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20 घंटे बाद बच्चे का शव देख आस टूटी तो दिल बैठ गया

Thu, 12 Sep 2019 02:46 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 12 Sep 2019 02:46 AM IST
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पीलीभीत/गजरौला। कार की बाइक में टक्कर लगने से छिटककर कल्यानपुर नहर में गिरे मासूम अनमोल के परिवार को पूरी उम्मीद थी कि उनका बच्चा जीवित मिल जाएगा। दूसरे दिन बुधवार सुबह 20 घंटे की तलाश के बाद जब उसका शव नहर के झाल में फंसा मिला तो उनकी आस टूट गई। तलाश कर रहे एसएसबी के गोताखोरों ने शव को बाहर निकाला। इसके बाद गजरौला पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजन से तहरीर न मिलने के कारण अभी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
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हादसा मंगलवार दोपहर एक बजे माधेाटांडा रोड पर कल्यानपुर नहर के पास हुआ था। कार की टक्कर लगने से बाइक पर आगे बैठा बिलसंडा थाना क्षेत्र के कनपरी गांव निवासी छह वर्षीय अनमोल पुत्र प्रभुदयाल उछलकर नहर में गिर गया था, जबकि उसके पिता प्रभुदयाल, मामा पवन और मौसी लालता देवी घायल हो गए थे। कार चालक को भीड़ ने पकड़कर पिटाई करने के बाद पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। पुलिस नहर में डूबे अनमोल उर्फ ज्ञानदीप उर्फ गयादीन की तलाश करती रही। एसएसबी के गोताखोर भी लगाए गए, लेकिन पहले दिन कुछ पता नहीं लग सका था। दूसरे दिन बुधवार सुबह इंस्पेक्टर गजरौला नरेश कश्यप ने पुलिस और एसएसबी के गोताखोरों के साथ नहर में बच्चे की तलाश की। सुबह करीब नौ बजे करीब डेढ़ किमी की दूरी पर नहर की झाल में अनमोल का शव मिल गया। जानकारी मिलने पर परिवार में चीख पुकार मच गई। इंस्पेक्टर गजरौला ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। अभी कोई तहरीर नहीं मिली है।
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भांजी के यहां छोछक देकर लौट रहे परिवार को हादसे से मिला जिंदगी भर का गम
बिलसंडा (पीलीभीत)। कल्यानपुर नहर में डूबे अनमोल का शव मिलने के बाद परिवार की उसके जिंदा मिलने की आस भी खत्म हो गई। सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। हर कोई परिवार के इस गम में साथ खड़ा दिखाई दिया। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस से लेकर घर तक परिजन को ढाढ़स बंधाने वाले ग्रामीणों की भीड़ लगी रही।
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प्रभुदयाल की माली हालत बहुत बेहतर नहीं है। वह मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। पिता से मिली पांच बीघा जमीन भी है। हादसे में जान गंवाने वाला अनमोल, प्रभुदयाल का इकलौता बेटा था। इसके अलावा चार बेटियां रोहिनी, ज्योति, निशा, जिज्ञासा हैं। अनमोल अभी पढ़ाई नहीं करता था, लेकिन वह कुछ सीख ले इसलिए उसको गांव के सरकारी स्कूल में बैठा दिया जाता था।

प्रभुदयाल की भांजी न्यूरिया के बिथरा गांव निवासी सविता के घर बच्चे का नामकरण संस्कार था। प्रभुदयाल हंसी-खुशी परिवार के लोगों के साथ सोमवार दोपहर भांजी के यहां छोछक लेकर गए थे। मंगलवार दोपहर वापसी करते वक्त अनमोल, पिता, मामा और मौसी के साथ बाइक पर था। मां रजनी देवी अन्य रिश्तेदारों संग पीछे ट्रैक्टर ट्रॉली से घर आ रहीं थीं। बाइक पर पहले से तीन लोग होने के कारण अनमोल को आगे टंकी पर बैठा लिया गया था। बाइक अनमोल के मामा पवन चला रहे थे। नहर के पास कार की टक्कर लगने से अनमोल उछलकर नहर में जा गिरा। परिवार वाले उसे बचाने के लिए कुछ न कर सके। उसकी मौत के बाद परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मां रजनी बार-बार बेटे के गम में चीखकर रोती और गश खा जाती हैं। परिवार और गांव की महिलाएं उसको संभालने में जुटी रहीं।
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