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शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में खड़े पेड़ निपटा रहे कब्जेदार
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पीलीभीत। प्रशासन और सिंचाई विभाग ने शारदा सागर डैम की तलहटी में शून्य से 17 किमी तक छह सौ फिट वर्जित क्षेत्र में अवैध कब्जा करने वालों को चिह्नित कर उनकी सूची बनाने का काम तेज कर दिया है। इसमें अवैध निर्माण की स्थिति और कब्जा करने वाले का आधार नंबर भी दर्ज किया जा रहा है। इससे घबराए कब्जेदारों वर्जित क्षेत्र में खड़े यूके लिप्टस और पॉपुलर आदि के पेड़ों का कटान शुरू कर दिया है।
शारदा डैम के बाहरी हिस्से में डैम की तलहटी से लेकर छह सौ फिट चौड़ाई तक वर्जित क्षेत्र है। इस क्षेत्र पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। पिछले दिनों प्रशासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने सींचपालों को लगाकर शारदा डैम के बाहरी हिस्से में डैम की तलहटी से वर्जित क्षेत्र में अवैध कब्जों की पहले बनाई गई सूची को संशोधित कर उसमें कुछ नए बिंदुओं को शामिल कर नई सूची बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसमें प्रत्येक दो किमी क्षेत्र में दो सींचपालों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रथम चरण में शून्य से दस किमी तक अवैध कब्जेदारों की सूची बनाने का कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है।
अवैध कब्जेदारों में किसने झोपड़ी या पक्का निर्माण कर मकान या दुकानों का निर्माण कर रखा है इन बिंदुओं को सूची में दर्ज किया जा रहा है। इन अवैध कब्जेदारों को हटाया जाएगा या स्थाई किया जाएगा इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। यह भी डर है कि कभी भी प्रशासन की मदद से सिंचाई विभाग उन्हें यहां से बेदखल कर सकता है। इसके चलते अवैध कब्जेदारों ने अपने कब्जे वाली भूमि पर खड़े यूकेलिप्टस और पॉपुलर के पेड़ों को ठेकेदारों को बेचकर कटान शुरू कर दिया है। फ्री प्रजाति के होने के चलते वन विभाग से निकासी रवन्ना का भी कोई प्रतिबंध नहीं है। इसका ठेकेदार भी फायदा उठा रहे है। दिन में लकड़ी से लदे कई ट्रक क्षेत्र से बाहर ले जाए जा रहे है। हालांकि शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में पेड़ों का कटान भी वर्जित है, लेकिन पुलिस और वन विभाग से ठेकेदारों ने साठगांठ कर रखी है।
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शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र का एरिया कहां तक है। उसमें जो यूकेलिप्टस या पॉपुलर के पेड़ काटे जा रहे है, सिंचाई विभाग को रोकना चाहिए। अगर भूमि पर खड़े वृक्ष सरकारी हैं तो हमारे विभाग को भी लिखित दे तो उसे रुकवाया जाएगा।
- अजमेर सिंह, वन दरोगा, वन और वन्यजीव प्रभाग
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शारदा डैम के बाहरी हिस्से में डैम की तलहटी से लेकर छह सौ फिट चौड़ाई तक वर्जित क्षेत्र है। इस क्षेत्र पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। पिछले दिनों प्रशासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने सींचपालों को लगाकर शारदा डैम के बाहरी हिस्से में डैम की तलहटी से वर्जित क्षेत्र में अवैध कब्जों की पहले बनाई गई सूची को संशोधित कर उसमें कुछ नए बिंदुओं को शामिल कर नई सूची बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसमें प्रत्येक दो किमी क्षेत्र में दो सींचपालों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रथम चरण में शून्य से दस किमी तक अवैध कब्जेदारों की सूची बनाने का कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है।
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अवैध कब्जेदारों में किसने झोपड़ी या पक्का निर्माण कर मकान या दुकानों का निर्माण कर रखा है इन बिंदुओं को सूची में दर्ज किया जा रहा है। इन अवैध कब्जेदारों को हटाया जाएगा या स्थाई किया जाएगा इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। यह भी डर है कि कभी भी प्रशासन की मदद से सिंचाई विभाग उन्हें यहां से बेदखल कर सकता है। इसके चलते अवैध कब्जेदारों ने अपने कब्जे वाली भूमि पर खड़े यूकेलिप्टस और पॉपुलर के पेड़ों को ठेकेदारों को बेचकर कटान शुरू कर दिया है। फ्री प्रजाति के होने के चलते वन विभाग से निकासी रवन्ना का भी कोई प्रतिबंध नहीं है। इसका ठेकेदार भी फायदा उठा रहे है। दिन में लकड़ी से लदे कई ट्रक क्षेत्र से बाहर ले जाए जा रहे है। हालांकि शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में पेड़ों का कटान भी वर्जित है, लेकिन पुलिस और वन विभाग से ठेकेदारों ने साठगांठ कर रखी है।
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शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र का एरिया कहां तक है। उसमें जो यूकेलिप्टस या पॉपुलर के पेड़ काटे जा रहे है, सिंचाई विभाग को रोकना चाहिए। अगर भूमि पर खड़े वृक्ष सरकारी हैं तो हमारे विभाग को भी लिखित दे तो उसे रुकवाया जाएगा।
- अजमेर सिंह, वन दरोगा, वन और वन्यजीव प्रभाग