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रेलवे पुल बनाने को रोकी गोमती की धार अफसरों ने खुलवाई
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पूरनपुर। रेलवे के आमान परिवर्तन में गोमती नदी पर पुल बनाने के लिए नदी की धार रोकने के विरोध में बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए। किसानों का कहना था कि खेतों में जलभराव से धान की फसल एक बार खराब हो चुकी है। दोबारा नदी की धार को बंद नहीं करने दिया जाएगा। बाद में तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर धार बंद करने का काम रुकवा दिया और डाली गई मिट्टी भी हटवा दी।
रेलवे के आमान परिवर्तन को लेकर गांव परसादपुर के समीप गोमती नदी पर पुल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने नदी की धार रोक दी थी। इसका मकसद यह बताया गया कि पुल निर्माण का काम प्रभावित न हो। नदी की धार रुकने से आसपास के किसानों के खेतों में जलभराव हो गया। कुछ किसानों की धान की ताजा रोपी गई फसल खराब हो गई। सप्ताह भर पहले किसानों ने गोमती नदी की धार को खोल दिया। इससे नदी का पानी आगे बह गया। पुल का निर्माण अब लगभग पूरा हो चुका है। कुछ काम बाकी बचा है।
रविवार को कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों ने जेसीबी मशीन से मिट्टी खींचकर नदी की धार को फिर से रोकना शुरू कर दिया। पानी की निकासी रोकने के लिए सीमेंट के छोटे पाइप डाल दिए गए। इसकी जानकारी लगने पर आसपास के किसान इकट्ठा हो गए। उन्होंने मिलकर गोमती नदी से पानी निकासी का विरोध शुरू कर दिया। किसानों का कहना था कि नदी की धार रुकने से उनके खेतों में फिर जलभराव होगा और खेतों में खड़ी धान की फसल खराब हो जाएगी। इसलिए नदी की धार को किसी कीमत पर नहीं रोकने दिया जाएगा। भाकियू जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने बताया कि समस्या की जानकारी डीएम को फोन से दी गई है। इसके बाद तहसीलदार विजय त्रिवेदी और नायब तहसीलदार अनुराग सिंह मौके पर पहुंचे। अफसरों को देखकर काम कर रहे कर्मचारी जेसीबी मशीन छोड़कर भाग गए। तहसीलदार ने कर्मचारियों को किसानों से बुलवाया और गोमती की धार बंद न करने की चेतावनी दी। तहसीलदार ने बताया कि गोमती की धार बंद करने को डाली गई मिट्टी को हटवा दिया गया है।
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रेलवे के आमान परिवर्तन को लेकर गांव परसादपुर के समीप गोमती नदी पर पुल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने नदी की धार रोक दी थी। इसका मकसद यह बताया गया कि पुल निर्माण का काम प्रभावित न हो। नदी की धार रुकने से आसपास के किसानों के खेतों में जलभराव हो गया। कुछ किसानों की धान की ताजा रोपी गई फसल खराब हो गई। सप्ताह भर पहले किसानों ने गोमती नदी की धार को खोल दिया। इससे नदी का पानी आगे बह गया। पुल का निर्माण अब लगभग पूरा हो चुका है। कुछ काम बाकी बचा है।
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रविवार को कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों ने जेसीबी मशीन से मिट्टी खींचकर नदी की धार को फिर से रोकना शुरू कर दिया। पानी की निकासी रोकने के लिए सीमेंट के छोटे पाइप डाल दिए गए। इसकी जानकारी लगने पर आसपास के किसान इकट्ठा हो गए। उन्होंने मिलकर गोमती नदी से पानी निकासी का विरोध शुरू कर दिया। किसानों का कहना था कि नदी की धार रुकने से उनके खेतों में फिर जलभराव होगा और खेतों में खड़ी धान की फसल खराब हो जाएगी। इसलिए नदी की धार को किसी कीमत पर नहीं रोकने दिया जाएगा। भाकियू जिला उपाध्यक्ष मंजीत सिंह ने बताया कि समस्या की जानकारी डीएम को फोन से दी गई है। इसके बाद तहसीलदार विजय त्रिवेदी और नायब तहसीलदार अनुराग सिंह मौके पर पहुंचे। अफसरों को देखकर काम कर रहे कर्मचारी जेसीबी मशीन छोड़कर भाग गए। तहसीलदार ने कर्मचारियों को किसानों से बुलवाया और गोमती की धार बंद न करने की चेतावनी दी। तहसीलदार ने बताया कि गोमती की धार बंद करने को डाली गई मिट्टी को हटवा दिया गया है।
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