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चार साल के बच्चे को पिता के सहारे छोड़ दुनिया से अलविदा कह गई शिक्षिका मीरा
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पीलीभीत। पंचायत चुनाव के ड्यूटी के बाद बीसलपुर निवासी शिक्षिका मीरा सक्सेना की कोरोना संक्रमण के चलते आठ मई को मौत हो गई थी। अब उनके परिवार में उनके पति राजेंद्र कुमार और चार वर्षीय पुत्र देवांश हैं। पत्नी की मौत के बाद राजेंद्र और उनका चार वर्षीय पुत्र भी कोरोना संक्रमित हो गए। हालांकि दोनों अब स्वस्थ है, मगर घर में आज भी मातम पसरा हुआ है।
बीसलपुर के मोहल्ला ग्यासपुर निवासी मीरा सक्सेना (58) उच्च प्राथमिक विद्यालय जोगीठेर में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात थी। पंचायत चुनाव के दौरान 26 अप्रैल को उन्होंने मरौरी ब्लॉक में मतदान ड्यूटी की थी। शिक्षिका के पति राजेंद्र कुमार सक्सेना ने बताया कि ड्यूटी से आने के बाद अगले ही दिन उन्हें खांसी-जुकाम हो गया। इस पर उन्होंने नगर के एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली। कुछ राहत मिली, मगर दो मई को उन्हें बुखार आ गया। इसके बाद उन्होंने फिर प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करवाया और घर में ही आइसोलेट रही। हालत में सुधार न होने पर छह मई को उनके भतीजे ने अस्पताल ले जाकर आरटीपीसीआर जांच करवाई। हालत ज्यादा खराब होने पर पीलीभीत के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में जाकर सीटी स्कैन करवाया। डॉक्टर ने फेफड़ों में 80 प्रतिशत संक्रमण होने की बात कही। आठ मई को पत्नी की मौत हो गई। इतनी बात कहते-कहते राजेंद्र कुमार फफक-फफक कर रो पड़े। बताते हैं कि शिक्षिका मीरा ने समाजसेवा के क्षेत्र में भी काफी योगदान दिया। गरीब कन्याओं के विवाह और गरीब बच्चों की पढ़ाई को लेकर वह ज्यादा सक्रिय रहा करती थी। पति राजेंद्र ने बताया कि 10 मई को आई आरटीपीसीआर रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित होने की बात कही गई।
बिन मां के चार साल के मासूम का कैसे होगा लालन पालन
शिक्षिका मीरा सक्सेना के घर में अब उनके पति और उनका चार वर्षीय पुत्र देवांश सक्सेना ही बचे हैं। मां की मौत के बाद देवांश अपने पिता से सुबह-शाम बस एक ही सवाल कर रहा है कि पापा मां कब आएगी, मगर पिता के पास जवाब की जगह आंखों में आंसुओं की धार बह निकलती है। बेटे को झूठा आश्वासन देकर कि मां जल्दी आएगी, कहकर उसे खाना खिलाने के साथ सुला रहे हैं। पत्नी की मौत से बुरी तरह टूट चुके राजेंद्र कुमार कहते हैं कि आखिर कब तक इस तरह बेटे को बहलाता रहूंगा। फिलहाल अब राजेंद्र अपने बेटे देवांश को एक मां की तरह से प्यार दुलार दे रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत चुनाव ने उनके घर को ही बर्बाद कर दिया।
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बीसलपुर के मोहल्ला ग्यासपुर निवासी मीरा सक्सेना (58) उच्च प्राथमिक विद्यालय जोगीठेर में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात थी। पंचायत चुनाव के दौरान 26 अप्रैल को उन्होंने मरौरी ब्लॉक में मतदान ड्यूटी की थी। शिक्षिका के पति राजेंद्र कुमार सक्सेना ने बताया कि ड्यूटी से आने के बाद अगले ही दिन उन्हें खांसी-जुकाम हो गया। इस पर उन्होंने नगर के एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली। कुछ राहत मिली, मगर दो मई को उन्हें बुखार आ गया। इसके बाद उन्होंने फिर प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करवाया और घर में ही आइसोलेट रही। हालत में सुधार न होने पर छह मई को उनके भतीजे ने अस्पताल ले जाकर आरटीपीसीआर जांच करवाई। हालत ज्यादा खराब होने पर पीलीभीत के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में जाकर सीटी स्कैन करवाया। डॉक्टर ने फेफड़ों में 80 प्रतिशत संक्रमण होने की बात कही। आठ मई को पत्नी की मौत हो गई। इतनी बात कहते-कहते राजेंद्र कुमार फफक-फफक कर रो पड़े। बताते हैं कि शिक्षिका मीरा ने समाजसेवा के क्षेत्र में भी काफी योगदान दिया। गरीब कन्याओं के विवाह और गरीब बच्चों की पढ़ाई को लेकर वह ज्यादा सक्रिय रहा करती थी। पति राजेंद्र ने बताया कि 10 मई को आई आरटीपीसीआर रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित होने की बात कही गई।
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बिन मां के चार साल के मासूम का कैसे होगा लालन पालन
शिक्षिका मीरा सक्सेना के घर में अब उनके पति और उनका चार वर्षीय पुत्र देवांश सक्सेना ही बचे हैं। मां की मौत के बाद देवांश अपने पिता से सुबह-शाम बस एक ही सवाल कर रहा है कि पापा मां कब आएगी, मगर पिता के पास जवाब की जगह आंखों में आंसुओं की धार बह निकलती है। बेटे को झूठा आश्वासन देकर कि मां जल्दी आएगी, कहकर उसे खाना खिलाने के साथ सुला रहे हैं। पत्नी की मौत से बुरी तरह टूट चुके राजेंद्र कुमार कहते हैं कि आखिर कब तक इस तरह बेटे को बहलाता रहूंगा। फिलहाल अब राजेंद्र अपने बेटे देवांश को एक मां की तरह से प्यार दुलार दे रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत चुनाव ने उनके घर को ही बर्बाद कर दिया।
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