यहां पर शारदा सागर खंड में 12 करोड़ रुपये की लागत के बाढ़ नियंत्रण योजना शासन से मंजूर करा कर बनाई जिसका निर्माण कार्य जुलाई तक जारी रहा। इस बाढ़ नियंत्रण योजना के बन जाने से इस स्थान पर तो शारदा नदी की मुख्यधारा बाहर से हटकर नदी के बीच में चली गई लेकिन उसके डाउनस्ट्रीम में नदी की धार का करंट दाहिने किनारे की ओर ही आ गया। सटे गांव नलडेंगा क्षेत्र में तटबंध के किनारे किनारे पत्थर की लगभग नगरिया कट की भुजिया तक एक दर्जन ठोकरें बनी थी शारदा नदी ने इन सभी ठोकरों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया था और यह इस स्थिति आज भी जारी है यह इलाका शारदा सागर खंड के अधीन है अभियंताओं ने यहां पर कटान रोकने के लिए टेंपरेरी कार्य के रूप में झाड़ झंखाड़ और ठोकरों के दोनों ओर देसी बैग में रेत भरकर बचाव कार्य किए हैं लेकिन बेशक ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं नदी का जलस्तर जब बढ़ता है और उसके कम होते ही कटान शुरू हो जाता है। शारदा नदी की रामनगरा तक चौड़ाई काफी अधिक होने के कारण बहुत अधिक तेज कटान की गति नहीं हो पाती जलस्तर कम होते ही पानी भी इसमें मुख्य धार के रूप में चला और जब जब जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो दाहिने किनारे की ओर ना केवल दो घरों के बीच का भाग कटान करती हैं बल्कि ठोकर ओं को भी बुरी तरह से शारदा नदी क्षतिग्रस्त करती जा रही है यह स्थिति जो बाढ़ नियंत्रण योजना बनाई गई है उसके डाउनस्ट्रीम से लेकर नगरिया कट की भुजिया तक बनती जा रही है जो लगभग एक किलोमीटर के दायरे में पड़ता है और करोड़ों रुपये की ठोकरें विशाल बनी हुई हैं अगर इस निर्माणाधीन बाढ़ नियंत्रण योजना के साथ-साथ डाउनस्ट्रीम में बनी ठाकुरों को प्रसारित से पहले मजबूत कर दिया जाता तो आज यह करोड़ों रुपये की बनी ठोकरें क्षतिग्रस्त नहीं होती। हर साल टेंपरेरी कार्य के रूप में 410 सागर खंड ठेकेदारों से मिलकर बंदरबांट कर लेता है और फर्जी भुगतान निकालकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।
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इधर, आओ गांव के तटबंध के किनारे रहने वाले सभी ग्रामीण परेशान हैं कई घर शारदा की चपेट में आ चुके हैं और नदी कृषि फॉर्म का कटान करने के साथ-साथ पत्थर की बनी मिसाल टुकड़ों को भी निशाना बनाए हुए हैं फिलहाल जलस्तर घटने के करते और सादा की चौड़ाई अधिक होने के चलते कटान की गति धीमी है और रुक रुक कर कटान हो रहा है।
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रामनगरा भुजिया और बिजोरी खुर्द में शारदा की चौड़ाई काफी अधिक हो चुकी है क्योंकि उसने बाएं किनारे की ओर जो कृषि भूमि किसानों की शारदा ने 5 वर्ष पूर्व छोड़ दी थी और उस पर खेती हो रही थी ऐसी लगभग ढाई सौ एकड़ कृषि भूमि फिर नदी के गर्भ में समा गई है ऐसी ही स्थिति दाहिने किनारे की ओर भी है जहां कृषि भूमि का कटान कर रही है वही दोनों ओर बिजोरी खुर्द कला का जंगल भी कट रहा है और नदी दाहिने किनारे की ओर निचला हिस्सा होने के चलते जंगल से सटे इलाके में मैं एक नई धारा बनाने का प्रयास कर रही है लेकिन शारदा की चौड़ाई यहां पर काफी अधिक हो जाने के चलते शारदा का जलस्तर काफी अधिक बढ़ने पर ही यह स्थिति पैदा होती है लेकिन बुक रिटन बाय किनारे की ओर इस इलाके में भी जारी है।