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बरतें होशियारी.. 186 में 134 नमूने फेल
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पीलीभीत। सिस्टम की लापरवाही से मिलावटखोर अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे हैं। एफएसडीए की टीम ने एक साल में 186 चीजों के नमूने लिए। जांच में 134 नमूने फेल हो गए। सभी के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। बावजूद इसके होली नजदीक आते ही मिलावटखोर फिर सक्रिय हो गए।
होली, दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर खाने, पीने की चीजों में मिलावटखोरी बढ़ जाती है। मुनाफाखोर देसी घी में वनस्पति, लाल मिर्च पाउडर में रंग, कचरी में सिंथेटिक रंग, दूध में डिटर्जेंट की मिलावट करते हैं। मावा में मैदा, बेसन, दाल, मिठाई में कलर आदि की मिलावट की जाती है। मिलावटखोरी के इस खेल को एफएसडीए (फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) को भी पता है। मगर विभागीय अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए कार्रवाई करते हैं।
पिछले एक साल में नमकीन, मावा, दाल आदि खाद्य पदार्थों की लखनऊ में परीक्षण के बाद आई रिपोर्ट में करीब 73 फीसदी नमूने फेल हुए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोरों खिलाफ कार्रवाई भी हुई, लेकिन मिलावटखोरी पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
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एक साल में आई सैंपल की जांच रिपोर्ट
खाद्य पदार्थ - आई रिपोर्ट - फेल नमूने
दूध - 37- 19
मावा - 14 - 06
पनीर - 09-09
घी - 01 - 01
मिठाई - 30 - 19
सरसों तेल - 03 - 03
रिफाइंड - 06 - 03
चैरी - 07 - 07
मसाला - 11 - 10
अनाज - 21 - 18
दाल - 04 - 03
ब्रेकरी निर्मित- 15- 10
नमकीन - 07- 07
नमक - 01- 01
सुपारी - 02 - 02
अन्य - 18- 15
एडीएम कोर्ट में सौ वाद दायर किए गए, जुर्माना भी वसूला
पीलीभीत। अभिहीत अधिकारी के अनुसार एक साल में सैंपल फेल होने के बाद एडीएम कोर्ट में सौ वाद दायर किए गए थे। इनमें 30 पर निर्णय लिया जा चुका है। सीजेएम कोर्ट में 14 मामले विचाराधीन हैं। मावा के दो मामलों में एक लाख रुपये, पनीर के एक मामले में एक लाख रुपये, अनाज के एक मामले में 50 हजार रुपये, बेकरी निर्मित सामान के दो मामलों में एक लाख 20 हजार रुपये, नमकीन में 30 हजार रुपये, दाल के दो मामलों में दो लाख 20 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। संवाद
कार्रवाई करने से बचते हैं जिम्मेदार
मिलावटखोरी को लेकर शहर में अभियान चलाने से जिम्मेदार हमेशा बचते रहे हैं। एफएसडीए टीम छापा मारती है तो व्यापारी विरोध करने लगते हैं। दो दिन के लिए जागरूकता और सैंपलिंग के लिए एक वैन आई थी। उसे टनकपुर हाईवे स्थित गौहनिया चौराहे तक लाने के बाद ग्रामीण इलाकों में भेज दिया गया।
मिलावटी चीजें खाने से स्वास्थ्य खराब होता है। हानिकारक केमिकल की मिलावट से बने खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल करने पर बीमार होना तय है। अक्सर उल्टी, दस्त की दिक्कत रहेगी। साथ ही लीवर, किडनी और पेट संबंधी बीमारियां भी बढ़ती हैं। - डॉ. रमाकांत सागर, फिजीशियन जिला अस्पताल
मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई करने के लिए कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों सैंपलिंग कर नमूने फेल होने पर सख्त कदम उठाए गए। होली को लेकर अभी कोई गाइड लाइन प्राप्त नहीं हुई है। मगर अपने स्तर से अभियान शुरू कराया जाएगा। किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाती है। - शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए
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होली, दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर खाने, पीने की चीजों में मिलावटखोरी बढ़ जाती है। मुनाफाखोर देसी घी में वनस्पति, लाल मिर्च पाउडर में रंग, कचरी में सिंथेटिक रंग, दूध में डिटर्जेंट की मिलावट करते हैं। मावा में मैदा, बेसन, दाल, मिठाई में कलर आदि की मिलावट की जाती है। मिलावटखोरी के इस खेल को एफएसडीए (फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) को भी पता है। मगर विभागीय अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए कार्रवाई करते हैं।
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पिछले एक साल में नमकीन, मावा, दाल आदि खाद्य पदार्थों की लखनऊ में परीक्षण के बाद आई रिपोर्ट में करीब 73 फीसदी नमूने फेल हुए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोरों खिलाफ कार्रवाई भी हुई, लेकिन मिलावटखोरी पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
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एक साल में आई सैंपल की जांच रिपोर्ट
खाद्य पदार्थ - आई रिपोर्ट - फेल नमूने
दूध - 37- 19
मावा - 14 - 06
पनीर - 09-09
घी - 01 - 01
मिठाई - 30 - 19
सरसों तेल - 03 - 03
रिफाइंड - 06 - 03
चैरी - 07 - 07
मसाला - 11 - 10
अनाज - 21 - 18
दाल - 04 - 03
ब्रेकरी निर्मित- 15- 10
नमकीन - 07- 07
नमक - 01- 01
सुपारी - 02 - 02
अन्य - 18- 15
एडीएम कोर्ट में सौ वाद दायर किए गए, जुर्माना भी वसूला
पीलीभीत। अभिहीत अधिकारी के अनुसार एक साल में सैंपल फेल होने के बाद एडीएम कोर्ट में सौ वाद दायर किए गए थे। इनमें 30 पर निर्णय लिया जा चुका है। सीजेएम कोर्ट में 14 मामले विचाराधीन हैं। मावा के दो मामलों में एक लाख रुपये, पनीर के एक मामले में एक लाख रुपये, अनाज के एक मामले में 50 हजार रुपये, बेकरी निर्मित सामान के दो मामलों में एक लाख 20 हजार रुपये, नमकीन में 30 हजार रुपये, दाल के दो मामलों में दो लाख 20 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। संवाद
कार्रवाई करने से बचते हैं जिम्मेदार
मिलावटखोरी को लेकर शहर में अभियान चलाने से जिम्मेदार हमेशा बचते रहे हैं। एफएसडीए टीम छापा मारती है तो व्यापारी विरोध करने लगते हैं। दो दिन के लिए जागरूकता और सैंपलिंग के लिए एक वैन आई थी। उसे टनकपुर हाईवे स्थित गौहनिया चौराहे तक लाने के बाद ग्रामीण इलाकों में भेज दिया गया।
मिलावटी चीजें खाने से स्वास्थ्य खराब होता है। हानिकारक केमिकल की मिलावट से बने खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल करने पर बीमार होना तय है। अक्सर उल्टी, दस्त की दिक्कत रहेगी। साथ ही लीवर, किडनी और पेट संबंधी बीमारियां भी बढ़ती हैं। - डॉ. रमाकांत सागर, फिजीशियन जिला अस्पताल
मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई करने के लिए कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों सैंपलिंग कर नमूने फेल होने पर सख्त कदम उठाए गए। होली को लेकर अभी कोई गाइड लाइन प्राप्त नहीं हुई है। मगर अपने स्तर से अभियान शुरू कराया जाएगा। किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाती है। - शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए