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बिना वर्दी ड्यूटी पर पहुंचे वनकर्मी तो होगी कार्रवाई
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पीलीभीत। तमाम कोशिशों के बाद भी टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में लगातार चूक सामने आ रही है। इसमें वनकर्मियों की लापरवाही भी सामने आ रही है। ड्यूटी के दौरान रेंजर से लेकर वन वाचर तक को वर्दी पहनना अनिवार्य कर दिया है। बगैर वर्दी के मिलने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने आदेश जारी किया है।
पांच साल पूर्व जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा तो मिल गया, लेकिन व्यवस्थाएं आज भी अधूरी है। फील्ड स्टाफ से लेकर संसाधन की कमी आज तक पूरी नहीं हो सकी है। सीमित संसाधनों से ही टाइगर रिजर्व की व्यवस्थाएं सुधारने के अफसर प्रयास में जुटे हैं। अनुकूल वातावरण होने के चलते जंगल में बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वहीं वन्यजीवों की सुरक्षा में कोई चूक न हो सके, इसके लिए अफसर एमस्ट्राइप समेत अन्य गश्त को नियमित रखने समेत तमाम प्रयास कर रहे हैं। जंगल गश्त कर अफसर खुद भी सुरक्षा बंदोबस्त की हकीकत परख रहे हैं, लेकिन इस सबके के बावजूद चूक लगातार सामने आ रही है।
इधर ड्यूटी के दौरान वनकर्मी विभागीय वर्दी में नहीं दिखाई देते हैं। यदाकदा वन रक्षक व वाचर तो जरूर वर्दी पहन लेते, लेकिन वन दरोगा से लेकर रेंजर स्तर तक ड्यूटी के दौरान वर्दी में दिखाई नहीं देते। मात्र अफसरों के दौरे की भनक या मुख्यालय जाने पर ही अफसर वर्दी पहनते हैं। इसके चलते रात के दौरान जंगल में गश्त या निगरानी के दौरान वनकर्मी और संदिग्ध की पहचान करना भी खुद विभाग के लिए मुश्किल हो जाता है। वहीं अवैध घुसपैठिए समेत अन्य शातिर इसका फायदा उठाने से नहीं चूकते हैं। इसको ध्यान में रखते अब रेंजर से लेकर वन वाचर तक ड्यूटी के दौरान वर्दी में रहना अनिवार्य कर दिया है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसको नियमित रखने के लिए चेकिंग कराई जाएगी। आदेश का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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पांच साल पूर्व जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा तो मिल गया, लेकिन व्यवस्थाएं आज भी अधूरी है। फील्ड स्टाफ से लेकर संसाधन की कमी आज तक पूरी नहीं हो सकी है। सीमित संसाधनों से ही टाइगर रिजर्व की व्यवस्थाएं सुधारने के अफसर प्रयास में जुटे हैं। अनुकूल वातावरण होने के चलते जंगल में बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वहीं वन्यजीवों की सुरक्षा में कोई चूक न हो सके, इसके लिए अफसर एमस्ट्राइप समेत अन्य गश्त को नियमित रखने समेत तमाम प्रयास कर रहे हैं। जंगल गश्त कर अफसर खुद भी सुरक्षा बंदोबस्त की हकीकत परख रहे हैं, लेकिन इस सबके के बावजूद चूक लगातार सामने आ रही है।
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इधर ड्यूटी के दौरान वनकर्मी विभागीय वर्दी में नहीं दिखाई देते हैं। यदाकदा वन रक्षक व वाचर तो जरूर वर्दी पहन लेते, लेकिन वन दरोगा से लेकर रेंजर स्तर तक ड्यूटी के दौरान वर्दी में दिखाई नहीं देते। मात्र अफसरों के दौरे की भनक या मुख्यालय जाने पर ही अफसर वर्दी पहनते हैं। इसके चलते रात के दौरान जंगल में गश्त या निगरानी के दौरान वनकर्मी और संदिग्ध की पहचान करना भी खुद विभाग के लिए मुश्किल हो जाता है। वहीं अवैध घुसपैठिए समेत अन्य शातिर इसका फायदा उठाने से नहीं चूकते हैं। इसको ध्यान में रखते अब रेंजर से लेकर वन वाचर तक ड्यूटी के दौरान वर्दी में रहना अनिवार्य कर दिया है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसको नियमित रखने के लिए चेकिंग कराई जाएगी। आदेश का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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