{"_id":"5d9251878ebc3e93d76c4ef5","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly37835339","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ने में बढ़ी मिठास जंगली सुअरों को ललचा रही..यही बाघों के जंगल से निकलने की वजह बन रही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ने में बढ़ी मिठास जंगली सुअरों को ललचा रही..यही बाघों के जंगल से निकलने की वजह बन रही
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। इन दिनों में मौसम में तबदीली देखने को मिल रही है। ठंड बढ़ने के साथ ही गन्ने में मिठास भी बढ़ रही है। इसके चलते जंगली सुअर गन्ने खड़े खेतों की ओर रुख कर रहे है। जंगली सुअरों का पीछा करते हुए बाघ आबादी की ओर पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि इन दिनों जंगल से बाहर बाघों की सक्रियता बढ़ने लगी है। माधोटांडा क्षेत्र में बढ़ी बाघों की चहलकदमी भी इसी की वजह मानी जा रही है।
टाइगर रिजर्व से बाहर वैसे तो बाघ, तेंदुए की चहलकदमी आम बात है, लेकिन हल्की ठंड शुरू होते ही जंगल से बाहर आबादी क्षेत्र में बाघों की सक्रियता बढ़ने लगी है। कारण यह है कि गन्ने में मिठास बढ़ने और धान की फसल पकने के चलते जंगली सुअर खेतों की ओर अधिक रुख करते हैं। चूंकि बाघों के लिए सुअर ज्यादा प्रिय है सो बाघ भी शिकार का पीछा कर आबादी के नजदीक पहुंच रहे हैं। जंगल जैसा वातावरण महसूस होने के चलते बाघ गन्ने के खेत में मौजूद रहकर आसानी से जंगली सुअर का शिकार कर लेते हैं। इधर, टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए आदि वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। नतीजतन बाघ, तेंदुए जंगल से बाहर की ओर रुख कर रहै। इसके चलते मानव के साथ बाघ, तेंदुए की सुरक्षा भी खतरे में दिखाई दे रही है। पूर्व वर्षों में जहां कई इंसान बाघों का निवाला बन चुके है। वहीं बाघ और तेंदुओं की मौतें भी हुई है। कई बाघ और तेंदुए पकड़कर बाहर चिड़ियाघर या नेशनल पार्क भेजे जा चुके हैं।
किसान परेशान, रखवाले भी छोड़ रहे साथ
जंगल से बाहर निकलकर खेतों में शरण ले रहे बाघ किसानों के लिए मुसीबत बनते जा रहे है। वन्यजीवों से फसलों को बचाने के लिए किसानों के सामने एक संकट खड़ा हो गया है। कारण यह है कि बाघों की आबादी क्षेत्र में बढ़ रही चहलकदमी से किसान दहशत में हैं। वे रखवाली करने से इंकार कर रहे हैं।
विज्ञापन
बाघों के लिए खरनाक हैं जंगली सुअर
जंगली सुअर हो भले ही बाघ का प्रिय भोजन हो, लेकिन वे बाघ के जिंदगी के लिए खतरनाक भी हैं। टाइगर रिजर्व में पूर्व में हुई कई बाघों की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। इसमें जंगली सुअर का शिकार करने से उसके मांस में पैदा होने वाली बीमारी के वाइरस से बाघ की मौत होने की बात सामने आई थी।
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व से बाहर वैसे तो बाघ, तेंदुए की चहलकदमी आम बात है, लेकिन हल्की ठंड शुरू होते ही जंगल से बाहर आबादी क्षेत्र में बाघों की सक्रियता बढ़ने लगी है। कारण यह है कि गन्ने में मिठास बढ़ने और धान की फसल पकने के चलते जंगली सुअर खेतों की ओर अधिक रुख करते हैं। चूंकि बाघों के लिए सुअर ज्यादा प्रिय है सो बाघ भी शिकार का पीछा कर आबादी के नजदीक पहुंच रहे हैं। जंगल जैसा वातावरण महसूस होने के चलते बाघ गन्ने के खेत में मौजूद रहकर आसानी से जंगली सुअर का शिकार कर लेते हैं। इधर, टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुए आदि वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। नतीजतन बाघ, तेंदुए जंगल से बाहर की ओर रुख कर रहै। इसके चलते मानव के साथ बाघ, तेंदुए की सुरक्षा भी खतरे में दिखाई दे रही है। पूर्व वर्षों में जहां कई इंसान बाघों का निवाला बन चुके है। वहीं बाघ और तेंदुओं की मौतें भी हुई है। कई बाघ और तेंदुए पकड़कर बाहर चिड़ियाघर या नेशनल पार्क भेजे जा चुके हैं।
विज्ञापन
किसान परेशान, रखवाले भी छोड़ रहे साथ
जंगल से बाहर निकलकर खेतों में शरण ले रहे बाघ किसानों के लिए मुसीबत बनते जा रहे है। वन्यजीवों से फसलों को बचाने के लिए किसानों के सामने एक संकट खड़ा हो गया है। कारण यह है कि बाघों की आबादी क्षेत्र में बढ़ रही चहलकदमी से किसान दहशत में हैं। वे रखवाली करने से इंकार कर रहे हैं।
विज्ञापन
बाघों के लिए खरनाक हैं जंगली सुअर
जंगली सुअर हो भले ही बाघ का प्रिय भोजन हो, लेकिन वे बाघ के जिंदगी के लिए खतरनाक भी हैं। टाइगर रिजर्व में पूर्व में हुई कई बाघों की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। इसमें जंगली सुअर का शिकार करने से उसके मांस में पैदा होने वाली बीमारी के वाइरस से बाघ की मौत होने की बात सामने आई थी।