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मनरेगा स्टाफ के बाद अब डीएम के निशाने पर आए पंचायत सचिव
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पीलीभीत। मनरेेगा में एक ही ब्लॉक पर लंबे समय से जमे कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायकों के कार्यक्षेत्र बदलने के बाद अब पंचायत सचिव डीएम की रडार पर आ गए हैं। किस सचिव पर कितनी ग्राम पंचायतों का कार्यभार है? कितने समय से एक जगह पर तैनाती चल रही है? ऐसे ही तमाम बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की गई है। सूची बनाने के बाद सभी को बराबर कार्यभार देते हुए लंबे समय से जमे सचिवों को दूसरे ब्लॉकों पर स्थानांतरित किया जाएगा। डीएम की ओर से कार्रवाई की शुरूआत किए जाने के बाद खलबली मच गई है।
जनपद में 720 ग्राम पंचायतें हैं। सात ब्लॉकों में 95 पंचायत सचिव हैं। ग्राम पंचायतों के हिसाब से सचिवों की खासा कमी है। इन्हीं को ग्राम पंचायतों का कार्यभार देकर काम कराया जा रहा है। विकास कार्य के नाम पर सचिवों द्वारा गड़बड़ी करने के कई मामले जांच में पुष्टि हो चुके हैं। जिसके बाद रिकवरी के भी निर्देश दिए गए। कई से रिकवरी चल भी रही है। मगर स्टाफ की कमी के चलते सख्त एक्शन नहीं लिया जा सका था। इसी बीच एक गोलमाल ग्राम पंचायतों के कार्यभार और तैनाती को लेकर भी लंबे समय से चला आ रहा है। कुछ अफसरों के संरक्षण में काम करने वाले सचिव सालों से एक ही ब्लॉक पर जमे हुए हैं। उनकी शिकायतों पर जांच भी दबा दी जाती थी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों की संख्या भी अधिक रहती है। आलम यह है कि एक ही ब्लॉक में कुछ सचिव महज पांच ग्राम पंचायतों को देखते हैं, जबकि जिन पर अफसरों का संरक्षण है उनकी संख्या 15 से भी पार है। ऐसे कई सचिवों की पूर्व में शिकायतें भी डीएम तक पहुंची थी। अमरिया के एक सचिव की तो शिकायतों की फेहरिस्त काफी लंबी रही। इन तमाम शिकायतों का संज्ञान लेकर अब इन पर शिकंजा कसने का मन डीएम ने बनाया है। डीएम पुलकित खरे ने बताया कि ब्लॉकवार सचिवों का विवरण तलब किया गया है। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे सचिवों के तबादले किए जाएंगे। सभी सचिवों को बराबर काम दिया जाएगा। यह नहीं कि सिर्फ चंद सचिवों को ही सभी ग्राम पंचायतें आवंटित कर दी जाएं। काम को देखते हुए कुछ अंतर को सामान्य है, मगर ऐसा नहीं चलेगा कि एक के पास 15 ग्राम पंचायत हों और उसी ब्लॉक में दूसरे के पास पांच। इसे गंभीरता से दिखवाया जा रहा है।
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जनपद में 720 ग्राम पंचायतें हैं। सात ब्लॉकों में 95 पंचायत सचिव हैं। ग्राम पंचायतों के हिसाब से सचिवों की खासा कमी है। इन्हीं को ग्राम पंचायतों का कार्यभार देकर काम कराया जा रहा है। विकास कार्य के नाम पर सचिवों द्वारा गड़बड़ी करने के कई मामले जांच में पुष्टि हो चुके हैं। जिसके बाद रिकवरी के भी निर्देश दिए गए। कई से रिकवरी चल भी रही है। मगर स्टाफ की कमी के चलते सख्त एक्शन नहीं लिया जा सका था। इसी बीच एक गोलमाल ग्राम पंचायतों के कार्यभार और तैनाती को लेकर भी लंबे समय से चला आ रहा है। कुछ अफसरों के संरक्षण में काम करने वाले सचिव सालों से एक ही ब्लॉक पर जमे हुए हैं। उनकी शिकायतों पर जांच भी दबा दी जाती थी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों की संख्या भी अधिक रहती है। आलम यह है कि एक ही ब्लॉक में कुछ सचिव महज पांच ग्राम पंचायतों को देखते हैं, जबकि जिन पर अफसरों का संरक्षण है उनकी संख्या 15 से भी पार है। ऐसे कई सचिवों की पूर्व में शिकायतें भी डीएम तक पहुंची थी। अमरिया के एक सचिव की तो शिकायतों की फेहरिस्त काफी लंबी रही। इन तमाम शिकायतों का संज्ञान लेकर अब इन पर शिकंजा कसने का मन डीएम ने बनाया है। डीएम पुलकित खरे ने बताया कि ब्लॉकवार सचिवों का विवरण तलब किया गया है। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे सचिवों के तबादले किए जाएंगे। सभी सचिवों को बराबर काम दिया जाएगा। यह नहीं कि सिर्फ चंद सचिवों को ही सभी ग्राम पंचायतें आवंटित कर दी जाएं। काम को देखते हुए कुछ अंतर को सामान्य है, मगर ऐसा नहीं चलेगा कि एक के पास 15 ग्राम पंचायत हों और उसी ब्लॉक में दूसरे के पास पांच। इसे गंभीरता से दिखवाया जा रहा है।
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